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Kaithal News: आज बारिश के आसार, जुलाई में 47% कम वर्षा से धान पर संकट
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बिना पानी के खेत में सूखी पड़ी धान की फसल। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में रविवार को सुबह से शाम तक आसमान में बादल छाए रहे, लेकिन बारिश नहीं होने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। मौसम विभाग ने सोमवार हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। किसान अच्छी वर्षा का इंतजार कर रहे हैं, ताकि धान की फसल को पर्याप्त नमी मिल सके और सिंचाई पर बढ़ता खर्च कम हो।
मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को जिले का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिनभर करीब आठ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलती रहीं। बादलों की आवाजाही के बावजूद बारिश नहीं होने से लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा।
बारिश के आंकड़े भी इस बार चिंता बढ़ाने वाले हैं। जुलाई 2025 में जिले में 88.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी, जबकि जुलाई 2026 में केवल 46.7 मिमी बारिश हुई। यानी पिछले वर्ष की तुलना में इस बार जुलाई में करीब 47 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
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कम बारिश का सबसे अधिक असर खरीफ सीजन की धान फसल पर दिखाई दे रहा है। धान की खेती में लगातार पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेतों में नमी नहीं बन पा रही। इससे पौधों के फुटाव और बढ़वार पर असर पड़ रहा है। किसान बार-बार ट्यूबवेल चलाकर सिंचाई करने को मजबूर हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।
कम वर्षा का असर खाद प्रबंधन पर भी पड़ रहा है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण कई किसान फसल की बढ़वार बनाए रखने के लिए अतिरिक्त यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं। इससे उत्पादन लागत और बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की बढ़वार और संभावित उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. रमेश चंद्र ने बताया कि आज जिले में बारिश की संभावना है। किसानों को मौसम की स्थिति पर नजर रखते हुए आवश्यकता के अनुसार ही सिंचाई करनी चाहिए।
किसानों की बढ़ी चिंता
किसान सुरेश कुमार ने बताया कि इस बार कम बारिश के कारण धान की खेती पहले की अपेक्षा अधिक महंगी हो गई है। खेतों में पानी बनाए रखने के लिए बार-बार ट्यूबवेल चलाने पड़ रहे हैं, जिससे बिजली और डीजल दोनों पर अतिरिक्त खर्च हो रहा है। पर्याप्त नमी नहीं मिलने से पौधों का फुटाव प्रभावित हो रहा है और मजबूरी में अतिरिक्त यूरिया का प्रयोग करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो सिंचाई का खर्च और बढ़ेगा तथा उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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कैथल। जिले में रविवार को सुबह से शाम तक आसमान में बादल छाए रहे, लेकिन बारिश नहीं होने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। मौसम विभाग ने सोमवार हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। किसान अच्छी वर्षा का इंतजार कर रहे हैं, ताकि धान की फसल को पर्याप्त नमी मिल सके और सिंचाई पर बढ़ता खर्च कम हो।
मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को जिले का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिनभर करीब आठ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलती रहीं। बादलों की आवाजाही के बावजूद बारिश नहीं होने से लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा।
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बारिश के आंकड़े भी इस बार चिंता बढ़ाने वाले हैं। जुलाई 2025 में जिले में 88.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी, जबकि जुलाई 2026 में केवल 46.7 मिमी बारिश हुई। यानी पिछले वर्ष की तुलना में इस बार जुलाई में करीब 47 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
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कम बारिश का सबसे अधिक असर खरीफ सीजन की धान फसल पर दिखाई दे रहा है। धान की खेती में लगातार पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेतों में नमी नहीं बन पा रही। इससे पौधों के फुटाव और बढ़वार पर असर पड़ रहा है। किसान बार-बार ट्यूबवेल चलाकर सिंचाई करने को मजबूर हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।
कम वर्षा का असर खाद प्रबंधन पर भी पड़ रहा है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण कई किसान फसल की बढ़वार बनाए रखने के लिए अतिरिक्त यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं। इससे उत्पादन लागत और बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की बढ़वार और संभावित उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक डॉ. रमेश चंद्र ने बताया कि आज जिले में बारिश की संभावना है। किसानों को मौसम की स्थिति पर नजर रखते हुए आवश्यकता के अनुसार ही सिंचाई करनी चाहिए।
किसानों की बढ़ी चिंता
किसान सुरेश कुमार ने बताया कि इस बार कम बारिश के कारण धान की खेती पहले की अपेक्षा अधिक महंगी हो गई है। खेतों में पानी बनाए रखने के लिए बार-बार ट्यूबवेल चलाने पड़ रहे हैं, जिससे बिजली और डीजल दोनों पर अतिरिक्त खर्च हो रहा है। पर्याप्त नमी नहीं मिलने से पौधों का फुटाव प्रभावित हो रहा है और मजबूरी में अतिरिक्त यूरिया का प्रयोग करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो सिंचाई का खर्च और बढ़ेगा तथा उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।