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Kaithal News: कतारों में मरीज... मिल नहीं पा रहा समय पर इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 23 Jun 2026 01:08 AM IST
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मेडिकल ओपीडी में अपनी बारी का इंतजार करते मरीज। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों को इलाज करवाने में पसीने छूट रहे हैं। एक मरीज को उपचार प्राप्त करने के लिए चार से पांच अलग-अलग स्थानों पर कतार में लगना पड़ता है। पर्ची कटवाने, डॉक्टर को दिखाने, जांच करवाने और दवाई लेने के लिए हर जगह आधे घंटे से लेकर एक घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसके बावजूद मरीजों को समय पर और पूर्ण इलाज नहीं मिल पा रहा है।
अस्पताल में मरीजों के बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कई मरीज घंटों तक कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। सुबह सात से आठ बजे के बीच ही बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच जाते हैं, लेकिन तब तक पर्ची काउंटरों के बाहर लंबी कतारें लग चुकी होती हैं।
किसी तरह पर्ची कटने के बाद डॉक्टर से परामर्श लेने के लिए भी आधे घंटे से एक घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। यही स्थिति जांच की पर्ची बनवाने और जांच करवाने के दौरान भी देखने को मिलती है।
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सबसे अधिक परेशानी अस्पताल की फार्मेसी में देखने को मिल रही है। यहां मरीजों को दवाई लेने के लिए कई बार एक घंटे से भी अधिक समय तक लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। मरीजों का कहना है कि फार्मेसी पर अक्सर विवाद की स्थिति भी बन जाती है। कई बार युवा मरीज वरिष्ठ नागरिकों के लिए निर्धारित कतार में खड़े हो जाते हैं, जबकि कुछ लोग सिफारिश के आधार पर बीच में ही दवाई ले लेते हैं। इससे लंबे समय से लाइन में खड़े मरीजों में नाराजगी बढ़ जाती है।
ओपीडी 1500 के पार : पिछले कुछ वर्षों में अस्पताल की ओपीडी लगभग दोगुनी हो चुकी है, लेकिन उसके अनुरूप सुविधाओं में विस्तार नहीं हो पाया है। सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब 1500 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, जबकि सोमवार को यह संख्या दो हजार तक पहुंच जाती है। भीड़ इतनी अधिक हो जाती है कि मरीज के लिए एक ही दिन में डॉक्टर को दिखाना और जांच करवाना संभव नहीं हो पाता। अक्सर मरीज को पहले दिन डॉक्टर से परामर्श लेना पड़ता है और फिर दूसरे दिन जांच के लिए दोबारा अस्पताल आना पड़ता है। इसके बाद रिपोर्ट लेने और पुनः डॉक्टर को दिखाने में कई दिन लग जाते हैं। अस्पताल में सबसे अधिक मरीज महिला रोग विशेषज्ञ और फिजिशियन के पास पहुंच रहे हैं।जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों के 55 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 15 पद खाली पड़े हैं।
पर्ची कटवाने मंे लगा एक घंटा : गुलाब
मेरी बेटी बीमार है। उसे सिरदर्द और चक्कर आने की शिकायत है। सुबह करीब साढ़े आठ बजे अस्पताल पहुंचे थे। पहले एक घंटा पर्ची कटवाने के लिए लाइन में लगे रहे और अब करीब आधे घंटे से दवाई लेने के लिए कतार में खड़े हैं। -गुलाब सिंह, खनौदा गांव
बुखार में खड़ा होना मुश्किल : अमन
बुखार होने के कारण इलाज के लिए सीवन से अस्पताल आया हूं। बुखार की हालत में घंटों तक कतार में खड़ा रहना बहुत मुश्किल है। यदि थोड़ी देर बैठ जाएं तो दोबारा लाइन में लगने में परेशानी होती है। सुबह से यह दूसरी लाइन है और इसके बाद दवाई लेने के लिए भी इंतजार करना पड़ेगा। -अमन कुमार, सीवन
सामान्य दिनों की तुलना में सोमवार को अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक रहती है। पहले की अपेक्षा सुविधाओं में भी बढ़ोतरी की गई है। विभाग का प्रयास है कि मरीजों को कम से कम परेशानी हो। इसी उद्देश्य से ओपीडी में अधिक से अधिक डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है।
- डॉ. रेनू चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल
कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों को इलाज करवाने में पसीने छूट रहे हैं। एक मरीज को उपचार प्राप्त करने के लिए चार से पांच अलग-अलग स्थानों पर कतार में लगना पड़ता है। पर्ची कटवाने, डॉक्टर को दिखाने, जांच करवाने और दवाई लेने के लिए हर जगह आधे घंटे से लेकर एक घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसके बावजूद मरीजों को समय पर और पूर्ण इलाज नहीं मिल पा रहा है।
अस्पताल में मरीजों के बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कई मरीज घंटों तक कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। सुबह सात से आठ बजे के बीच ही बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच जाते हैं, लेकिन तब तक पर्ची काउंटरों के बाहर लंबी कतारें लग चुकी होती हैं।
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किसी तरह पर्ची कटने के बाद डॉक्टर से परामर्श लेने के लिए भी आधे घंटे से एक घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। यही स्थिति जांच की पर्ची बनवाने और जांच करवाने के दौरान भी देखने को मिलती है।
सबसे अधिक परेशानी अस्पताल की फार्मेसी में देखने को मिल रही है। यहां मरीजों को दवाई लेने के लिए कई बार एक घंटे से भी अधिक समय तक लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। मरीजों का कहना है कि फार्मेसी पर अक्सर विवाद की स्थिति भी बन जाती है। कई बार युवा मरीज वरिष्ठ नागरिकों के लिए निर्धारित कतार में खड़े हो जाते हैं, जबकि कुछ लोग सिफारिश के आधार पर बीच में ही दवाई ले लेते हैं। इससे लंबे समय से लाइन में खड़े मरीजों में नाराजगी बढ़ जाती है।
ओपीडी 1500 के पार : पिछले कुछ वर्षों में अस्पताल की ओपीडी लगभग दोगुनी हो चुकी है, लेकिन उसके अनुरूप सुविधाओं में विस्तार नहीं हो पाया है। सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब 1500 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, जबकि सोमवार को यह संख्या दो हजार तक पहुंच जाती है। भीड़ इतनी अधिक हो जाती है कि मरीज के लिए एक ही दिन में डॉक्टर को दिखाना और जांच करवाना संभव नहीं हो पाता। अक्सर मरीज को पहले दिन डॉक्टर से परामर्श लेना पड़ता है और फिर दूसरे दिन जांच के लिए दोबारा अस्पताल आना पड़ता है। इसके बाद रिपोर्ट लेने और पुनः डॉक्टर को दिखाने में कई दिन लग जाते हैं। अस्पताल में सबसे अधिक मरीज महिला रोग विशेषज्ञ और फिजिशियन के पास पहुंच रहे हैं।जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों के 55 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 15 पद खाली पड़े हैं।
पर्ची कटवाने मंे लगा एक घंटा : गुलाब
मेरी बेटी बीमार है। उसे सिरदर्द और चक्कर आने की शिकायत है। सुबह करीब साढ़े आठ बजे अस्पताल पहुंचे थे। पहले एक घंटा पर्ची कटवाने के लिए लाइन में लगे रहे और अब करीब आधे घंटे से दवाई लेने के लिए कतार में खड़े हैं। -गुलाब सिंह, खनौदा गांव
बुखार में खड़ा होना मुश्किल : अमन
बुखार होने के कारण इलाज के लिए सीवन से अस्पताल आया हूं। बुखार की हालत में घंटों तक कतार में खड़ा रहना बहुत मुश्किल है। यदि थोड़ी देर बैठ जाएं तो दोबारा लाइन में लगने में परेशानी होती है। सुबह से यह दूसरी लाइन है और इसके बाद दवाई लेने के लिए भी इंतजार करना पड़ेगा। -अमन कुमार, सीवन
सामान्य दिनों की तुलना में सोमवार को अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक रहती है। पहले की अपेक्षा सुविधाओं में भी बढ़ोतरी की गई है। विभाग का प्रयास है कि मरीजों को कम से कम परेशानी हो। इसी उद्देश्य से ओपीडी में अधिक से अधिक डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है।
- डॉ. रेनू चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल

मेडिकल ओपीडी में अपनी बारी का इंतजार करते मरीज। संवाद

मेडिकल ओपीडी में अपनी बारी का इंतजार करते मरीज। संवाद