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Karnal News: एक हजार में से 150 प्रकार की जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं
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मेडिकल कॉलेज केदवा काउंटर पर लगी मरीजों की कतार। अमर उजाला
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी लगातार गंभीर होती जा रही है। अस्पताल में एक हजार से अधिक दवाएं स्वीकृत होने के बावजूद करीब 150 प्रकार की दवाएं मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रहीं। हालात यह हैं कि सामान्य बुखार और दर्द में इस्तेमाल होने वाली पीसीएम (पैरासिटामोल) और दर्द निवारक दवाओं तक का की कमी है जबकि कई जरूरी एंटीबायोटिक दवाएं और इंजेक्शन भी स्टॉक से बाहर हैं। इससे मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि अस्पताल में 25 से अधिक आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इनमें आईसीयू, डायलिसिस, कैंसर और ऑपरेशन थिएटर में उपयोग होने वाली दवाएं भी शामिल हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले लोगों को अब दवाइयों पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीज रामफल ने बताया, मैं हार्ट की दवा लेने अस्पताल आया था लेकिन यहां दवा नहीं मिली। डॉक्टर ने बाहर से खरीदने को कहा। बाजार में दवा काफी महंगी है और हर महीने इतना खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है।
मरीज की परिजन सुनीता देवी ने कहा, बच्चे को तेज बुखार था और डॉक्टर ने एंटीबायोटिक लिखी थी, लेकिन अस्पताल में नहीं मिली। मजबूरी में बाहर मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ी। गरीब आदमी सरकारी अस्पताल में भी दवा न मिले तो कहां जाए।
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डिमांड बना दी गई है जल्द होगी आपूर्ति
निदेशक डॉ. एमके गर्ग ने बताया कि जिन दवाओं का स्टॉक खत्म हुआ है, उनकी डिमांड भेज दी गई है। जल्द पर्चेजिंग हो जाएगी। इसके बाद हालात सुधर जाएंगे। अब तक वित्तीय क्षमता कम होने के कारण खरीद नहीं हो पा रही थी।
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दवाओं की कमी-
अस्पताल में जिन दवाओं की कमी बताई जा रही है उनमें एंटीबायोटिक इंजेक्शन मेरोपेनम, पाइपेरासिलिन-टैजोबैक्टम, सेफ्ट्रियाक्सोन और अमीकासिन प्रमुख हैं। इसके अलावा इंसुलिन इंजेक्शन, हार्ट मरीजों की क्लोपिडोग्रेल, इकोस्प्रिन और एटोरवास्टेटिन जैसी दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। ब्लड प्रेशर की टेल्मीसार्टन और एम्लोडिपिन, शुगर की मेटफॉर्मिन और ग्लाइमिप्राइड, अस्थमा इनहेलर, नेब्यूलाइजेशन दवाएं, एंटी रेबीज और टिटनेस इंजेक्शन की कमी भी मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। विटामिन बी-12, कैल्शियम इंजेक्शन, डायलिसिस में इस्तेमाल होने वाली दवाएं, कैंसर मरीजों की कीमो दवाएं और आईसीयू में उपयोग होने वाले इमरजेंसी इंजेक्शन भी स्टॉक में नहीं हैं।
इसके अलावा एंटी फंगल इंजेक्शन, खून पतला करने वाली एनॉक्सापैरिन इंजेक्शन, एनेस्थीसिया दवाएं, बच्चों के एंटीबायोटिक सिरप, थायराइड की दवाएं, आंखों की एंटीबायोटिक ड्रॉप, स्टेरॉयड क्रीम, मेथोट्रेक्सेट, मानसिक रोगों की दवाएं और दर्द निवारक ट्रामाडोल इंजेक्शन भी उपलब्ध नहीं हो रहे हैं।
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मरीजों की प्रतिक्रिया-
अच्छे और बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज आए थे लेकिन यहां तो दवाएं ही उपलब्ध नहीं हैं। कई दवाओं को बाहर से खरीदने के लिए कहा है।
- पार्वती, मरीज।
स्किन के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज आए थे। स्किन की सामान्य दवाएं तो मिल गई। लेकिन अन्य दवाएं जो महंगी है उनको बाहर से ही खरीदने के लिए कहा गया है।
- रीना, मरीज
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करनाल। कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी लगातार गंभीर होती जा रही है। अस्पताल में एक हजार से अधिक दवाएं स्वीकृत होने के बावजूद करीब 150 प्रकार की दवाएं मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रहीं। हालात यह हैं कि सामान्य बुखार और दर्द में इस्तेमाल होने वाली पीसीएम (पैरासिटामोल) और दर्द निवारक दवाओं तक का की कमी है जबकि कई जरूरी एंटीबायोटिक दवाएं और इंजेक्शन भी स्टॉक से बाहर हैं। इससे मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि अस्पताल में 25 से अधिक आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इनमें आईसीयू, डायलिसिस, कैंसर और ऑपरेशन थिएटर में उपयोग होने वाली दवाएं भी शामिल हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले लोगों को अब दवाइयों पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
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अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीज रामफल ने बताया, मैं हार्ट की दवा लेने अस्पताल आया था लेकिन यहां दवा नहीं मिली। डॉक्टर ने बाहर से खरीदने को कहा। बाजार में दवा काफी महंगी है और हर महीने इतना खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है।
मरीज की परिजन सुनीता देवी ने कहा, बच्चे को तेज बुखार था और डॉक्टर ने एंटीबायोटिक लिखी थी, लेकिन अस्पताल में नहीं मिली। मजबूरी में बाहर मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ी। गरीब आदमी सरकारी अस्पताल में भी दवा न मिले तो कहां जाए।
डिमांड बना दी गई है जल्द होगी आपूर्ति
निदेशक डॉ. एमके गर्ग ने बताया कि जिन दवाओं का स्टॉक खत्म हुआ है, उनकी डिमांड भेज दी गई है। जल्द पर्चेजिंग हो जाएगी। इसके बाद हालात सुधर जाएंगे। अब तक वित्तीय क्षमता कम होने के कारण खरीद नहीं हो पा रही थी।
दवाओं की कमी-
अस्पताल में जिन दवाओं की कमी बताई जा रही है उनमें एंटीबायोटिक इंजेक्शन मेरोपेनम, पाइपेरासिलिन-टैजोबैक्टम, सेफ्ट्रियाक्सोन और अमीकासिन प्रमुख हैं। इसके अलावा इंसुलिन इंजेक्शन, हार्ट मरीजों की क्लोपिडोग्रेल, इकोस्प्रिन और एटोरवास्टेटिन जैसी दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। ब्लड प्रेशर की टेल्मीसार्टन और एम्लोडिपिन, शुगर की मेटफॉर्मिन और ग्लाइमिप्राइड, अस्थमा इनहेलर, नेब्यूलाइजेशन दवाएं, एंटी रेबीज और टिटनेस इंजेक्शन की कमी भी मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। विटामिन बी-12, कैल्शियम इंजेक्शन, डायलिसिस में इस्तेमाल होने वाली दवाएं, कैंसर मरीजों की कीमो दवाएं और आईसीयू में उपयोग होने वाले इमरजेंसी इंजेक्शन भी स्टॉक में नहीं हैं।
इसके अलावा एंटी फंगल इंजेक्शन, खून पतला करने वाली एनॉक्सापैरिन इंजेक्शन, एनेस्थीसिया दवाएं, बच्चों के एंटीबायोटिक सिरप, थायराइड की दवाएं, आंखों की एंटीबायोटिक ड्रॉप, स्टेरॉयड क्रीम, मेथोट्रेक्सेट, मानसिक रोगों की दवाएं और दर्द निवारक ट्रामाडोल इंजेक्शन भी उपलब्ध नहीं हो रहे हैं।
मरीजों की प्रतिक्रिया-
अच्छे और बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज आए थे लेकिन यहां तो दवाएं ही उपलब्ध नहीं हैं। कई दवाओं को बाहर से खरीदने के लिए कहा है।
- पार्वती, मरीज।
स्किन के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज आए थे। स्किन की सामान्य दवाएं तो मिल गई। लेकिन अन्य दवाएं जो महंगी है उनको बाहर से ही खरीदने के लिए कहा गया है।
- रीना, मरीज