{"_id":"6a5925deb59a149a0c0fdc44","slug":"teachers-association-opposes-smc-address-on-a-holiday-kaithal-news-c-245-1-kht1014-152358-2026-07-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: छुट्टी के दिन एसएमसी संबोधन का अध्यापक संघ ने किया विरोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: छुट्टी के दिन एसएमसी संबोधन का अध्यापक संघ ने किया विरोध
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैथल। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ ने 19 जुलाई रविवार को प्रस्तावित स्कूल प्रबंधन समिति और विद्यालय स्टाफ के ऑनलाइन संबोधन को सार्वजनिक अवकाश के दिन आयोजित किए जाने पर आपत्ति जताई है। संघ ने इसे शिक्षकों के अवकाशों में हस्तक्षेप बताते हुए सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
संघ के राज्य महासचिव रामपाल शर्मा, जिला प्रधान रामफल दयोहरा और जिला सचिव अमरनाथ किठाणिया ने संयुक्त बयान में कहा कि शिक्षा सुधार के नाम पर बार-बार ऐसे निर्देश जारी किए जा रहे हैं जिनसे शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ रहा है। उनका कहना है कि ऑनलाइन संबोधन जैसे कार्यक्रम कार्यदिवस में भी आयोजित किए जा सकते हैं, ऐसे में सार्वजनिक अवकाश का चयन उचित नहीं है। अध्यापक संघ ने आरोप लगाया कि शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा लगातार विभिन्न गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। संघ के अनुसार हाल के महीनों में अध्यापकों को जनगणना और अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी लगाया गया जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ा। संघ ने यह आशंका भी जताई कि प्राथमिक विद्यालयों के संबंध में लिए जा रहे कुछ निर्णयों से स्कूलों के विलय की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल सकता है।
संगठन ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर केवल शिक्षण कार्य पर ध्यान देने का अवसर दिया जाए और लंबे समय से लागू सार्वजनिक अवकाशों में किसी प्रकार की छेड़छाड़ न की जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो संगठन शिक्षा और शिक्षकों के हितों के लिए प्रदेश स्तर पर आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
संघ के राज्य महासचिव रामपाल शर्मा, जिला प्रधान रामफल दयोहरा और जिला सचिव अमरनाथ किठाणिया ने संयुक्त बयान में कहा कि शिक्षा सुधार के नाम पर बार-बार ऐसे निर्देश जारी किए जा रहे हैं जिनसे शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ रहा है। उनका कहना है कि ऑनलाइन संबोधन जैसे कार्यक्रम कार्यदिवस में भी आयोजित किए जा सकते हैं, ऐसे में सार्वजनिक अवकाश का चयन उचित नहीं है। अध्यापक संघ ने आरोप लगाया कि शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा लगातार विभिन्न गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। संघ के अनुसार हाल के महीनों में अध्यापकों को जनगणना और अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी लगाया गया जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ा। संघ ने यह आशंका भी जताई कि प्राथमिक विद्यालयों के संबंध में लिए जा रहे कुछ निर्णयों से स्कूलों के विलय की प्रक्रिया को बढ़ावा मिल सकता है।
विज्ञापन
संगठन ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर केवल शिक्षण कार्य पर ध्यान देने का अवसर दिया जाए और लंबे समय से लागू सार्वजनिक अवकाशों में किसी प्रकार की छेड़छाड़ न की जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो संगठन शिक्षा और शिक्षकों के हितों के लिए प्रदेश स्तर पर आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।
विज्ञापन