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Kaithal News: बदलती जीवनशैली ने बढ़ाया मधुमेह का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 02 Apr 2026 01:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के कारण मधुमेह के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिला नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग जांच और उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। पहले जहां ओपीडी में शुगर से संबंधित 8-9 मरीज आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 20-21 मरीज प्रतिदिन हो गई है।
जिला नागरिक अस्पताल की डाइटीशियन डॉ. रश्मि के अनुसार, खानपान में बदलाव और अनियमित दिनचर्या इस समस्या के मुख्य कारण हैं। कहा कि चिंता की बात यह है कि अब युवा वर्ग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है।
उन्होंने बताया कि लोग पारंपरिक संतुलित भोजन की बजाय फास्ट फूड, अधिक तेल-मसाले वाले व्यंजन, मीठे पेय पदार्थ और पैकेज्ड फूड का अधिक सेवन कर रहे हैं। इसके अलावा शारीरिक गतिविधियों में कमी, देर रात तक जागना और बढ़ता तनाव भी मधुमेह के खतरे को बढ़ा रहे हैं।
डॉ. रश्मि ने बताया कि पहले मधुमेह को उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 25 से 40 वर्ष के युवा भी बड़ी संख्या में इसके शिकार हो रहे हैं। यह बदलाव समाज के लिए गंभीर चेतावनी है।
नियमित दिनचर्या जरूरी
डाइटीशियन डॉ. रश्मि के अनुसार, मधुमेह से बचाव के लिए संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या सबसे जरूरी है। भोजन में हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए, जबकि मीठे और तले-भुने खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए। रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या पैदल चलना जरूरी है। साथ ही समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच करवानी चाहिए, विशेषकर उन लोगों के लिए जिनके परिवार में पहले से मधुमेह के मरीज हैं। शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर इस बीमारी को नियंत्रित करना आसान होता है।
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कैथल। बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के कारण मधुमेह के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिला नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग जांच और उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। पहले जहां ओपीडी में शुगर से संबंधित 8-9 मरीज आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 20-21 मरीज प्रतिदिन हो गई है।
जिला नागरिक अस्पताल की डाइटीशियन डॉ. रश्मि के अनुसार, खानपान में बदलाव और अनियमित दिनचर्या इस समस्या के मुख्य कारण हैं। कहा कि चिंता की बात यह है कि अब युवा वर्ग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है।
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उन्होंने बताया कि लोग पारंपरिक संतुलित भोजन की बजाय फास्ट फूड, अधिक तेल-मसाले वाले व्यंजन, मीठे पेय पदार्थ और पैकेज्ड फूड का अधिक सेवन कर रहे हैं। इसके अलावा शारीरिक गतिविधियों में कमी, देर रात तक जागना और बढ़ता तनाव भी मधुमेह के खतरे को बढ़ा रहे हैं।
डॉ. रश्मि ने बताया कि पहले मधुमेह को उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 25 से 40 वर्ष के युवा भी बड़ी संख्या में इसके शिकार हो रहे हैं। यह बदलाव समाज के लिए गंभीर चेतावनी है।
नियमित दिनचर्या जरूरी
डाइटीशियन डॉ. रश्मि के अनुसार, मधुमेह से बचाव के लिए संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या सबसे जरूरी है। भोजन में हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए, जबकि मीठे और तले-भुने खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए। रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या पैदल चलना जरूरी है। साथ ही समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच करवानी चाहिए, विशेषकर उन लोगों के लिए जिनके परिवार में पहले से मधुमेह के मरीज हैं। शुरुआती अवस्था में पहचान होने पर इस बीमारी को नियंत्रित करना आसान होता है।