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Kaithal News: मात्र 6 माह में मशरूम क्वीन बनी गांव खेड़ी लांबा की बहू को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित
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मुख्य मंत्री के हाथों सम्मानित होने वाली महिला किसानों में शामिल मुकेश देवी
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कलायत। मात्र 6 माह में मशरूम क्वीन बनी गांव खेड़ी लांबा की महिला मुकेश देवी को सोमवार को हिसार में मुख्यमंत्री के हाथों से सम्मानित किया गया। केवल छह मास में प्रगतिशील किसानों की सूची में शामिल होकर महिला किसान मुकेश देवी ने इतिहास की रचना की है। दसवीं पास मुकेश देवी ने बताया की उनका विवाह 2009 में सुरेंद्र सिंह लांबा के साथ हुआ था। गांव डाठरथ गांव में उनके मायके में भी परिवार कृषक परिवार है। ससुराल में भी मुख्य व्यवसाय कृषि ही है। उनके पति के पास 2.5 एकड़ कृषि भूमि है जिस पर परंपरागत कृषि की ही पैदावार ली जाती है। अपने जीवनकाल के शुरुआती वर्ष पारिवारिक दायित्वों को निभाने और बच्चों के पालन पोषण में बीते। उनके पति कलायत में नहर के किनारे 3 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर उसमें सब्जी की खेती करते हैं। एक वर्ष पूर्व परिवार की इजाजत से उन्होंने ने भी कृषि व्यवसाय में कदम रखा और पहले साल लहसुन की खेती कर अच्छा मुनाफा कमाया उसके बाद भूमि के मालिक मनीकर्ण ढांडा ने उन्हें मशरूम की खेती के लिए प्रोत्साहित किया। उनके पति सुरेंद्र सिंह लांबा व उन्होंने हिसार कृषि विश्वविद्यालय से मशरूम की खेती की विधिवत ट्रेनिंग ली और आधा एकड़ में केवल पांच हट (झोंपडिय़ों)से मशरूम की खेती की अक्तूबर 2025 में शुरुआत की।
6 माह में कमाए 15 लाख रुपए
सुरेंद्र सिंह ने बताया की उनकी पत्नी उनका सहयोग करने के लिए जब मैदान में आ गई तो उन्होंने 5 हट आधा एकड़ में तैयार की। एक झोपड़ी में मशरूम तैयार करने के लिए 2 हजार बैग होते हैं जिनमें एक बैग से 2.5 किलोग्राम मशरूम तैयार होती है। एक माह में मशरूम की फसल पूरी तरह से तैयार हो जाती है। मुकेश देवी ने बताया की शुरूआती दौर में उन्हें तैयार माल की बिक्री को लेकर काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने 6 महिलाओं को सहायक के तौर पर रखा और मशरूम उत्पादन का कार्य पूरी तरह से अपने हाथ में ले लिया। 15 से 20 डिग्री के माध्य जब तापमान पूरी से मशरूम की खेती के पक्ष में आया तो पैदावार एक दिन में ढाई क्विंटल तक भी उतरी। तैयार फसल की ग्रेडिंग, पैकिंग आदी के लिए उनके पास 6 महिलाओं की टीम है जिसके माध्यम से फसल को पूरी तरह से पैक कर मंडी भिजवाया। एक हट से 15 से लेकर 20 क्विंटल मशरूम उन लोगों को मिल रही है।
नहीं होता केमिकल का प्रयोग
मुकेश देवी ने बताया की हर कार्य की शुरूआत मुश्किल होती है। हर रोज मिलने वाले अनुभव से किसान स्वयं एक अच्छा कृषि वैज्ञानिक बन जाता है। बीते छह मास में उन्होंने हर दिन अपनी कृषि से सीखा व प्रण लिया की किसी भी किस्म का केमिकल वे मशरूम की पैदावार में नहीं करेंगी। कुछ मशरूम उत्पादक तैयार मशरूम को सोडियम के घोल में धोकर बाजार भेजते हैं। उससे पैदावार का वजन बढ़ जाता है पर उपभोक्ता को शुद्ध सब्जी नहीं मिल पाती।
बुलंद हौसले से बदला तापमान का रुख
मुकेश देवी ने बताया की पिछले दिनों तापमान बढ़ कर 37 डिग्री पहुंच गया ऐसे में भी उन्होंने लगातार झोंपडिय़ों में पानी का छिडक़ाव कर तापमान 15 से 20 डिग्री के बीच मेंटेन किया और पैदावार को घटने नहीं दिया।
मुकेश देवी ने बताया की किसान यदि परंपरागत फसलों के साथ सब्जी व अन्य सहायक फसलों की और रुख करें तो जम कर मुनाफा कमा सकते हैं।
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सुरेंद्र सिंह ने बताया की उनकी पत्नी उनका सहयोग करने के लिए जब मैदान में आ गई तो उन्होंने 5 हट आधा एकड़ में तैयार की। एक झोपड़ी में मशरूम तैयार करने के लिए 2 हजार बैग होते हैं जिनमें एक बैग से 2.5 किलोग्राम मशरूम तैयार होती है। एक माह में मशरूम की फसल पूरी तरह से तैयार हो जाती है। मुकेश देवी ने बताया की शुरूआती दौर में उन्हें तैयार माल की बिक्री को लेकर काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्होंने 6 महिलाओं को सहायक के तौर पर रखा और मशरूम उत्पादन का कार्य पूरी तरह से अपने हाथ में ले लिया। 15 से 20 डिग्री के माध्य जब तापमान पूरी से मशरूम की खेती के पक्ष में आया तो पैदावार एक दिन में ढाई क्विंटल तक भी उतरी। तैयार फसल की ग्रेडिंग, पैकिंग आदी के लिए उनके पास 6 महिलाओं की टीम है जिसके माध्यम से फसल को पूरी तरह से पैक कर मंडी भिजवाया। एक हट से 15 से लेकर 20 क्विंटल मशरूम उन लोगों को मिल रही है।
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नहीं होता केमिकल का प्रयोग
मुकेश देवी ने बताया की हर कार्य की शुरूआत मुश्किल होती है। हर रोज मिलने वाले अनुभव से किसान स्वयं एक अच्छा कृषि वैज्ञानिक बन जाता है। बीते छह मास में उन्होंने हर दिन अपनी कृषि से सीखा व प्रण लिया की किसी भी किस्म का केमिकल वे मशरूम की पैदावार में नहीं करेंगी। कुछ मशरूम उत्पादक तैयार मशरूम को सोडियम के घोल में धोकर बाजार भेजते हैं। उससे पैदावार का वजन बढ़ जाता है पर उपभोक्ता को शुद्ध सब्जी नहीं मिल पाती।
बुलंद हौसले से बदला तापमान का रुख
मुकेश देवी ने बताया की पिछले दिनों तापमान बढ़ कर 37 डिग्री पहुंच गया ऐसे में भी उन्होंने लगातार झोंपडिय़ों में पानी का छिडक़ाव कर तापमान 15 से 20 डिग्री के बीच मेंटेन किया और पैदावार को घटने नहीं दिया।
मुकेश देवी ने बताया की किसान यदि परंपरागत फसलों के साथ सब्जी व अन्य सहायक फसलों की और रुख करें तो जम कर मुनाफा कमा सकते हैं।

मुख्य मंत्री के हाथों सम्मानित होने वाली महिला किसानों में शामिल मुकेश देवी