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Karnal News: कड़ाके की ठंड में महिलाओं में बढ़ रहे स्वप्रतिरक्षित रोग
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 29 Jan 2026 02:07 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। ठंड में स्वप्रतिरक्षित (ऑटोइम्यून) रोग से पीड़ित महिलाओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। जिला नागरिक अस्पताल की जनरल ओपीडी में करीब 400 और ऑर्थो व त्वचा रोग ओपीडी में रोजाना करीब 200 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें आधे से ज्यादा महिलाएं हैं। इनमें सोरायसिस से लेकर शरीर में सूजन, अत्यधिक थकान, अकड़न और चलने-फिरने में कठिनाई जैसी दिक्कत है।
श्रीराम चंद्र मेमोरियल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कमल चराया ने बताया कि ठंड के मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता असंतुलित हो जाती है। ऐसी स्थिति में इम्यून सिस्टम अपने ही स्वस्थ अंगों पर हमला करने लगता है, जिससे ऑटोइम्यून बीमारियों के लक्षण तेजी से बढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि इस समय 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। हार्मोनल बदलाव, मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और पोषण की कमी इस उम्र वर्ग में जोखिम को और बढ़ा रहे हैं।
डॉ. कमल चराया के अनुसार, सर्दियों में जिन ऑटोइम्यून बीमारियों के मामले सबसे अधिक रूमेटॉइड आर्थराइटिस सबसे प्रमुख है। इसमें जोड़ों में सूजन, दर्द और सुबह के समय अधिक अकड़न महसूस होती है। इसके अलावा, सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस के मरीजों में ठंड के कारण थकान, त्वचा शुष्क पड़ना, सोरायसिस और जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ जाती है। हाशिमोटो थायरॉयडाइटिस से जुड़ा हाइपोथायरॉयडिज्म भी महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है, जिससे वजन बढ़ना, सुस्ती और ठंड अधिक लगने जैसी दिक्कतें सामने आ रही हैं।
- ये करें उपाय :
शरीर को गर्म रखना, संतुलित और प्रोटीन युक्त आहार लेना, पर्याप्त नींद लेना और हल्का व्यायाम करना बेहद जरूरी है। दर्द निवारक दवाएं खुद से नहीं लें।
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श्रीराम चंद्र मेमोरियल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कमल चराया ने बताया कि ठंड के मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता असंतुलित हो जाती है। ऐसी स्थिति में इम्यून सिस्टम अपने ही स्वस्थ अंगों पर हमला करने लगता है, जिससे ऑटोइम्यून बीमारियों के लक्षण तेजी से बढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि इस समय 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। हार्मोनल बदलाव, मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और पोषण की कमी इस उम्र वर्ग में जोखिम को और बढ़ा रहे हैं।
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डॉ. कमल चराया के अनुसार, सर्दियों में जिन ऑटोइम्यून बीमारियों के मामले सबसे अधिक रूमेटॉइड आर्थराइटिस सबसे प्रमुख है। इसमें जोड़ों में सूजन, दर्द और सुबह के समय अधिक अकड़न महसूस होती है। इसके अलावा, सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस के मरीजों में ठंड के कारण थकान, त्वचा शुष्क पड़ना, सोरायसिस और जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ जाती है। हाशिमोटो थायरॉयडाइटिस से जुड़ा हाइपोथायरॉयडिज्म भी महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा है, जिससे वजन बढ़ना, सुस्ती और ठंड अधिक लगने जैसी दिक्कतें सामने आ रही हैं।
- ये करें उपाय :
शरीर को गर्म रखना, संतुलित और प्रोटीन युक्त आहार लेना, पर्याप्त नींद लेना और हल्का व्यायाम करना बेहद जरूरी है। दर्द निवारक दवाएं खुद से नहीं लें।