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Jind News: मुश्किल हालात में भी नहीं टूटा प्राची का हौसला, खेल के दम पर पाई नौकरी
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25जेएनडी06: प्राची।
- फोटो : जैन मंदिर पर रोडवेज बस में चढ़ती सवारी। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। अगर हौसले बुलंद हों तो मुश्किल हालात भी रास्ता नहीं रोक सकते। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है नरवाना की मोर पट्टी निवासी प्राची ने जिसने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद खेल के दम पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में नौकरी हासिल कर अलग पहचान बनाई।
प्राची ने नौवीं कक्षा में हैंडबॉल खेलना शुरू किया था। शुरुआत में साधारण स्तर से खेलते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अपनी मेहनत और लगन से जिला, राज्य और फिर राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाई। बीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2017 में उन्हें एसएसबी में नौकरी मिल गई। वर्तमान में वह लखनऊ में तैनात हैं।
प्राची के जीवन में वर्ष 2015 एक कठिन दौर आया जब उनके पिता का निधन हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनकी मां ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया और खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसी हौसले ने उन्हें मैदान में मजबूती से खड़ा रखा।
प्राची ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक जीते। उनकी सफलता के पीछे रोजाना सुबह और शाम तीन से चार घंटे का कड़ा अभ्यास रहा है। उन्होंने अनुशासन और निरंतर मेहनत को अपनी ताकत बनाया।
बाक्स
प्रतिदिन चार से पांच घंटे किया अभ्यास
प्राची का लक्ष्य था कि खेल के दम पर सेना में जाना है। इसके लिए उन्होंने खेल के मैदान में प्रतिदिन चार से पांच घंटे का अभ्यास किया। इसके कारण वह खुद को सेना के लिए फिट हुई हालांकि वह अब सेना में भी खेल रही है। उनका लक्ष्य अब एशियन चैंपियनशिप में पदक जीतना है।
फोटो कैप्शन
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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। अगर हौसले बुलंद हों तो मुश्किल हालात भी रास्ता नहीं रोक सकते। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है नरवाना की मोर पट्टी निवासी प्राची ने जिसने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद खेल के दम पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में नौकरी हासिल कर अलग पहचान बनाई।
प्राची ने नौवीं कक्षा में हैंडबॉल खेलना शुरू किया था। शुरुआत में साधारण स्तर से खेलते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अपनी मेहनत और लगन से जिला, राज्य और फिर राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाई। बीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2017 में उन्हें एसएसबी में नौकरी मिल गई। वर्तमान में वह लखनऊ में तैनात हैं।
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प्राची के जीवन में वर्ष 2015 एक कठिन दौर आया जब उनके पिता का निधन हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनकी मां ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया और खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसी हौसले ने उन्हें मैदान में मजबूती से खड़ा रखा।
प्राची ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक जीते। उनकी सफलता के पीछे रोजाना सुबह और शाम तीन से चार घंटे का कड़ा अभ्यास रहा है। उन्होंने अनुशासन और निरंतर मेहनत को अपनी ताकत बनाया।
बाक्स
प्रतिदिन चार से पांच घंटे किया अभ्यास
प्राची का लक्ष्य था कि खेल के दम पर सेना में जाना है। इसके लिए उन्होंने खेल के मैदान में प्रतिदिन चार से पांच घंटे का अभ्यास किया। इसके कारण वह खुद को सेना के लिए फिट हुई हालांकि वह अब सेना में भी खेल रही है। उनका लक्ष्य अब एशियन चैंपियनशिप में पदक जीतना है।
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