{"_id":"6a398c86c788dbf0b80a9301","slug":"devotees-commemorated-lifes-ideals-on-mamma-diwas-kaithal-news-c-245-1-kht1012-151283-2026-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: मम्मा दिवस पर श्रद्धालुओं ने किया जीवन आदर्शों का स्मरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: मम्मा दिवस पर श्रद्धालुओं ने किया जीवन आदर्शों का स्मरण
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 23 Jun 2026 12:57 AM IST
विज्ञापन
मम्मा दिवस पर सेवा केंद्र सुख शांति भवन में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद भाई बहन व अन्य।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। राजौंद स्थित सेवा केंद्र सुख शांति भवन में ब्रह्माकुमारीज संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती (मम्मा) का स्मृति दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। संस्था में इस दिवस को ‘मम्मा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और मम्मा के जीवन आदर्शों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
मुख्य वक्ता देवभूमि उत्तराखंड के वरिष्ठ राजयोगी ब्रह्माकुमार मेहरचंद ने बताया कि मम्मा का जन्म वर्ष 1919 में अमृतसर में हुआ था तथा उनका बचपन का नाम ओम राधे था। उन्होंने कहा कि मम्मा बचपन से ही प्रतिभाशाली, अनुशासित और आध्यात्मिक प्रवृत्ति की थीं। ब्रह्मा बाबा से प्राप्त ईश्वरीय ज्ञान को वे तुरंत अपने जीवन में धारण कर लेती थीं और उसी के अनुरूप आचरण करती थीं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1937 में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना के समय मम्मा को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, जिन्हें उन्होंने पूरी निष्ठा, समर्पण और कुशलता के साथ निभाया। ब्रह्माकुमार मेहरचंद ने मम्मा के छह प्रमुख गुणों स्वधर्म में स्थिति, मौन की शक्ति, सत्य एवं मर्यादा का पालन, श्रेष्ठ संकल्प, ईश्वरीय आज्ञाकारिता तथा मातृत्व भाव का उल्लेख करते हुए कहा कि ये गुण आज भी प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
विज्ञापन
राजौंद। राजौंद स्थित सेवा केंद्र सुख शांति भवन में ब्रह्माकुमारीज संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती (मम्मा) का स्मृति दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। संस्था में इस दिवस को ‘मम्मा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और मम्मा के जीवन आदर्शों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
मुख्य वक्ता देवभूमि उत्तराखंड के वरिष्ठ राजयोगी ब्रह्माकुमार मेहरचंद ने बताया कि मम्मा का जन्म वर्ष 1919 में अमृतसर में हुआ था तथा उनका बचपन का नाम ओम राधे था। उन्होंने कहा कि मम्मा बचपन से ही प्रतिभाशाली, अनुशासित और आध्यात्मिक प्रवृत्ति की थीं। ब्रह्मा बाबा से प्राप्त ईश्वरीय ज्ञान को वे तुरंत अपने जीवन में धारण कर लेती थीं और उसी के अनुरूप आचरण करती थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि वर्ष 1937 में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना के समय मम्मा को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, जिन्हें उन्होंने पूरी निष्ठा, समर्पण और कुशलता के साथ निभाया। ब्रह्माकुमार मेहरचंद ने मम्मा के छह प्रमुख गुणों स्वधर्म में स्थिति, मौन की शक्ति, सत्य एवं मर्यादा का पालन, श्रेष्ठ संकल्प, ईश्वरीय आज्ञाकारिता तथा मातृत्व भाव का उल्लेख करते हुए कहा कि ये गुण आज भी प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।