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Karnal News: थप्पड़ प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए डॉक्टर ने दायर की याचिका
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Tue, 17 Mar 2026 12:44 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। घरौंडा के सिविल अस्पताल में इंस्पेक्टर दीपक कुमार (निलंबित) के डॉ. प्रशांत चौहान को थप्पड़ मारने के मामले में चिकित्सक ने अदालत में याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई अब दो अप्रैल को होगी।
डॉ. प्रशांत चौहान ने याचिका में तत्कालीन थाना प्रभारी दीपक कुमार के साथ पुलिसकर्मी रमेश कुमार, रोहताश, रविंद्र, विकास और कृष्ण के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। डॉ. चौहान के अनुसार उपरोक्त आरोपियों ने 4 मार्च को उनकी सरकारी ड्यूटी में बाधा डाली। इतना ही नहीं थाना प्रभारी दीपक ने उन्हें थप्पड़ मारते हुए उनकी पिटाई की और अन्य पुलिसकर्मी उन्हें पकड़कर घसीटते हुए गाड़ी में डालकर थाने ले गए थे। इसलिए उनकी मांग है कि अदालत पुलिस को इन सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश जारी करे।
बता दें कि चार मार्च को डॉ. प्रशांत चौहान घरौंडा सिविल अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात थे। उन्होंने अस्पताल में झगड़े को लेकर तत्कालीन थाना प्रभारी दीपक कुमार को फोन किया था। आरोप है कि थाना प्रभारी ने उनकी पिटाई की थी। इससे गुस्साए सभी डॉक्टर अस्पताल में इलाज बंद करके धरने पर बैठ गए थे। डॉक्टरों की मांग थी कि थाना प्रभारी व अन्य पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए। लेकिन एसपी नरेंद्र बिजारणियां ने इंस्पेक्टर दीपक का निलंबन करके लाइनहाजिर कर दिया था। विभागीय जांच शुरू कर दी थी।
मामले में चार दिन तक डॉक्टरों की हड़ताल जारी रही। चौथे दिन एसपी ने छह अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। इसके बाद डॉक्टर हड़ताल खत्म करके काम पर लौट गए थे। डॉक्टरों ने प्राथमिकी दर्ज करवाने के लिए अदालत का रुख करने की बात कही थी।
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डॉ. प्रशांत चौहान ने याचिका में तत्कालीन थाना प्रभारी दीपक कुमार के साथ पुलिसकर्मी रमेश कुमार, रोहताश, रविंद्र, विकास और कृष्ण के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। डॉ. चौहान के अनुसार उपरोक्त आरोपियों ने 4 मार्च को उनकी सरकारी ड्यूटी में बाधा डाली। इतना ही नहीं थाना प्रभारी दीपक ने उन्हें थप्पड़ मारते हुए उनकी पिटाई की और अन्य पुलिसकर्मी उन्हें पकड़कर घसीटते हुए गाड़ी में डालकर थाने ले गए थे। इसलिए उनकी मांग है कि अदालत पुलिस को इन सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश जारी करे।
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बता दें कि चार मार्च को डॉ. प्रशांत चौहान घरौंडा सिविल अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात थे। उन्होंने अस्पताल में झगड़े को लेकर तत्कालीन थाना प्रभारी दीपक कुमार को फोन किया था। आरोप है कि थाना प्रभारी ने उनकी पिटाई की थी। इससे गुस्साए सभी डॉक्टर अस्पताल में इलाज बंद करके धरने पर बैठ गए थे। डॉक्टरों की मांग थी कि थाना प्रभारी व अन्य पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए। लेकिन एसपी नरेंद्र बिजारणियां ने इंस्पेक्टर दीपक का निलंबन करके लाइनहाजिर कर दिया था। विभागीय जांच शुरू कर दी थी।
मामले में चार दिन तक डॉक्टरों की हड़ताल जारी रही। चौथे दिन एसपी ने छह अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। इसके बाद डॉक्टर हड़ताल खत्म करके काम पर लौट गए थे। डॉक्टरों ने प्राथमिकी दर्ज करवाने के लिए अदालत का रुख करने की बात कही थी।