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श्रीकृष्ण का दिव्य स्वरूप सत्, चित् और आनंद से युक्त : साक्षी गोपाल दास
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कथा में उपस्थित श्रद्धालु। समिति
- फोटो : विज्ञान क्लब द्वारा सम्मानित किए गए बाल वैज्ञानिक। स्रोत: विज्ञान क्लब
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कैथल। इस्कॉन प्रचार समिति कैथल की ओर से हिंदू गर्ल्स स्कूल, अंबाला रोड में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन का आयोजन हुआ। इसमें कथाव्यास साक्षी गोपाल दास ने श्रीमद्भागवत के सातवें स्कंध की कथा का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य स्वरूप सत्, चित् और आनंद से युक्त है।
उन्होंने कहा कि जो भक्त आत्मा के स्तर पर पहुंच जाते हैं, उन्हें आत्माराम कहा जाता है। ऐसे भक्त संसार के मान-अपमान से प्रभावित नहीं होते। उन्होंने महाराज भरत की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतवर्ष का नाम भी उन्हीं के नाम पर पड़ा।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत की परंपरा श्री शुकदेव गोस्वामी की महाराज परीक्षित को सुनाई गई कथा से प्राप्त हुई है। भगवान चैतन्य महाप्रभु ने 500 वर्ष पूर्व कलियुग में हरिनाम संकीर्तन का संदेश देने के लिए अवतार लिया था और वे स्वयं राधा-कृष्ण के अभिन्न स्वरूप हैं।
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कथाव्यास ने कहा कि भक्ति की शुरुआत पांच वर्ष की आयु से ही हो जानी चाहिए, क्योंकि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और यह केवल भगवान के भजन और मोक्ष प्राप्ति के लिए मिला है। उन्होंने कहा कि बुढ़ापे में भजन करना कठिन हो जाता है, इसलिए अनुकूल समय में अधिक से अधिक भगवान का स्मरण करना चाहिए, ताकि विपरीत परिस्थितियों में भगवान स्वयं भक्त का साथ दें।
उन्होंने नारद मुनि के उपदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रेम, भय, शत्रुता या किसी भी भाव से भगवान का निरंतर चिंतन करता है तो उसका कल्याण निश्चित होता है, क्योंकि भगवान सभी के प्रति समान भाव रखते हैं।
प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि कथा के समापन से पूर्व कथाव्यास ने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे महामंत्र की दो माला जपने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि 16 नाम और 32 अक्षरों वाला यह महामंत्र कलियुग में जीव के उद्धार का सबसे प्रभावी साधन है।
उन्होंने बताया कि कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव व मटकी प्रतियोगिता का आयोजन धूमधाम से किया जाएगा। इस अवसर पर पंडाल को फूलों, गुब्बारों और खिलौनों से सजाया जाएगा और भगवान को अर्पित भोग का प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।
कार्यक्रम में कथा के यजमान अमरजीत छाबड़ा, विनोद भल्ला, मनदीप सिंह (एडवोकेट), मदन मंगला, सुनील खुराना, डॉ. ज्योति, गोपाल गर्ग सहित अनेक श्रद्धालुओं ने कथाव्यास का स्वागत किया और कथा का श्रवण किया। इस दौरान स्वरूपा नंदी दास, विनय कृष्ण दास, यजुनन्दन प्राण दास, रामानंद प्राण दास, परंपरा प्रिय दास, अनादि नित्य दास, सुरेंद्र (एसएचओ), अरुण सिंगला, श्याम लाल वर्मा, रुपेश गर्ग, नंद लाल, सारथी कृष्ण दास, विदुर सखा दास और समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि जो भक्त आत्मा के स्तर पर पहुंच जाते हैं, उन्हें आत्माराम कहा जाता है। ऐसे भक्त संसार के मान-अपमान से प्रभावित नहीं होते। उन्होंने महाराज भरत की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतवर्ष का नाम भी उन्हीं के नाम पर पड़ा।
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उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत की परंपरा श्री शुकदेव गोस्वामी की महाराज परीक्षित को सुनाई गई कथा से प्राप्त हुई है। भगवान चैतन्य महाप्रभु ने 500 वर्ष पूर्व कलियुग में हरिनाम संकीर्तन का संदेश देने के लिए अवतार लिया था और वे स्वयं राधा-कृष्ण के अभिन्न स्वरूप हैं।
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कथाव्यास ने कहा कि भक्ति की शुरुआत पांच वर्ष की आयु से ही हो जानी चाहिए, क्योंकि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और यह केवल भगवान के भजन और मोक्ष प्राप्ति के लिए मिला है। उन्होंने कहा कि बुढ़ापे में भजन करना कठिन हो जाता है, इसलिए अनुकूल समय में अधिक से अधिक भगवान का स्मरण करना चाहिए, ताकि विपरीत परिस्थितियों में भगवान स्वयं भक्त का साथ दें।
उन्होंने नारद मुनि के उपदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रेम, भय, शत्रुता या किसी भी भाव से भगवान का निरंतर चिंतन करता है तो उसका कल्याण निश्चित होता है, क्योंकि भगवान सभी के प्रति समान भाव रखते हैं।
प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि कथा के समापन से पूर्व कथाव्यास ने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे महामंत्र की दो माला जपने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि 16 नाम और 32 अक्षरों वाला यह महामंत्र कलियुग में जीव के उद्धार का सबसे प्रभावी साधन है।
उन्होंने बताया कि कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव व मटकी प्रतियोगिता का आयोजन धूमधाम से किया जाएगा। इस अवसर पर पंडाल को फूलों, गुब्बारों और खिलौनों से सजाया जाएगा और भगवान को अर्पित भोग का प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।
कार्यक्रम में कथा के यजमान अमरजीत छाबड़ा, विनोद भल्ला, मनदीप सिंह (एडवोकेट), मदन मंगला, सुनील खुराना, डॉ. ज्योति, गोपाल गर्ग सहित अनेक श्रद्धालुओं ने कथाव्यास का स्वागत किया और कथा का श्रवण किया। इस दौरान स्वरूपा नंदी दास, विनय कृष्ण दास, यजुनन्दन प्राण दास, रामानंद प्राण दास, परंपरा प्रिय दास, अनादि नित्य दास, सुरेंद्र (एसएचओ), अरुण सिंगला, श्याम लाल वर्मा, रुपेश गर्ग, नंद लाल, सारथी कृष्ण दास, विदुर सखा दास और समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

कथा में उपस्थित श्रद्धालु। समिति- फोटो : विज्ञान क्लब द्वारा सम्मानित किए गए बाल वैज्ञानिक। स्रोत: विज्ञान क्लब

कथा में उपस्थित श्रद्धालु। समिति- फोटो : विज्ञान क्लब द्वारा सम्मानित किए गए बाल वैज्ञानिक। स्रोत: विज्ञान क्लब

कथा में उपस्थित श्रद्धालु। समिति- फोटो : विज्ञान क्लब द्वारा सम्मानित किए गए बाल वैज्ञानिक। स्रोत: विज्ञान क्लब