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Karnal News: उठान न होने से किसानों का भुगतान अटका
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अनाज मंडी में लगे कट्टे। संवाद
- फोटो : samvad
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। अनाज मंडियों में गेहूं की आवक कम हो गई है। एजेंसियों का खरीद और उठान की व्यवस्था में 27वें दिन भी सुधार नहीं हो पाया है। एजेंसी 56 प्रतिशत उठान कर सकी हैं। ऐसे में किसानों के करोड़ों रुपये का भुगतान अटका हुआ है।
किसानों को बार-बार चक्कर काटने के बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में उनकी आगामी फसल और दूसरी योजनाएं के लिए भी पैसे उधार मांगने पड़ रहे हैं। जिले की मंडियों में 340795 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है। इसमें से 300747 मीट्रिक टन की खरीद की गई है। एजेंसियों ने करीब 56 प्रतिशत उठान किया है। 35.95 अरब रुपये भुगतान किया जा सका है। बाकी भुगतान अभी बाकी है।
किसान बोले- भुगतान के बिना अटके काम
शहर मालपुर गांव के प्रदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने 15 दिन पहले गेहूं बेचा था। इसका भुगतान आज तक नहीं मिल पाया है। उनको धान की फसल के लिए जमीन का ठेका देना है। वे गेहूं का भुगतान मिलने का इंतजार कर रहे थे। किसान को गेहूं बेचते ही 72 घंटे में भुगतान दिया जाना चाहिए। ढिंडार गांव के पहल सिंह ने बताया कि वे 10 दिन पहले गेहूं बेचकर आए थे। उनकी रिश्तेदारी में शादी है। पहले गेहूं के पैसे से भात का खर्च करने की तैयारी थी। अब पैसे नहीं मिले हैं तो किसी से उधार लेने पड़ेंगे।
यूपी से किसान गेहूं लाने के प्रयास में लगे
वहीं, मंडियों में यूपी के किसान गेहूं लाने के प्रयास में लगे हुए हैं। किसान ट्रैक्टर और बुग्गी में गेहूं लादकर यमुना किनारे खड़े रहते हैं। किसानों को मंडी में आने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है।
वर्जन :
एजेंसियों को गेहूं उठान के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए लगातार रिपोर्ट ली जा रही है। किसानों को उठान होते ही भुगतान किया जा रहा है। - अवतार शास्त्री, चेयरमैन, मार्केट कमेटी
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पानीपत। अनाज मंडियों में गेहूं की आवक कम हो गई है। एजेंसियों का खरीद और उठान की व्यवस्था में 27वें दिन भी सुधार नहीं हो पाया है। एजेंसी 56 प्रतिशत उठान कर सकी हैं। ऐसे में किसानों के करोड़ों रुपये का भुगतान अटका हुआ है।
किसानों को बार-बार चक्कर काटने के बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में उनकी आगामी फसल और दूसरी योजनाएं के लिए भी पैसे उधार मांगने पड़ रहे हैं। जिले की मंडियों में 340795 मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है। इसमें से 300747 मीट्रिक टन की खरीद की गई है। एजेंसियों ने करीब 56 प्रतिशत उठान किया है। 35.95 अरब रुपये भुगतान किया जा सका है। बाकी भुगतान अभी बाकी है।
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किसान बोले- भुगतान के बिना अटके काम
शहर मालपुर गांव के प्रदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने 15 दिन पहले गेहूं बेचा था। इसका भुगतान आज तक नहीं मिल पाया है। उनको धान की फसल के लिए जमीन का ठेका देना है। वे गेहूं का भुगतान मिलने का इंतजार कर रहे थे। किसान को गेहूं बेचते ही 72 घंटे में भुगतान दिया जाना चाहिए। ढिंडार गांव के पहल सिंह ने बताया कि वे 10 दिन पहले गेहूं बेचकर आए थे। उनकी रिश्तेदारी में शादी है। पहले गेहूं के पैसे से भात का खर्च करने की तैयारी थी। अब पैसे नहीं मिले हैं तो किसी से उधार लेने पड़ेंगे।
यूपी से किसान गेहूं लाने के प्रयास में लगे
वहीं, मंडियों में यूपी के किसान गेहूं लाने के प्रयास में लगे हुए हैं। किसान ट्रैक्टर और बुग्गी में गेहूं लादकर यमुना किनारे खड़े रहते हैं। किसानों को मंडी में आने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है।
वर्जन :
एजेंसियों को गेहूं उठान के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए लगातार रिपोर्ट ली जा रही है। किसानों को उठान होते ही भुगतान किया जा रहा है। - अवतार शास्त्री, चेयरमैन, मार्केट कमेटी

अनाज मंडी में लगे कट्टे। संवाद- फोटो : samvad

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