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Kaithal News: नकली पोल्ट्री फार्म दिखाकर फीड मिल में तीन करोड़ की हेराफेरी, 11 पर प्राथमिकी
Mon, 03 Aug 2026 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 03 Aug 2026 01:04 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसीकैथल। गांव मटौर स्थित आरव फीड मिल में कर्मचारियों पर नकली पोल्ट्री फार्म दिखाकर फीड, दवाइयां और कच्चा माल हेराफेरी से निकालने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता एवं मिल संचालक के अनुसार इस पूरे मामले में करीब तीन करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है।
आरोप है कि कर्मचारियों ने मिल के डिजिटल रिकॉर्ड में भी हेरफेर कर डाटा डिलीट कर दिया, ताकि गड़बड़ी छिपाई जा सके। रोहेड़ा स्थित एक पोल्ट्री फार्म के निरीक्षण के दौरान मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने शिकायत के आधार पर 11 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता राजेश कुमार ने बताया कि वह पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने अपनी पत्नी सुमन के नाम से आरव फीड मिल की स्थापना की थी। मिल में पशु आहार तैयार करने के साथ पोल्ट्री दवाइयों की बिक्री और ब्रॉयलर फार्मिंग का कार्य किया जाता है।
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मिल के संचालन की जिम्मेदारी वह स्वयं संभालते हैं। अकाउंट का कार्य अजीत यादव निवासी कलायत, स्टॉक डिस्पैच की जिम्मेदारी मनीष सिंगवाल और सेल्स का कार्य अमित पेगां को सौंपा गया था। मिल का कारोबार 100 से अधिक पोल्ट्री फार्मरों के साथ है।
शिकायत के अनुसार, शुरुआत में कर्मचारियों ने सामान्य रूप से कार्य किया, लेकिन बाद में अजीत, मनीष और अमित ने कथित रूप से कुछ पोल्ट्री फार्मरों के साथ मिलकर हेराफेरी शुरू कर दी।
आरोप है कि जितेंद्र जागलान, मंजीत, चरण सिंह, मोनू सिंगवाल, जैकी, पारस तथा अन्य लोगों के नाम पर फर्जी पोल्ट्री फार्म दर्शाकर वहां फीड और दवाइयों की आपूर्ति रिकॉर्ड में दर्ज की जाती थी। हिसाब-किताब से पहले संबंधित फार्मों का डिजिटल डाटा हटा दिया जाता था, जिससे हेराफेरी का पता न चल सके। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस तरीके से निकाले गए माल को बेचकर रकम आपस में बांट ली जाती थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, रोहेड़ा स्थित एक पोल्ट्री फार्म के निरीक्षण के दौरान उन्हें गड़बड़ी का संदेह हुआ। वहां आरव फीड मिल का फीड दूसरे ब्रांड के बैगों में भरकर बाहर भेजा जा रहा था। इसके बाद मिल के स्टॉक और रिकॉर्ड की आंतरिक जांच कराई गई, जिसमें कई अनियमितताएं सामने आईं। संबंधित फार्मर और मैनेजर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। पूछताछ में हेराफेरी की जानकारी सामने आई।
कलायत थाना प्रभारी अमन कुमार ने बताया कि पुलिस ने अजीत यादव, मनीष, अमित, जितेंद्र, मंजीत, चरण सिंह, मोनू, पारस, कुलबीर, जैकी और मोनू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
डिजिटल रिकॉर्ड मिटाने का भी आरोप
मिल संचालक ने शिकायत में आरोप लगाया है कि कंप्यूटर से महत्वपूर्ण रिकॉर्ड डिलीट किए गए और हार्ड डिस्क बदलकर वास्तविक लेन-देन छिपाने का प्रयास किया गया। उन्होंने पुलिस से कंप्यूटर हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है, ताकि पूरे मामले का खुलासा हो सके।
स्टॉक मिलान के दौरान करीब 11 टन सोयाबीन और 49 टन मक्का कम मिला, जिसकी कीमत 17 लाख रुपये से अधिक बताई गई। इसके अलावा करीब 22 लाख रुपये के स्थानीय स्तर पर बेचे गए माल का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कर्मचारियों ने लेन-देन का हिसाब छिपाकर राशि बैंक खातों और नकद के माध्यम से अपने पास रख ली।
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आरोप है कि कर्मचारियों ने मिल के डिजिटल रिकॉर्ड में भी हेरफेर कर डाटा डिलीट कर दिया, ताकि गड़बड़ी छिपाई जा सके। रोहेड़ा स्थित एक पोल्ट्री फार्म के निरीक्षण के दौरान मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने शिकायत के आधार पर 11 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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शिकायतकर्ता राजेश कुमार ने बताया कि वह पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने अपनी पत्नी सुमन के नाम से आरव फीड मिल की स्थापना की थी। मिल में पशु आहार तैयार करने के साथ पोल्ट्री दवाइयों की बिक्री और ब्रॉयलर फार्मिंग का कार्य किया जाता है।
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मिल के संचालन की जिम्मेदारी वह स्वयं संभालते हैं। अकाउंट का कार्य अजीत यादव निवासी कलायत, स्टॉक डिस्पैच की जिम्मेदारी मनीष सिंगवाल और सेल्स का कार्य अमित पेगां को सौंपा गया था। मिल का कारोबार 100 से अधिक पोल्ट्री फार्मरों के साथ है।
शिकायत के अनुसार, शुरुआत में कर्मचारियों ने सामान्य रूप से कार्य किया, लेकिन बाद में अजीत, मनीष और अमित ने कथित रूप से कुछ पोल्ट्री फार्मरों के साथ मिलकर हेराफेरी शुरू कर दी।
आरोप है कि जितेंद्र जागलान, मंजीत, चरण सिंह, मोनू सिंगवाल, जैकी, पारस तथा अन्य लोगों के नाम पर फर्जी पोल्ट्री फार्म दर्शाकर वहां फीड और दवाइयों की आपूर्ति रिकॉर्ड में दर्ज की जाती थी। हिसाब-किताब से पहले संबंधित फार्मों का डिजिटल डाटा हटा दिया जाता था, जिससे हेराफेरी का पता न चल सके। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस तरीके से निकाले गए माल को बेचकर रकम आपस में बांट ली जाती थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, रोहेड़ा स्थित एक पोल्ट्री फार्म के निरीक्षण के दौरान उन्हें गड़बड़ी का संदेह हुआ। वहां आरव फीड मिल का फीड दूसरे ब्रांड के बैगों में भरकर बाहर भेजा जा रहा था। इसके बाद मिल के स्टॉक और रिकॉर्ड की आंतरिक जांच कराई गई, जिसमें कई अनियमितताएं सामने आईं। संबंधित फार्मर और मैनेजर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। पूछताछ में हेराफेरी की जानकारी सामने आई।
कलायत थाना प्रभारी अमन कुमार ने बताया कि पुलिस ने अजीत यादव, मनीष, अमित, जितेंद्र, मंजीत, चरण सिंह, मोनू, पारस, कुलबीर, जैकी और मोनू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
डिजिटल रिकॉर्ड मिटाने का भी आरोप
मिल संचालक ने शिकायत में आरोप लगाया है कि कंप्यूटर से महत्वपूर्ण रिकॉर्ड डिलीट किए गए और हार्ड डिस्क बदलकर वास्तविक लेन-देन छिपाने का प्रयास किया गया। उन्होंने पुलिस से कंप्यूटर हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है, ताकि पूरे मामले का खुलासा हो सके।
स्टॉक मिलान के दौरान करीब 11 टन सोयाबीन और 49 टन मक्का कम मिला, जिसकी कीमत 17 लाख रुपये से अधिक बताई गई। इसके अलावा करीब 22 लाख रुपये के स्थानीय स्तर पर बेचे गए माल का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कर्मचारियों ने लेन-देन का हिसाब छिपाकर राशि बैंक खातों और नकद के माध्यम से अपने पास रख ली।