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Kaithal News: टोल दरें बढ़ीं तो गांवों की सड़कों पर बढ़ा ट्रैफिक
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 02 Apr 2026 01:11 AM IST
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27 कैथल से पेहवा रोड पर बना टोल प्लाजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। टोल प्लाजा पर शुल्क में पांच से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी का असर अब जमीनी स्तर पर साफ नजर आने लगा है। टोल बचाने के लिए वाहन चालक वैकल्पिक मार्गों का सहारा ले रहे हैं, जिससे थाना क्षेत्र के गांवों से होकर वाहनों की आवाजाही तेजी से बढ़ गई है। इससे ग्रामीण सड़कों पर दबाव बढ़ने के साथ ही स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
टोल दरों में वृद्धि का सबसे अधिक असर लंबी दूरी तय करने वाले वाहनों पर पड़ा है। ट्रक, बस और अन्य वाणिज्यिक वाहन चालक टोल शुल्क से बचने के लिए गांवों के अंदरूनी रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे जहां उनके खर्च में कुछ राहत मिल रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण सड़कों के जल्दी खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है।
ग्रामीणों में बढ़ी चिंता : गांवों से होकर बढ़ते ट्रैफिक के कारण सड़क हादसों की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि संकरी सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों में बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही ग्रामीण सड़कों की सुरक्षा और मजबूती के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके।
फास्टैग अनिवार्यता वजह
टोल प्लाजा पर अब फास्टैग व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। अधिकांश लेन में केवल फास्टैग से ही टोल वसूला जा रहा है, जिससे नकद भुगतान की सुविधा सीमित हो गई है। जिन वाहनों पर फास्टैग नहीं है, उन्हें दोगुना शुल्क देना पड़ रहा है। इसी कारण कई चालक टोल से बचने के लिए वैकल्पिक रास्ते अपना रहे हैं।
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कैथल। टोल प्लाजा पर शुल्क में पांच से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी का असर अब जमीनी स्तर पर साफ नजर आने लगा है। टोल बचाने के लिए वाहन चालक वैकल्पिक मार्गों का सहारा ले रहे हैं, जिससे थाना क्षेत्र के गांवों से होकर वाहनों की आवाजाही तेजी से बढ़ गई है। इससे ग्रामीण सड़कों पर दबाव बढ़ने के साथ ही स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
टोल दरों में वृद्धि का सबसे अधिक असर लंबी दूरी तय करने वाले वाहनों पर पड़ा है। ट्रक, बस और अन्य वाणिज्यिक वाहन चालक टोल शुल्क से बचने के लिए गांवों के अंदरूनी रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे जहां उनके खर्च में कुछ राहत मिल रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण सड़कों के जल्दी खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है।
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ग्रामीणों में बढ़ी चिंता : गांवों से होकर बढ़ते ट्रैफिक के कारण सड़क हादसों की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि संकरी सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों में बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही ग्रामीण सड़कों की सुरक्षा और मजबूती के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके।
फास्टैग अनिवार्यता वजह
टोल प्लाजा पर अब फास्टैग व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। अधिकांश लेन में केवल फास्टैग से ही टोल वसूला जा रहा है, जिससे नकद भुगतान की सुविधा सीमित हो गई है। जिन वाहनों पर फास्टैग नहीं है, उन्हें दोगुना शुल्क देना पड़ रहा है। इसी कारण कई चालक टोल से बचने के लिए वैकल्पिक रास्ते अपना रहे हैं।