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Jind News: जयंती देवी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का समापन, सुदामा-श्रीकृष्ण मिलन प्रसंग ने मोहा मन
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28जेएनडी25: कथा के दौरान पूजा अर्चना करते हुए श्रद्धालु। संवाद
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जींद। जयंती देवी मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में हुआ। कथा के अंतिम दिन कथा वाचक पंडित गिरधारी लाल ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के मिलन का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंचे और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
पंडित गिरधारी लाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्त के प्रेम और श्रद्धा के भाव को महत्व देते हैं, न कि धन-दौलत को। सुदामा ने भगवान श्रीकृष्ण को केवल मुट्ठीभर चावल भेंट किए थे, लेकिन भगवान ने अपने मित्र का जीवन सुख और समृद्धि से भर दिया।
उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान के प्रति अटूट विश्वास रखने, सेवा भावना अपनाने और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कथा समापन के अवसर पर मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की गई।
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इसके बाद मंदिर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने स्वयं व्यवस्थाओं की देखरेख करते हुए श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित किया।
समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने कथा आयोजन को आध्यात्मिक रूप से प्रेरणादायक बताते हुए आयोजकों का आभार जताया। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर जय श्रीकृष्ण और जय माता दी के जयघोषों से गूंजता रहा।
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पंडित गिरधारी लाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्त के प्रेम और श्रद्धा के भाव को महत्व देते हैं, न कि धन-दौलत को। सुदामा ने भगवान श्रीकृष्ण को केवल मुट्ठीभर चावल भेंट किए थे, लेकिन भगवान ने अपने मित्र का जीवन सुख और समृद्धि से भर दिया।
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उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान के प्रति अटूट विश्वास रखने, सेवा भावना अपनाने और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कथा समापन के अवसर पर मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की गई।
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इसके बाद मंदिर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने स्वयं व्यवस्थाओं की देखरेख करते हुए श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित किया।
समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने कथा आयोजन को आध्यात्मिक रूप से प्रेरणादायक बताते हुए आयोजकों का आभार जताया। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर जय श्रीकृष्ण और जय माता दी के जयघोषों से गूंजता रहा।

28जेएनडी25: कथा के दौरान पूजा अर्चना करते हुए श्रद्धालु। संवाद