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Karnal News: कूरियर कंपनी ने गुम किया सामान, लगाया गया जुर्माना
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कूरियर सेवा में लापरवाही बरतने पर ट्रैकोन कूरियर कंपनी को न केवल खोए हुए सामान की कीमत चुकाने, बल्कि मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
आयोग के फैसले के अनुसार, सेक्टर-12 निवासी वीरेंद्र कुमार ने सितंबर 2023 में हैदराबाद में कार्यरत अपनी बेटी के लिए पुराने ब्रांडेड कपड़े और अन्य जरूरी सामान का एक पार्सल ट्रैकॉन कूरियर के माध्यम से बुक किया था। इसके लिए उन्होंने कंपनी को 2835 रुपये का शुल्क भी अदा किया। महीनों बीत जाने के बाद भी पार्सल न तो गंतव्य तक पहुंचा और न ही वापस आया। कई शिकायतों और कानूनी नोटिस के बावजूद कंपनी ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। आयोग के समक्ष सुनवाई के दाैरान ट्रैकॉन कूरियर ने स्वीकार किया कि पार्सल रास्ते में गुम हो गया है। कंपनी ने तर्क दिया कि रसीद की शर्तों के अनुसार, यदि कोई विशेष जोखिम शुल्क नहीं दिया गया है, तो उनकी देयता 3000 रुपये तक ही सीमित है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह की अध्यक्षता वाले आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कूरियर कंपनी का कर्तव्य था कि वह या तो कंसाइनमेंट को सही पते पर पहुंचाए या फिर सामान की पूरी कीमत वापस करे। ऐसा करने में विफल रहना सेवा में भारी लापरवाही है।
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कूरियर सेवा में लापरवाही बरतने पर ट्रैकोन कूरियर कंपनी को न केवल खोए हुए सामान की कीमत चुकाने, बल्कि मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
आयोग के फैसले के अनुसार, सेक्टर-12 निवासी वीरेंद्र कुमार ने सितंबर 2023 में हैदराबाद में कार्यरत अपनी बेटी के लिए पुराने ब्रांडेड कपड़े और अन्य जरूरी सामान का एक पार्सल ट्रैकॉन कूरियर के माध्यम से बुक किया था। इसके लिए उन्होंने कंपनी को 2835 रुपये का शुल्क भी अदा किया। महीनों बीत जाने के बाद भी पार्सल न तो गंतव्य तक पहुंचा और न ही वापस आया। कई शिकायतों और कानूनी नोटिस के बावजूद कंपनी ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। आयोग के समक्ष सुनवाई के दाैरान ट्रैकॉन कूरियर ने स्वीकार किया कि पार्सल रास्ते में गुम हो गया है। कंपनी ने तर्क दिया कि रसीद की शर्तों के अनुसार, यदि कोई विशेष जोखिम शुल्क नहीं दिया गया है, तो उनकी देयता 3000 रुपये तक ही सीमित है।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह की अध्यक्षता वाले आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कूरियर कंपनी का कर्तव्य था कि वह या तो कंसाइनमेंट को सही पते पर पहुंचाए या फिर सामान की पूरी कीमत वापस करे। ऐसा करने में विफल रहना सेवा में भारी लापरवाही है।
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