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Kaithal News: सरपंच उपचुनाव में पानी की निकासी बड़ा मुद्दा
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 03 May 2026 12:10 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। पूर्व सरपंच जंगशेर नंबरदार के निधन के बाद खाली हुए सरपंच पद के लिए 10 मई को उपचुनाव कराया जाएगा। चुनाव को लेकर गांव में सरगर्मी बढ़ गई है और दो उम्मीदवार चुनावी मैदान में आमने-सामने हैं।
एक उम्मीदवार पूर्व सरपंच के परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जबकि दूसरा कार्यवाहक सरपंच के रूप में कार्य कर रहे हैं, जो अब चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहा है। दोनों ही उम्मीदवार गांव के विकास कार्यों को लेकर वादे कर रहे हैं और जोर-शोर से प्रचार में जुटे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में इस समय सबसे बड़ी समस्या गंदे पानी की निकासी को लेकर बनी हुई है, जो चुनाव का मुख्य मुद्दा बन गई है। ग्रामीणों का मानना है कि इस बार का चुनाव विकास और मूलभूत सुविधाओं के मुद्दों पर केंद्रित रहेगा।
ग्रामीण जयपाल पवार का कहना है कि गांव में गंदे पानी की निकासी सबसे गंभीर समस्या है। जो उम्मीदवार इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा, उसी के पक्ष में मतदान किया जाएगा। युवा राजीव आर्य के अनुसार, चुनाव से पहले सभी उम्मीदवार बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद उन्हें भूल जाते हैं। ऐसे में इस बार ऐसे सरपंच का चुनाव होना चाहिए जो वास्तव में समस्या का समाधान कर सके। गुरमीत सिंह का कहना है कि गांव की कमान पढ़े-लिखे और दूरदर्शी युवा के हाथों में होनी चाहिए, जो विकास के साथ-साथ भाईचारे को भी बनाए रखे।
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एक उम्मीदवार पूर्व सरपंच के परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जबकि दूसरा कार्यवाहक सरपंच के रूप में कार्य कर रहे हैं, जो अब चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहा है। दोनों ही उम्मीदवार गांव के विकास कार्यों को लेकर वादे कर रहे हैं और जोर-शोर से प्रचार में जुटे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि गांव में इस समय सबसे बड़ी समस्या गंदे पानी की निकासी को लेकर बनी हुई है, जो चुनाव का मुख्य मुद्दा बन गई है। ग्रामीणों का मानना है कि इस बार का चुनाव विकास और मूलभूत सुविधाओं के मुद्दों पर केंद्रित रहेगा।
ग्रामीण जयपाल पवार का कहना है कि गांव में गंदे पानी की निकासी सबसे गंभीर समस्या है। जो उम्मीदवार इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा, उसी के पक्ष में मतदान किया जाएगा। युवा राजीव आर्य के अनुसार, चुनाव से पहले सभी उम्मीदवार बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद उन्हें भूल जाते हैं। ऐसे में इस बार ऐसे सरपंच का चुनाव होना चाहिए जो वास्तव में समस्या का समाधान कर सके। गुरमीत सिंह का कहना है कि गांव की कमान पढ़े-लिखे और दूरदर्शी युवा के हाथों में होनी चाहिए, जो विकास के साथ-साथ भाईचारे को भी बनाए रखे।
