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Kaithal News: अदालत ने बैंक के पक्ष में सुनाया फैसला, किसान से 3.28 लाख रुपये की वसूली का आदेश
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कैथल। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) गुहला की अदालत ने एक बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए किसान तरसेम सिंह को 3,28,092 रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। अदालत में बैंक की ओर से बताया गया कि तरसेम सिंह ने 10 फरवरी 2021 को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत 2.40 लाख रुपये और 90 हजार रुपये का टर्म लोन लिया था। ऋण की सुरक्षा के लिए उसने 11 कनाल 14 मरला कृषि भूमि बैंक के पक्ष में बंधक रखी थी। बैंक ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऋण राशि जारी कर दी लेकिन उधारकर्ता ने समय पर किस्तों का भुगतान नहीं किया। कई बार नोटिस भेजने और बकाया राशि जमा कराने के लिए संपर्क करने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
बैंक ने अदालत में ऋण आवेदन, बंधक पत्र, हाइपोथिकेशन एग्रीमेंट, खाते का विवरण, कानूनी नोटिस और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए। शाखा प्रबंधक ने गवाही देकर बैंक के दावे का समर्थन किया। प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ और न ही बैंक के दावों का कोई खंडन किया। अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए बैंक का दावा सही पाया। अदालत ने अपने आदेश में प्रतिवादी को 3,28,092 रुपये की डिक्री राशि के साथ वाद दायर करने की तिथि से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही तीन माह के भीतर राशि जमा करने का समय दिया गया है। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो बैंक बंधक व गिरवी रखी संपत्ति की बिक्री कर कानूनी प्रक्रिया के तहत बकाया राशि की वसूली कर सकेगा।
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बैंक ने अदालत में ऋण आवेदन, बंधक पत्र, हाइपोथिकेशन एग्रीमेंट, खाते का विवरण, कानूनी नोटिस और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए। शाखा प्रबंधक ने गवाही देकर बैंक के दावे का समर्थन किया। प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ और न ही बैंक के दावों का कोई खंडन किया। अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए बैंक का दावा सही पाया। अदालत ने अपने आदेश में प्रतिवादी को 3,28,092 रुपये की डिक्री राशि के साथ वाद दायर करने की तिथि से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश दिए हैं।
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साथ ही तीन माह के भीतर राशि जमा करने का समय दिया गया है। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो बैंक बंधक व गिरवी रखी संपत्ति की बिक्री कर कानूनी प्रक्रिया के तहत बकाया राशि की वसूली कर सकेगा।
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