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Karnal News: वकील 30 तक हड़ताल पर, रोजाना 1500 मुकदमों की सुनवाई प्रभावित
Wed, 29 Jul 2026 02:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Wed, 29 Jul 2026 02:38 AM IST
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करनाल। लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी) नीति के विरोध में जिला बार एसोसिएशन ने अपनी हड़ताल 30 जुलाई तक बढ़ा दी है। मंगलवार को भी अधिवक्ताओं ने न्यायालयों में पूरी तरह कामकाज का बहिष्कार किया। इससे जिलेभर की अदालतों में सुनवाई प्रभावित रही। हड़ताल के कारण प्रतिदिन करीब 1500 मामलों में सुनवाई नहीं हो पा रही। पक्षकारों को अगली तारीख दी जा रही है।
जिला न्यायालय परिसर के साथ-साथ घरौंडा असंध और इंद्री न्यायिक परिसरों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। बड़ी संख्या में मुकदमों की सुनवाई टलने से वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि हड़ताल के दौरान प्रॉक्सी काउंसिल को छोड़कर कोई भी अधिवक्ता अदालत में पेश नहीं होगा। यदि कोई सदस्य इस निर्णय का उल्लंघन करता है तो उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि 30 जुलाई तक एलएडीसी नीति वापस नहीं ली गई तो आंदोलन अनिश्चितकालीन किया जा सकता है।
पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के पूर्व सदस्य एवं अधिवक्ता राजकुमार चौहान ने कहा कि एलएडीसी प्रणाली में सरकार की ओर से चीफ डिफेंस काउंसिल की नियुक्ति से पूरी व्यवस्था सरकारी नियंत्रण में आने की आशंका है। उनका कहना है कि जब अभियोजन पक्ष पहले से ही सरकार का होता है और बचाव पक्ष के वकीलों को भी सरकार वेतन देती है तो निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
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अधिवक्ता बोले, पहले वाले नियम सही थे
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरजीत मंढ़ान और सचिव नवीन कुमार राणा ने कहा कि पहले लीगल एड के तहत पैनल वकीलों का चयन रोटेशन प्रणाली से होता था जिससे नए और युवा अधिवक्ताओं को भी अवसर मिलता था। नई व्यवस्था से काम कुछ चुनिंदा वकीलों तक सीमित होने का खतरा है। पहले वाली पॉलिसी सही थी।
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क्या है एलएडीसी नीति
लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी), राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत लागू व्यवस्था है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को विशेष रूप से आपराधिक मामलों में मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। इस प्रणाली के तहत प्रत्येक जिले में चीफ, डिप्टी और असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल सहित एक समर्पित टीम नियुक्त की जाती है, जिन्हें सरकार नियमित वेतन देती है और वे जरूरतमंद आरोपियों के मुकदमे लड़ते हैं। हालांकि, इसी व्यवस्था को लेकर प्रदेशभर के अधिवक्ता विरोध जता रहे हैं।
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घरौंडा कोर्ट में भी न्यायिक कार्य का बहिष्कार
फोटो संख्या 113
घरौंडा। लीगल एड डिफेंस काउंसिल पॉलिसी के विरोध में जिला बार एसोसिएशन के आह्वान पर मंगलवार को घरौंडा न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। अधिवक्ता कविंद्र त्यागी, अनुज गुप्ता, राहुल बंसल ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सरकार से अधिवक्ताओं की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकालने की अपील की। संवाद
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जिला न्यायालय परिसर के साथ-साथ घरौंडा असंध और इंद्री न्यायिक परिसरों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। बड़ी संख्या में मुकदमों की सुनवाई टलने से वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि हड़ताल के दौरान प्रॉक्सी काउंसिल को छोड़कर कोई भी अधिवक्ता अदालत में पेश नहीं होगा। यदि कोई सदस्य इस निर्णय का उल्लंघन करता है तो उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि 30 जुलाई तक एलएडीसी नीति वापस नहीं ली गई तो आंदोलन अनिश्चितकालीन किया जा सकता है।
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पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के पूर्व सदस्य एवं अधिवक्ता राजकुमार चौहान ने कहा कि एलएडीसी प्रणाली में सरकार की ओर से चीफ डिफेंस काउंसिल की नियुक्ति से पूरी व्यवस्था सरकारी नियंत्रण में आने की आशंका है। उनका कहना है कि जब अभियोजन पक्ष पहले से ही सरकार का होता है और बचाव पक्ष के वकीलों को भी सरकार वेतन देती है तो निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
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अधिवक्ता बोले, पहले वाले नियम सही थे
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरजीत मंढ़ान और सचिव नवीन कुमार राणा ने कहा कि पहले लीगल एड के तहत पैनल वकीलों का चयन रोटेशन प्रणाली से होता था जिससे नए और युवा अधिवक्ताओं को भी अवसर मिलता था। नई व्यवस्था से काम कुछ चुनिंदा वकीलों तक सीमित होने का खतरा है। पहले वाली पॉलिसी सही थी।
क्या है एलएडीसी नीति
लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी), राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत लागू व्यवस्था है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को विशेष रूप से आपराधिक मामलों में मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। इस प्रणाली के तहत प्रत्येक जिले में चीफ, डिप्टी और असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल सहित एक समर्पित टीम नियुक्त की जाती है, जिन्हें सरकार नियमित वेतन देती है और वे जरूरतमंद आरोपियों के मुकदमे लड़ते हैं। हालांकि, इसी व्यवस्था को लेकर प्रदेशभर के अधिवक्ता विरोध जता रहे हैं।
घरौंडा कोर्ट में भी न्यायिक कार्य का बहिष्कार
फोटो संख्या 113
घरौंडा। लीगल एड डिफेंस काउंसिल पॉलिसी के विरोध में जिला बार एसोसिएशन के आह्वान पर मंगलवार को घरौंडा न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। अधिवक्ता कविंद्र त्यागी, अनुज गुप्ता, राहुल बंसल ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सरकार से अधिवक्ताओं की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकालने की अपील की। संवाद