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Kaithal News: चौशाला में निकाली कलश यात्रा, उमड़े श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 21 Jan 2026 01:30 AM IST
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20केएलटी5: गांव चौशाला में निकाली जा रही कलश यात्रा
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। गांव चौशाला में च्यवन ऋषि मूर्ति स्थापना दिवस के पावन अवसर पर पांच दिवसीय षोडश पंचकुंडीय रूद्रचंडी महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह धार्मिक अनुष्ठान 19 जनवरी से 23 जनवरी तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विधि-विधान से हवन-यज्ञ, रूद्रचंडी पाठ एवं विशेष पूजन किया जा रहा है।
मंदिर के पुजारी बृजेश शर्मा ने बताया कि बाबा च्यवन ऋषि की मूर्ति स्थापना दिवस को गांव में हर वर्ष बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष आयोजित यह 16वां महायज्ञ है। महायज्ञ के दूसरे दिन गांव में भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
यात्रा मंदिर परिसर से शुरू होकर गांव के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर पहुंची।पुजारी ने बताया कि महायज्ञ के उपरांत 22 फरवरी और 1 मार्च को मेले का आयोजन भी किया जाएगा। गांव चौशाला में वर्ष में चार बार मेले लगते हैं, जिनमें दो मेले फाल्गुन मास और दो सावन मास में आयोजित होते हैं। आस-पास के गांवों में चौशाला को चौशाला खेड़ा के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने बताया कि च्यवन ऋषि मंदिर में प्रदेशभर से श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से पशुधन की सुख-समृद्धि और गांव में शांति बनाए रखने के लिए यहां पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर से जुड़ी एक प्राचीन मान्यता के अनुसार, भृगु ऋषि के पुत्र च्यवन ऋषि ने कभी चौशाला गांव स्थित प्राचीन कुंड में स्नान किया था। उस समय सरस्वती नदी का प्रवाह इसी कुंड से होकर गुजरता था।
कथा के अनुसार, च्यवन ऋषि के तप और उनके क्रोध से जुड़ी एक घटना में राजा शर्याति की सेना को उनके प्रकोप का सामना करना पड़ा था। मंदिर परिसर में च्यवन ऋषि के साथ उनकी पत्नी सुकन्या और भगवान विष्णु की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र हैं।
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कलायत। गांव चौशाला में च्यवन ऋषि मूर्ति स्थापना दिवस के पावन अवसर पर पांच दिवसीय षोडश पंचकुंडीय रूद्रचंडी महायज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह धार्मिक अनुष्ठान 19 जनवरी से 23 जनवरी तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विधि-विधान से हवन-यज्ञ, रूद्रचंडी पाठ एवं विशेष पूजन किया जा रहा है।
मंदिर के पुजारी बृजेश शर्मा ने बताया कि बाबा च्यवन ऋषि की मूर्ति स्थापना दिवस को गांव में हर वर्ष बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष आयोजित यह 16वां महायज्ञ है। महायज्ञ के दूसरे दिन गांव में भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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यात्रा मंदिर परिसर से शुरू होकर गांव के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः मंदिर पहुंची।पुजारी ने बताया कि महायज्ञ के उपरांत 22 फरवरी और 1 मार्च को मेले का आयोजन भी किया जाएगा। गांव चौशाला में वर्ष में चार बार मेले लगते हैं, जिनमें दो मेले फाल्गुन मास और दो सावन मास में आयोजित होते हैं। आस-पास के गांवों में चौशाला को चौशाला खेड़ा के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने बताया कि च्यवन ऋषि मंदिर में प्रदेशभर से श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से पशुधन की सुख-समृद्धि और गांव में शांति बनाए रखने के लिए यहां पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर से जुड़ी एक प्राचीन मान्यता के अनुसार, भृगु ऋषि के पुत्र च्यवन ऋषि ने कभी चौशाला गांव स्थित प्राचीन कुंड में स्नान किया था। उस समय सरस्वती नदी का प्रवाह इसी कुंड से होकर गुजरता था।
कथा के अनुसार, च्यवन ऋषि के तप और उनके क्रोध से जुड़ी एक घटना में राजा शर्याति की सेना को उनके प्रकोप का सामना करना पड़ा था। मंदिर परिसर में च्यवन ऋषि के साथ उनकी पत्नी सुकन्या और भगवान विष्णु की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र हैं।

20केएलटी5: गांव चौशाला में निकाली जा रही कलश यात्रा