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Karnal News: 62 बसें हटने से लोकल रूट प्रभावित, घंटों इंतजार करते रहे यात्री

Fri, 31 Jul 2026 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Fri, 31 Jul 2026 01:29 AM IST
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Local routes affected by the withdrawal of 62 buses; passengers left waiting for hours.
 पुराने बस स्टैंड पर कम ही दिखी बसें। संवाद
करनाल। कुटेल में वन महोत्सव में करनाल से रोडवेज की 62 बसों को लोगों और विद्यार्थियों के पहुंचाने के लिए लगाया गया था। 240 में से 62 बसों को सामान्य मार्ग से हटाकर भेजा गया। इसके कारण करनाल के कई लोकल मार्ग ठप हो गए। अन्य जिलों व करनाल में स्थानीय मार्गों पर भी बसें न होने से यात्रियों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा।
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सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र, अस्पताल जाने वाले मरीज और नौकरीपेशा लोगों को आई, जिन्हें घंटों बसों का इंतजार करते रहे। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें दो से तीन घंटे तक खड़ा रहना पड़ा है लेकिन लोकल रूट की बसें समय पर उपलब्ध नहीं हुईं। सबसे अधिक असर असंध, घरौंडा, इंद्री, निसिंग, तरावड़ी, घोघड़ीपुर, उचाना और नीलोखेड़ी मार्गों पर देखने को मिला। कई गांवों में तो बस सेवा लगभग ठप रही।
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महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बस अड्डे पर अव्यवस्था का आलम यह था कि पूछताछ काउंटर पर भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही थी। कई लोग निजी वाहनों या महंगे ऑटो का सहारा लेने को मजबूर हुए। प्रशासन की ओर से दावा किया गया कि यह अस्थायी व्यवस्था थी और विशेष प्रबंध किए गए थे। रोडवेज के जीएम कुलदीप सिंह ने कहा कि मुख्य मार्गों पर यातायात सुचारु रखने का प्रयास किया गया और कुछ वैकल्पिक बसें चलाई गईं। दूसरे जिलों की बसों ने भी अतिरिक्त फेरे लगाए।
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दिल्ली-चंडीगढ़ मार्ग पर बढ़ा इंतजार
करनाल से दिल्ली और चंडीगढ़ के लिए भी हर 10 मिनट में एक बस है लेकिन सभी डिपो से बसें आरक्षित होने के कारण इन मार्गों पर भी लोगों को 20 से लेकर 30 मिनट तक का इंतजार करना पड़ा। नए बस अड्डे पर भी बसों का ठहराव कम हुआ।

किसी को पौने घंटे बाद निजी बस मिली तो ऑटो से गया
- मूनक के जयकिशन ने बताया कि उनका रोडवेज बस में आधा किराया लगता है लेकिन पौने घंटे से वह रोडवेज बस का इंतजार कर रहे थे लेकिन बस नहीं आई। बाद में एक निजी बस आई तो उसमें भी काफी भीड़ थी। चढ़ने में काफी परेशानी हुई।


- गोंदर के शंभू ने बताया कि उन्हें एक घंटे तक भी बस अड्डे पर गांव के लिए बस नहीं मिली। इसके बाद उन्हें मजबूरन ऑटो रिक्शा पकड़ना पड़ा। ऑटो चालक भी मनमर्जी का किराया वसूलते हैं।
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