{"_id":"6a6f9c18971e1bea5707f0ef","slug":"doctor-used-to-extort-money-by-posing-as-a-food-safety-officer-kaithal-news-c-18-1-knl1004-961654-2026-08-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: फर्जी फूड अफसर बन वसूली करता था डॉक्टर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: फर्जी फूड अफसर बन वसूली करता था डॉक्टर
Mon, 03 Aug 2026 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 03 Aug 2026 01:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज, एजेंसीकैथल। 28 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए वेटनरी सर्जन डॉ. अंकुर के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी सरकारी पशु चिकित्सक होने के बावजूद खुद को फूड सेफ्टी अधिकारी बताकर डेयरी संचालकों और दूध विक्रेताओं से वसूली करता था।
एसीबी के अनुसार, आरोपी दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच करने के नाम पर डेयरियों पर पहुंचता था और डर दिखाकर रुपये मांगता था। उसकी वेशभूषा और बातचीत के तरीके के कारण कई लोग उसे फूड सेफ्टी अधिकारी समझ लेते थे।
एसीबी कैथल यूनिट के इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने बताया कि जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि आरोपी पहले भी कई डेयरी संचालकों और दूध विक्रेताओं को अपना निशाना बना चुका था। यदि कोई दुकानदार रुपये देने से मना करता था तो उसे कार्रवाई और छापेमारी की धमकी दी जाती थी।
विज्ञापन
भैंसों के सत्यापन के लिए मांगी थी 30 हजार रुपये रिश्वत : सौंगरी निवासी राममेहर ने एसीबी को दी शिकायत में बताया था कि उसे अपनी डेयरी की भैंसों पर बैंक से ऋण लेना था। इसके लिए बैंक ने पशुओं का हेल्थ सर्टिफिकेट मांगा था, जिस पर पट्टी अफगान में तैनात वेटनरी सर्जन डॉ. अंकुर के हस्ताक्षर जरूरी थे।
15 जुलाई को सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर करवाने पहुंचे राममेहर से डॉक्टर ने 30 हजार रुपये की मांग की। बाद में 28 हजार रुपये में हस्ताक्षर करने की बात तय हुई। राममेहर की शिकायत पर एसीबी ने हुए आरोपी डॉ. अंकुर को 28 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया था।
विज्ञापन
एसीबी के अनुसार, आरोपी दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच करने के नाम पर डेयरियों पर पहुंचता था और डर दिखाकर रुपये मांगता था। उसकी वेशभूषा और बातचीत के तरीके के कारण कई लोग उसे फूड सेफ्टी अधिकारी समझ लेते थे।
विज्ञापन
एसीबी कैथल यूनिट के इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने बताया कि जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि आरोपी पहले भी कई डेयरी संचालकों और दूध विक्रेताओं को अपना निशाना बना चुका था। यदि कोई दुकानदार रुपये देने से मना करता था तो उसे कार्रवाई और छापेमारी की धमकी दी जाती थी।
विज्ञापन
भैंसों के सत्यापन के लिए मांगी थी 30 हजार रुपये रिश्वत : सौंगरी निवासी राममेहर ने एसीबी को दी शिकायत में बताया था कि उसे अपनी डेयरी की भैंसों पर बैंक से ऋण लेना था। इसके लिए बैंक ने पशुओं का हेल्थ सर्टिफिकेट मांगा था, जिस पर पट्टी अफगान में तैनात वेटनरी सर्जन डॉ. अंकुर के हस्ताक्षर जरूरी थे।
15 जुलाई को सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर करवाने पहुंचे राममेहर से डॉक्टर ने 30 हजार रुपये की मांग की। बाद में 28 हजार रुपये में हस्ताक्षर करने की बात तय हुई। राममेहर की शिकायत पर एसीबी ने हुए आरोपी डॉ. अंकुर को 28 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया था।