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Karnal News: अंजनथली शोध केंद्र में अब मधुमक्खी पालन भी होगा
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प्रदर्शनी का अवलोकन करते कुलपति प्रो सुरेश मल्होत्रा संस्थान
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के शोध केंद्र अंजनथली में अब मधुमक्खी पालन भी होगा। विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से केंद्र में मधुमक्खी इकाई की शुरुआत की गई। विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें संस्थान के विद्यार्थियों ने शहद और मोम से बने उत्पाद प्रदर्शित करके इस क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर दर्शाए, साथ ही मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देती विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी उत्साह से हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने की। वहीं एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह मुख्यातिथि के रूप में पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ता तापमान, पर्यावरण और आवास का नुकसान, प्रदूषण, बीमारियां और परजीवी आदि के चलते मधुमक्खियों की आबादी तेजी से कम हो रही है, अगर ये सिलसिला नहीं रूका तो पारिस्थितिकी तंत्र, खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
अतिथियों ने पिछले दो दिनों से संस्थान में चल रही पोस्टर मेकिंग, क्वीज, स्लोगन और मधुमक्खी से संबंधित फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. सुरेंद्र सिंह, अनुसंधान निदेशक डॉ. धर्मपाल चौधरी, डीन डॉ. देवराज, डीईई डॉ. विजय पाल यादव, डीएसडब्ल्यू प्रो रंजन गुप्ता, डॉ. होशियार सिंह नेगी, डॉ. गौरव, डॉ. शिवानी मौजूद रहे।
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मधुमक्खियां बचाने के लिए बढ़ानी होगी हरियाली : कुलपति
कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने कहा कि मधुमक्खी कुदरत का सबसे महत्पवूर्ण नन्हा सा जीव है, जिसके बिना मानव के समक्ष विकराल समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। हम सबको मिलकर मुधमक्खियों के लिए हरियाली करते हुए ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जिससे मधुमक्खियों को पनपने के प्राकृतिक अवसर मिले।
विद्यार्थी पढ़ाई के साथ ही उद्यमिता की ओर बढ़ाएं कदम : निदेशक
एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों को खुद इनोवेशन करके उत्पादों को बनाकर बाजार में बेचना चाहिए, देश में मार्केट बहुत बड़ी है। विद्यार्थी उद्यमी बनकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ अपने उत्पाद बनाएं और उन्हें बेचे लेकिन उत्पाद क्वालिटीयुक्त और समय की मांग के अनुसार हो।
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करनाल। महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के शोध केंद्र अंजनथली में अब मधुमक्खी पालन भी होगा। विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से केंद्र में मधुमक्खी इकाई की शुरुआत की गई। विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें संस्थान के विद्यार्थियों ने शहद और मोम से बने उत्पाद प्रदर्शित करके इस क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर दर्शाए, साथ ही मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देती विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी उत्साह से हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने की। वहीं एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह मुख्यातिथि के रूप में पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ता तापमान, पर्यावरण और आवास का नुकसान, प्रदूषण, बीमारियां और परजीवी आदि के चलते मधुमक्खियों की आबादी तेजी से कम हो रही है, अगर ये सिलसिला नहीं रूका तो पारिस्थितिकी तंत्र, खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
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अतिथियों ने पिछले दो दिनों से संस्थान में चल रही पोस्टर मेकिंग, क्वीज, स्लोगन और मधुमक्खी से संबंधित फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. सुरेंद्र सिंह, अनुसंधान निदेशक डॉ. धर्मपाल चौधरी, डीन डॉ. देवराज, डीईई डॉ. विजय पाल यादव, डीएसडब्ल्यू प्रो रंजन गुप्ता, डॉ. होशियार सिंह नेगी, डॉ. गौरव, डॉ. शिवानी मौजूद रहे।
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मधुमक्खियां बचाने के लिए बढ़ानी होगी हरियाली : कुलपति
कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने कहा कि मधुमक्खी कुदरत का सबसे महत्पवूर्ण नन्हा सा जीव है, जिसके बिना मानव के समक्ष विकराल समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। हम सबको मिलकर मुधमक्खियों के लिए हरियाली करते हुए ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जिससे मधुमक्खियों को पनपने के प्राकृतिक अवसर मिले।
विद्यार्थी पढ़ाई के साथ ही उद्यमिता की ओर बढ़ाएं कदम : निदेशक
एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों को खुद इनोवेशन करके उत्पादों को बनाकर बाजार में बेचना चाहिए, देश में मार्केट बहुत बड़ी है। विद्यार्थी उद्यमी बनकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ अपने उत्पाद बनाएं और उन्हें बेचे लेकिन उत्पाद क्वालिटीयुक्त और समय की मांग के अनुसार हो।