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Jind News: नाटक में प्रशासनिक विडंबना को किया उजागर
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27जेएनडी03-एक और मीटिंग नाटक में प्रशासनिक ढांचे पर व्यंग्य करते कलाकार। स्रोत संगठन
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जींद। शैडो चिल्ड्रन रिसर्च सेंटर फॉर थिएटर एंड टीवी और संस्कार भारती इकाई के संयुक्त तत्वावधान में हरियाणा कला परिषद के सहयोग से तीन दिवसीय जयंती नाट्य समारोह सोमवार को दीवान बाल कृष्ण रंगशाला में शुरू हुआ।
जयंती समारोह के प्रथम दिन थिएटर फॉर थिएटर चंडीगढ़ की ओर से हिंदी नाटक एक और मीटिंग का मंचन हुआ। इसके नाटककार जयवर्धन रहे। निर्देशक करण चौहान और सुदेश शर्मा ने नाटक की परिकलना की। मुख्य अतिथि आधारशिला स्कूल की निर्देशिका अंजू सिहाग रही। अध्यक्षता डॉ राजकुमार गोयल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में समुद्र लाठर, अन्ना टीम से सुनील वशिष्ठ, डॉ सुरेश जैन, प्रोफेसर डॉ. मंजू तोमर रहे।
नाट्य समारोह में दिखाया गया कि नाटक समय की उस विडंबना को मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास है जहां समस्याएं तो वास्तविक और गंभीर होती हैं पर उनके समाधान के लिए होने वाली बैठकों का स्वरूप अक्सर औपचारिकता और दिखावे तक सीमित रह जाता है।
आज के प्रशासनिक और संस्थागत ढांचे में अक्सर देखते हैं कि मीटिंग पर मीटिंग होती रहती हैं लेकिन उन बैठकों से निकलने वाले निष्कर्ष या तो अधूरे रह जाते हैं या फिर कागजों तक सिमट कर रह जाते हैं। नाटक के माध्यम से हमने उसी प्रवृत्ति को व्यंग्यात्मक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
मुख्य अतिथि अंजू सिहाग ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम न बनकर एक विचारोत्तेजक अनुभव भी बने। यदि यह प्रस्तुति दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ व्यवस्था और समाज के कुछ पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित कर सके तो हमारा यह प्रयास सार्थक होगा।
दर्शक हंसते हुए भी भीतर ही भीतर यह सोचने पर मजबूर हुए कि क्या सचमुच इन बैठकों का कोई सार्थक परिणाम निकलता है। इस अवसर पर संस्कार भारती की कोषाध्यक्ष हिमानी गुप्ता, दीपक कौशिक, मंजू मानव, सुरेश जैन, सुनीता भट्टी, सचिन बडाला, ऋषि नागर, जितेंद्र अहलावत, अंकित शर्मा, देव सुमन और डॉ. हनीफ रहे।
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जयंती समारोह के प्रथम दिन थिएटर फॉर थिएटर चंडीगढ़ की ओर से हिंदी नाटक एक और मीटिंग का मंचन हुआ। इसके नाटककार जयवर्धन रहे। निर्देशक करण चौहान और सुदेश शर्मा ने नाटक की परिकलना की। मुख्य अतिथि आधारशिला स्कूल की निर्देशिका अंजू सिहाग रही। अध्यक्षता डॉ राजकुमार गोयल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में समुद्र लाठर, अन्ना टीम से सुनील वशिष्ठ, डॉ सुरेश जैन, प्रोफेसर डॉ. मंजू तोमर रहे।
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नाट्य समारोह में दिखाया गया कि नाटक समय की उस विडंबना को मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास है जहां समस्याएं तो वास्तविक और गंभीर होती हैं पर उनके समाधान के लिए होने वाली बैठकों का स्वरूप अक्सर औपचारिकता और दिखावे तक सीमित रह जाता है।
आज के प्रशासनिक और संस्थागत ढांचे में अक्सर देखते हैं कि मीटिंग पर मीटिंग होती रहती हैं लेकिन उन बैठकों से निकलने वाले निष्कर्ष या तो अधूरे रह जाते हैं या फिर कागजों तक सिमट कर रह जाते हैं। नाटक के माध्यम से हमने उसी प्रवृत्ति को व्यंग्यात्मक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
मुख्य अतिथि अंजू सिहाग ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम न बनकर एक विचारोत्तेजक अनुभव भी बने। यदि यह प्रस्तुति दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ व्यवस्था और समाज के कुछ पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित कर सके तो हमारा यह प्रयास सार्थक होगा।
दर्शक हंसते हुए भी भीतर ही भीतर यह सोचने पर मजबूर हुए कि क्या सचमुच इन बैठकों का कोई सार्थक परिणाम निकलता है। इस अवसर पर संस्कार भारती की कोषाध्यक्ष हिमानी गुप्ता, दीपक कौशिक, मंजू मानव, सुरेश जैन, सुनीता भट्टी, सचिन बडाला, ऋषि नागर, जितेंद्र अहलावत, अंकित शर्मा, देव सुमन और डॉ. हनीफ रहे।

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