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Karnal News: स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बनाई पहचान
Mon, 27 Apr 2026 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 27 Apr 2026 01:58 AM IST
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ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों की ताकत अब साफ नजर आने लगी है। छोटे-छोटे बचत समूहों से जुड़कर महिलाएं न सिर्फ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही हैं। जिले में अब तक पांच हजार से अधिक महिलाएं समूहों के माध्यम से लाखों रुपये का ऋण लेकर अपना व्यवसाय शुरू कर चुकी हैं। इनमें कई महिलाएं पांच लाख रुपये से अधिक का लोन लेकर सफल ग्रामीण उद्यमी बन चुकी हैं।
रजनी ने बताया कि शुरुआत में उनके पास पूंजी की कमी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन कुछ करने का जज्बा था। ऐसे में उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर तीन हजार रुपये का छोटा सा ऋण लिया और गांव में ही कॉस्मेटिक की छोटी दुकान शुरू की। समय पर किस्त चुकाने और नियमित बचत के चलते उन्हें समूह की ओर से बड़े ऋण की सुविधा मिली।
रजनी वर्तमान में 20 गांवों के ग्राम संगठनों की क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के रूप में कार्य कर रही हैं। वह समूहों की बैठकों में भाग लेकर महिलाओं को ऋण प्रक्रिया, बचत, समय पर भुगतान और व्यवसाय प्रबंधन की जानकारी देती हैं। उनका कहना है कि पहले महिलाएं बैंक जाने से घबराती थीं, लेकिन अब वे खुद बैंकिंग प्रक्रिया समझ रही हैं और डिजिटल लेन-देन भी कर रही हैं। समूहों के माध्यम से न केवल आर्थिक सशक्तिकरण हो रहा है, बल्कि सामाजिक बदलाव भी देखने को मिल रहा है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों की ताकत अब साफ नजर आने लगी है। छोटे-छोटे बचत समूहों से जुड़कर महिलाएं न सिर्फ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही हैं। जिले में अब तक पांच हजार से अधिक महिलाएं समूहों के माध्यम से लाखों रुपये का ऋण लेकर अपना व्यवसाय शुरू कर चुकी हैं। इनमें कई महिलाएं पांच लाख रुपये से अधिक का लोन लेकर सफल ग्रामीण उद्यमी बन चुकी हैं।
रजनी ने बताया कि शुरुआत में उनके पास पूंजी की कमी थी। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन कुछ करने का जज्बा था। ऐसे में उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर तीन हजार रुपये का छोटा सा ऋण लिया और गांव में ही कॉस्मेटिक की छोटी दुकान शुरू की। समय पर किस्त चुकाने और नियमित बचत के चलते उन्हें समूह की ओर से बड़े ऋण की सुविधा मिली।
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रजनी वर्तमान में 20 गांवों के ग्राम संगठनों की क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के रूप में कार्य कर रही हैं। वह समूहों की बैठकों में भाग लेकर महिलाओं को ऋण प्रक्रिया, बचत, समय पर भुगतान और व्यवसाय प्रबंधन की जानकारी देती हैं। उनका कहना है कि पहले महिलाएं बैंक जाने से घबराती थीं, लेकिन अब वे खुद बैंकिंग प्रक्रिया समझ रही हैं और डिजिटल लेन-देन भी कर रही हैं। समूहों के माध्यम से न केवल आर्थिक सशक्तिकरण हो रहा है, बल्कि सामाजिक बदलाव भी देखने को मिल रहा है।
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