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Kaithal News: महंगी किताबें खरीदना मजबूरी
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 02 Apr 2026 01:12 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। निजी स्कूलों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही हैं। महंगी किताबों और निजी प्रकाशकों की जबरन बिक्री से लगभग हर घर प्रभावित है, लेकिन अभिभावकों की आवाज को मजबूती से उठाने वाला कोई संगठन सामने नहीं आ पा रहा।
सत्र शुरू होने से पहले सभी निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किए थे, लेकिन इनका जमीनी स्तर पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। निजी स्कूल तय प्रकाशकों की महंगी किताबें अभिभावकों पर थोप रहे हैं।
सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रेस प्रवक्ता ने कहा कि महंगी किताबों का मुद्दा कई बार सरकार और शिक्षा विभाग के सामने उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उन्होंने सरकार से विद्यार्थियों और अभिभावकों को राहत देने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की।
अध्यापक संघ के राज्य उपप्रधान ने कहा कि सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। उन्होंने सुझाव दिया कि कम से कम 50 प्रतिशत पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य की जाएं, ताकि अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम हो सके।
देर से कार्रवाई का नहीं होता फायदा
अभिभावक राजकुमार का कहना है कि यदि विभाग को कार्रवाई करनी है तो सत्र शुरू होने से पहले करनी चाहिए। सत्र शुरू होने के बाद कार्रवाई का कोई खास लाभ नहीं होता, क्योंकि तब तक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो चुकी होती है। महंगी किताबों का मुद्दा कई बार सरकार और शिक्षा विभाग के सामने उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
किताबों के लिए भटक रहे अभिभावक
अभिभावक रोशन लाल ने बताया कि निजी प्रकाशकों की किताबें एक साथ उपलब्ध नहीं हो पातीं। कई दुकानों पर वेटिंग में किताबें मिल रही हैं, जिससे अभिभावकों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। महंगी होने के बावजूद दुकानदार अक्सर स्टॉक न होने का बहाना बनाते हैं।
विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। यदि कोई स्कूल एनसीईआरटी किताबों को लागू नहीं करता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। -सुभाष कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी
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कैथल। निजी स्कूलों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही हैं। महंगी किताबों और निजी प्रकाशकों की जबरन बिक्री से लगभग हर घर प्रभावित है, लेकिन अभिभावकों की आवाज को मजबूती से उठाने वाला कोई संगठन सामने नहीं आ पा रहा।
सत्र शुरू होने से पहले सभी निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किए थे, लेकिन इनका जमीनी स्तर पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। निजी स्कूल तय प्रकाशकों की महंगी किताबें अभिभावकों पर थोप रहे हैं।
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सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रेस प्रवक्ता ने कहा कि महंगी किताबों का मुद्दा कई बार सरकार और शिक्षा विभाग के सामने उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उन्होंने सरकार से विद्यार्थियों और अभिभावकों को राहत देने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की।
अध्यापक संघ के राज्य उपप्रधान ने कहा कि सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। उन्होंने सुझाव दिया कि कम से कम 50 प्रतिशत पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य की जाएं, ताकि अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम हो सके।
देर से कार्रवाई का नहीं होता फायदा
अभिभावक राजकुमार का कहना है कि यदि विभाग को कार्रवाई करनी है तो सत्र शुरू होने से पहले करनी चाहिए। सत्र शुरू होने के बाद कार्रवाई का कोई खास लाभ नहीं होता, क्योंकि तब तक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो चुकी होती है। महंगी किताबों का मुद्दा कई बार सरकार और शिक्षा विभाग के सामने उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
किताबों के लिए भटक रहे अभिभावक
अभिभावक रोशन लाल ने बताया कि निजी प्रकाशकों की किताबें एक साथ उपलब्ध नहीं हो पातीं। कई दुकानों पर वेटिंग में किताबें मिल रही हैं, जिससे अभिभावकों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। महंगी होने के बावजूद दुकानदार अक्सर स्टॉक न होने का बहाना बनाते हैं।
विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। यदि कोई स्कूल एनसीईआरटी किताबों को लागू नहीं करता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। -सुभाष कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी