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Karnal News: नौ साल पहले बना बस्तली स्टेडियम बदहाल
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कंक्रीट की सड़कों पर अभ्यास करने को मजबूर खिलाड़ी
करनाल/निसिंग। कस्बे के बस्तली गांव में बना खेल मैदान सुंदरीकरण की बाट जोह रहा है। करीब नौ वर्ष पहले बने इस खंड स्तरीय ग्रामीण खेल परिसर में सुविधाओं का अभाव है। इस कारण से आस-पास के गांव के खिलाड़ी यहां अभ्यास नहीं कर पा रह है। पुलिस व सेना की भर्ती की तैयारी के लिए युवाओं को मजबूरन कंक्रीट से बनी सड़कों पर दौड़ का अभ्यास करना पड़ता है।
यहां के लोगों का कहना है कि जब से यह खेल मैदान बना है यहां न तो कोच की व्यवस्था ही हो पाई और न ही किसी सुरक्षा कर्मी की। ग्राम पंचायत की ओर से मनरेगा के माध्यम से कई बार खेल मैदान की सफाई करवाई गई लेकिन देखरेख के अभाव में यहां दोबारा से बड़ी-बड़ी घास हो जाता है। अब तो क्रिकेट मैदान के साथ-साथ, ट्रैक और वॉलीबॉल कोर्ट में भी घास उग गई है।
खेल मैदान के मुख्य द्वार, समतलीकरण, बिजली, पानी सहित अन्य कई खामियां होने पर युवाओं को भारी परेशानियों का सामना उठाना पड़ा रहा है। नवंबर 2017 में खेल एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने खेल स्टेडियम का उद्घाटन कर क्षेत्र वासियों को यह सौगात दी थी। ग्रामीणों का कहना है कि देखरेख के अभाव में यह भवन बदहाल है। खेल भवन की इमारत के शीशे टूट चुके हैं।
प्रवेश द्वार पर कोई गेट नहीं लगाया गया। खेल मैदान में पेयजल की सुविधा शौचालय में साफ सफाई नहीं है। मैदान में कई जगहों पर गड्ढे बने हुए हैं। खेल मैदान में सुरक्षा कर्मी की व्यवस्था न होने के कारण टेंट वाले यहां अपने मैट सुखाते है। सुरक्षा के इंतजाम न होने से यहां रखा गया ज्यादातर खेल सामान चोरी हो चुका है। वहीं दूसरी यह खेल मैदान अब टेंट वालों के मैट सुखाने तक ही सीमित रह गया है। स्टेडियम के अंदर मैदान पर गड्ढे व कूड़े-कचरे के ढेर लगे है।
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करनाल/निसिंग। कस्बे के बस्तली गांव में बना खेल मैदान सुंदरीकरण की बाट जोह रहा है। करीब नौ वर्ष पहले बने इस खंड स्तरीय ग्रामीण खेल परिसर में सुविधाओं का अभाव है। इस कारण से आस-पास के गांव के खिलाड़ी यहां अभ्यास नहीं कर पा रह है। पुलिस व सेना की भर्ती की तैयारी के लिए युवाओं को मजबूरन कंक्रीट से बनी सड़कों पर दौड़ का अभ्यास करना पड़ता है।
यहां के लोगों का कहना है कि जब से यह खेल मैदान बना है यहां न तो कोच की व्यवस्था ही हो पाई और न ही किसी सुरक्षा कर्मी की। ग्राम पंचायत की ओर से मनरेगा के माध्यम से कई बार खेल मैदान की सफाई करवाई गई लेकिन देखरेख के अभाव में यहां दोबारा से बड़ी-बड़ी घास हो जाता है। अब तो क्रिकेट मैदान के साथ-साथ, ट्रैक और वॉलीबॉल कोर्ट में भी घास उग गई है।
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खेल मैदान के मुख्य द्वार, समतलीकरण, बिजली, पानी सहित अन्य कई खामियां होने पर युवाओं को भारी परेशानियों का सामना उठाना पड़ा रहा है। नवंबर 2017 में खेल एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने खेल स्टेडियम का उद्घाटन कर क्षेत्र वासियों को यह सौगात दी थी। ग्रामीणों का कहना है कि देखरेख के अभाव में यह भवन बदहाल है। खेल भवन की इमारत के शीशे टूट चुके हैं।
प्रवेश द्वार पर कोई गेट नहीं लगाया गया। खेल मैदान में पेयजल की सुविधा शौचालय में साफ सफाई नहीं है। मैदान में कई जगहों पर गड्ढे बने हुए हैं। खेल मैदान में सुरक्षा कर्मी की व्यवस्था न होने के कारण टेंट वाले यहां अपने मैट सुखाते है। सुरक्षा के इंतजाम न होने से यहां रखा गया ज्यादातर खेल सामान चोरी हो चुका है। वहीं दूसरी यह खेल मैदान अब टेंट वालों के मैट सुखाने तक ही सीमित रह गया है। स्टेडियम के अंदर मैदान पर गड्ढे व कूड़े-कचरे के ढेर लगे है।