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Kaithal News: किसान को 4.45 लाख चुकाने के दिए आदेश
Mon, 03 Aug 2026 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 03 Aug 2026 01:06 AM IST
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संवाद न्यूज, एजेंसीकैथल। करीब दो दशक पुराने फसल ऋण विवाद में कैथल की सिविल अदालत ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने किसान रामचंदर को बैंक का 4,45,111.55 रुपये का बकाया ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है।
इसके साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि तीन माह के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो बैंक बंधक रखी गई कृषि भूमि की नीलामी कर अपनी राशि वसूल सकेगा। यदि नीलामी से भी पूरी रकम प्राप्त नहीं होती है तो बैंक कानून के अनुसार प्रतिवादी की अन्य संपत्तियों से शेष राशि की वसूली करने के लिए भी स्वतंत्र होगा।
अदालत में बैंक की ओर से दायर वसूली वाद के अनुसार, वर्ष 2006 में किसान ने 75 हजार रुपये का फसल ऋण लिया था। ऋण के बदले उसने अपनी कृषि भूमि बैंक के पास बंधक रखी थी। बाद में वर्ष 2016 में किसान के अनुरोध पर ऋण सीमा बढ़ाकर 3.25 लाख रुपये कर दी गई और नए ऋण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए।
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बैंक का कहना था कि ऋणधारक ने निर्धारित समय पर किस्तों का भुगतान नहीं किया। कई बार मौखिक और लिखित रूप से राशि जमा कराने के लिए कहा गया तथा कानूनी नोटिस भी भेजा गया, लेकिन कोई भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद बैंक ने वसूली का मुकदमा दायर किया। नोटिस के बावजूद प्रतिवादी अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके चलते उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई।
बैंक ने ऋण आवेदन, डीपी नोट, हाइपोथिकेशन एग्रीमेंट, बंधक विलेख, कानूनी नोटिस और खाते का विवरण समेत 21 दस्तावेज अदालत में पेश किए। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर माना कि बैंक दावा साबित करने में सफल रहा है।
अदालत ने बैंक के पक्ष में 4,45,111.55 रुपये की वसूली की डिक्री पारित करते हुए ऋण स्वीकृति की तिथि से डिक्री होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक तथा उसके बाद भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश दिए हैं।
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इसके साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि तीन माह के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो बैंक बंधक रखी गई कृषि भूमि की नीलामी कर अपनी राशि वसूल सकेगा। यदि नीलामी से भी पूरी रकम प्राप्त नहीं होती है तो बैंक कानून के अनुसार प्रतिवादी की अन्य संपत्तियों से शेष राशि की वसूली करने के लिए भी स्वतंत्र होगा।
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अदालत में बैंक की ओर से दायर वसूली वाद के अनुसार, वर्ष 2006 में किसान ने 75 हजार रुपये का फसल ऋण लिया था। ऋण के बदले उसने अपनी कृषि भूमि बैंक के पास बंधक रखी थी। बाद में वर्ष 2016 में किसान के अनुरोध पर ऋण सीमा बढ़ाकर 3.25 लाख रुपये कर दी गई और नए ऋण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए।
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बैंक का कहना था कि ऋणधारक ने निर्धारित समय पर किस्तों का भुगतान नहीं किया। कई बार मौखिक और लिखित रूप से राशि जमा कराने के लिए कहा गया तथा कानूनी नोटिस भी भेजा गया, लेकिन कोई भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद बैंक ने वसूली का मुकदमा दायर किया। नोटिस के बावजूद प्रतिवादी अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके चलते उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई।
बैंक ने ऋण आवेदन, डीपी नोट, हाइपोथिकेशन एग्रीमेंट, बंधक विलेख, कानूनी नोटिस और खाते का विवरण समेत 21 दस्तावेज अदालत में पेश किए। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर माना कि बैंक दावा साबित करने में सफल रहा है।
अदालत ने बैंक के पक्ष में 4,45,111.55 रुपये की वसूली की डिक्री पारित करते हुए ऋण स्वीकृति की तिथि से डिक्री होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक तथा उसके बाद भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश दिए हैं।