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Kaithal News: किसान नेताओं को नोटिस पर भड़की किसान सभा
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 27 Mar 2026 12:43 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। किसान आंदोलन के दौरान रणबीर गंगवा और किसानों के बीच हुई झड़प के बाद दर्ज मामलों में किसान नेताओं को गिरफ्तारी नोटिस जारी किए जाने पर अखिल भारतीय किसान सभा ने कड़ी नाराजगी जताई है। सभा ने इसे सरकार द्वारा किसानों के साथ किया गया विश्वासघात करार दिया है।
प्रेस बयान जारी करते हुए किसान सभा के जिला प्रधान जसबीर सिंह, जिला सचिव सतपाल आनंद, धर्मपाल (भुना) और सुरेंद्र सिंह ने कहा कि आंदोलन के निलंबन के समय केंद्र और हरियाणा सरकार ने लिखित रूप से किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने का आश्वासन दिया था।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान किसानों ने अपनी जायज मांगों को लेकर देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए थे। आंदोलन समाप्त होने के बाद सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लिया और किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को खारिज करने का वादा किया था।
किसान नेताओं का आरोप है कि अब समय-समय पर पुराने मामलों को निकालकर किसानों और उनके नेताओं को नोटिस व समन भेजे जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर आंदोलन की भावना के साथ धोखा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा किसानों की आवाज को दबाने की है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अखिल भारतीय किसान सभा ने प्रशासन से वादे के अनुरूप सभी मुकदमों को तत्काल खारिज करने की मांग की है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों को नहीं माना गया, तो किसान एक बार फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे और आंदोलन तेज किया जाएगा।
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कैथल। किसान आंदोलन के दौरान रणबीर गंगवा और किसानों के बीच हुई झड़प के बाद दर्ज मामलों में किसान नेताओं को गिरफ्तारी नोटिस जारी किए जाने पर अखिल भारतीय किसान सभा ने कड़ी नाराजगी जताई है। सभा ने इसे सरकार द्वारा किसानों के साथ किया गया विश्वासघात करार दिया है।
प्रेस बयान जारी करते हुए किसान सभा के जिला प्रधान जसबीर सिंह, जिला सचिव सतपाल आनंद, धर्मपाल (भुना) और सुरेंद्र सिंह ने कहा कि आंदोलन के निलंबन के समय केंद्र और हरियाणा सरकार ने लिखित रूप से किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने का आश्वासन दिया था।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन के दौरान किसानों ने अपनी जायज मांगों को लेकर देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए थे। आंदोलन समाप्त होने के बाद सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लिया और किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को खारिज करने का वादा किया था।
किसान नेताओं का आरोप है कि अब समय-समय पर पुराने मामलों को निकालकर किसानों और उनके नेताओं को नोटिस व समन भेजे जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर आंदोलन की भावना के साथ धोखा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा किसानों की आवाज को दबाने की है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अखिल भारतीय किसान सभा ने प्रशासन से वादे के अनुरूप सभी मुकदमों को तत्काल खारिज करने की मांग की है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों को नहीं माना गया, तो किसान एक बार फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे और आंदोलन तेज किया जाएगा।