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Kaithal News: स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में खुलासा, 50 प्रतिशत से ज्यादा लोगों में खून की कमी
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जिला नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए लगी मरीजों की भीड़। संवाद
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कैथल। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में 50 प्रतिशत से ज्यादा लोगों में खून की मात्रा सामान्य से कम पाई गई है। यह खुलासा जून माह में चलाए गए विशेष एनिमिया मुक्त हरियाणा अभियान के तहत लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट में हुआ है। विभाग ने जून महीने में अलग-अलग श्रेणियों में 34854 लोगों के सैंपल लिए थे और इनमें से 17453 लोगों में एनीमिया यानी खून की मात्रा सामान्य से कम पाई गई थी। कुल सैंपलों में से 5889 यानी सैंपल के 33.7 प्रतिशत लोगों को तो सैंपल लेने के बाद तुरंत इलाज तक देने की नौबत पड़ गई थी और 1073 लोगों को गंभीर श्रेणी में होने के कारण इलाज के लिए रेफर करना पड़ा था।
चिंता की बात यह है कि खून की मात्रा किसी भी श्रेणी में सही नहीं पाई गई। स्वास्थ्य विभाग ने जिस भी श्रेणी में जांच की, उनमें 21 से लेकर 80 प्रतिशत तक में खून की मात्रा कम मिली।
अलग अलग श्रेणियों में मिली खून की मात्रा...
श्रेणी
कुल जांच
खून की कमी
प्रतिशत
5 माह–59 माह के बच्चे
7390
1588
21.5%
5–9 वर्ष के बच्चे
2051
882
43%
10–19 वर्ष (किशोर/किशोरियां) 2900 1643 56.7%
20–49 वर्ष महिलाएं
6104
3803
62.3%
दूध पिलाने वाली महिलाएं
654 521 79.7%
गर्भवती महिलाएं
2047
1259 61.5%
60 वर्ष से अधिक बुजुर्ग
13674
7720 56.5%
महिलाओं की सबसे ज्यादा खराब स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार खून की कमी सबसे ज्यादा महिलाओं और बुजुर्गों में पाई गई। महिलाओं में तो सभी श्रेणियों में जांच करने पर ये आंकड़ा 60 प्रतिशत से ज्यादा है। सबसे ज्यादा खून की कमी दूध पिलाने वाली महिलाओं में मिली है। इनमें ये आंकड़ा करीब 80 प्रतिशत है। उसके बाद बुजुर्गों और किशोरों में करीब 40 से 60 प्रतिशत में खून की मात्रा सामान्य से कम मिली है।
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आयरन की कमी के कारण होती है खून की कमी : डॉ. रेणु
सिविल सर्जन डॉ. रेणु ने बताया कि खून की कमी का सबसे बड़ा कारण आयरन की कमी है और ये एनीमिया का सबसे सामान्य कारण है। उसके अलावा विटामिन बी-12 और फोलिक एसिड की कमी, पोषणयुक्त भोजन का अभाव, अधिक रक्तस्राव जैसे महिलाओं में अत्यधिक मासिक धर्म, बवासीर, दुर्घटना या ऑपरेशन, गर्भावस्था, इस दौरान आयरन की आवश्यकता बढ़ जाती है, किडनी, लीवर या अन्य पुरानी बीमारियां, आंतों में कीड़े या संक्रमण जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण कम हो जाता है। थैलेसीमिया या अन्य रक्त संबंधी रोग। इसके लक्षणों में हर समय थकान और कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना या सिर दर्द, चेहरा, होंठ और नाखून पीले पड़ना। सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, हाथ-पैर ठंडे रहना, ध्यान लगाने में कठिनाई और चिड़चिड़ापन।
बचाव कैसे करें?
सिविल सर्जन के अनुसार, आयरन युक्त भोजन जैसे पालक, मेथी, चुकंदर, गुड़, चना, राजमा, सोयाबीन, दालें, अनार और खजूर का सेवन करें। विटामिन सी वाले फल नींबू, आंवला, संतरा आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं। डॉक्टर की सलाह पर आयरन, फोलिक एसिड या विटामिन बी 12 की दवाएं लें। लगातार कमजोरी, चक्कर या पीलेपन की शिकायत हो तो हीमोग्लोबिन की जांच कराएं और चिकित्सक से परामर्श लें। यदि किसी वयस्क में हीमोग्लोबिन लगातार कम पाया जाता है, तो केवल आयरन की गोली लेना पर्याप्त नहीं है। इसकी वजह का पता लगाना भी जरूरी होता है, ताकि सही उपचार किया जा सके।
विभाग राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत और एनिमिया मुक्त अभियान हरियाणा के तहत लगातार जांच करता रहता है और लोगों को जागरूक करने का काम भी कर रहे हैं। खराब खानपान की आदतें और पौष्टिक भोजन नहीं लेने के कारण खून की कमी के प्रमुख कारण है। उनकी लोगों से अपील है कि वे इस ओर विशेष ध्यान दें और जितना हो सकता है पौष्टिक आहार लें।
- डॉ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।
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चिंता की बात यह है कि खून की मात्रा किसी भी श्रेणी में सही नहीं पाई गई। स्वास्थ्य विभाग ने जिस भी श्रेणी में जांच की, उनमें 21 से लेकर 80 प्रतिशत तक में खून की मात्रा कम मिली।
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अलग अलग श्रेणियों में मिली खून की मात्रा...
श्रेणी
कुल जांच
खून की कमी
प्रतिशत
5 माह–59 माह के बच्चे
7390
1588
21.5%
5–9 वर्ष के बच्चे
2051
882
43%
10–19 वर्ष (किशोर/किशोरियां) 2900 1643 56.7%
20–49 वर्ष महिलाएं
6104
3803
62.3%
दूध पिलाने वाली महिलाएं
654 521 79.7%
गर्भवती महिलाएं
2047
1259 61.5%
60 वर्ष से अधिक बुजुर्ग
13674
7720 56.5%
महिलाओं की सबसे ज्यादा खराब स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार खून की कमी सबसे ज्यादा महिलाओं और बुजुर्गों में पाई गई। महिलाओं में तो सभी श्रेणियों में जांच करने पर ये आंकड़ा 60 प्रतिशत से ज्यादा है। सबसे ज्यादा खून की कमी दूध पिलाने वाली महिलाओं में मिली है। इनमें ये आंकड़ा करीब 80 प्रतिशत है। उसके बाद बुजुर्गों और किशोरों में करीब 40 से 60 प्रतिशत में खून की मात्रा सामान्य से कम मिली है।
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आयरन की कमी के कारण होती है खून की कमी : डॉ. रेणु
सिविल सर्जन डॉ. रेणु ने बताया कि खून की कमी का सबसे बड़ा कारण आयरन की कमी है और ये एनीमिया का सबसे सामान्य कारण है। उसके अलावा विटामिन बी-12 और फोलिक एसिड की कमी, पोषणयुक्त भोजन का अभाव, अधिक रक्तस्राव जैसे महिलाओं में अत्यधिक मासिक धर्म, बवासीर, दुर्घटना या ऑपरेशन, गर्भावस्था, इस दौरान आयरन की आवश्यकता बढ़ जाती है, किडनी, लीवर या अन्य पुरानी बीमारियां, आंतों में कीड़े या संक्रमण जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण कम हो जाता है। थैलेसीमिया या अन्य रक्त संबंधी रोग। इसके लक्षणों में हर समय थकान और कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना या सिर दर्द, चेहरा, होंठ और नाखून पीले पड़ना। सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, हाथ-पैर ठंडे रहना, ध्यान लगाने में कठिनाई और चिड़चिड़ापन।
बचाव कैसे करें?
सिविल सर्जन के अनुसार, आयरन युक्त भोजन जैसे पालक, मेथी, चुकंदर, गुड़, चना, राजमा, सोयाबीन, दालें, अनार और खजूर का सेवन करें। विटामिन सी वाले फल नींबू, आंवला, संतरा आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं। डॉक्टर की सलाह पर आयरन, फोलिक एसिड या विटामिन बी 12 की दवाएं लें। लगातार कमजोरी, चक्कर या पीलेपन की शिकायत हो तो हीमोग्लोबिन की जांच कराएं और चिकित्सक से परामर्श लें। यदि किसी वयस्क में हीमोग्लोबिन लगातार कम पाया जाता है, तो केवल आयरन की गोली लेना पर्याप्त नहीं है। इसकी वजह का पता लगाना भी जरूरी होता है, ताकि सही उपचार किया जा सके।
विभाग राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत और एनिमिया मुक्त अभियान हरियाणा के तहत लगातार जांच करता रहता है और लोगों को जागरूक करने का काम भी कर रहे हैं। खराब खानपान की आदतें और पौष्टिक भोजन नहीं लेने के कारण खून की कमी के प्रमुख कारण है। उनकी लोगों से अपील है कि वे इस ओर विशेष ध्यान दें और जितना हो सकता है पौष्टिक आहार लें।
- डॉ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।

जिला नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए लगी मरीजों की भीड़। संवाद