{"_id":"697538f55d6e4e4ffb00fac3","slug":"patients-are-not-responsible-for-errors-in-hospital-records-karnal-news-c-18-knl1018-831249-2026-01-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: अस्पताल में रिकॉर्ड में गलती के लिए मरीज जिम्मेदार नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: अस्पताल में रिकॉर्ड में गलती के लिए मरीज जिम्मेदार नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 25 Jan 2026 02:56 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
करनाल।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से फर्जी दस्तावेजों का हवाला देकर दावा खारिज करने को सेवा में कोताही माना है। आयोग ने इफको टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को शिकायतकर्ता को 45 हजार रुपये के चिकित्सा बिलों का भुगतान नौ प्रतिशत ब्याज के साथ करने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये और अदालती खर्च के 11 हजार रुपये अतिरिक्त देने के निर्देश दिए हैं।
इंद्री तहसील के बदरपुर गांव निवासी विनोद कुमार ने पत्नी मोनिका के बीमार होने के बाद इलाज पर आए खर्च के लिए बीमा कंपनी के पास क्लेम फाइल किया था। पत्नी को दिसंबर, 2022 में तेज बुखार और पेट दर्द के कारण करनाल के निजी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज पर कुल 45 हजार रुपये खर्च हुए। विनोद ने क्लेम के लिए आवेदन किया तो बीमा कंपनी ने 29 मार्च, 2023 को खारिज कर दिया। तर्क दिया कि अस्पताल के दस्तावेज फर्जी हैं और लैब रिपोर्ट पर जिस डॉक्टर के हस्ताक्षर हैं, वह वहां कार्यरत ही नहीं है।
बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर ने कहा कि कंपनी ने जिस जांच रिपोर्ट के आधार पर क्लेम खारिज किया, वह केवल एक फोटोकॉपी थी। जांच करने वाले अधिकारी का हलफनामा भी पेश नहीं किया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि अस्पताल के रिकॉर्ड या डॉक्टर की जानकारी में कोई विसंगति है तो उसके लिए शिकायतकर्ता (मरीज) को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
45 दिन में करना होगा राशि का भुगतान
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर पूरी राशि का भुगतान करे। अगर कंपनी समय पर भुगतान नहीं करती तो उसे ब्याज और हर्जाने की राशि समेत पूरी पेनल्टी भरनी होगी। मामले पर सुनवाई करते हुए आयोग ने टिप्पणी की कि बीमा कंपनियां प्रीमियम लेते समय बड़े-बड़े वादे करती हैं, लेकिन क्लेम देने के समय तकनीकी खामियां निकालकर पीछे हट जाती हैं, जोकि अनुचित व्यापार व्यवहार है। कंपनियों को प्रीमियम लेकर ऐसा नहीं करना चाहिए।
Trending Videos
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से फर्जी दस्तावेजों का हवाला देकर दावा खारिज करने को सेवा में कोताही माना है। आयोग ने इफको टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को शिकायतकर्ता को 45 हजार रुपये के चिकित्सा बिलों का भुगतान नौ प्रतिशत ब्याज के साथ करने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये और अदालती खर्च के 11 हजार रुपये अतिरिक्त देने के निर्देश दिए हैं।
इंद्री तहसील के बदरपुर गांव निवासी विनोद कुमार ने पत्नी मोनिका के बीमार होने के बाद इलाज पर आए खर्च के लिए बीमा कंपनी के पास क्लेम फाइल किया था। पत्नी को दिसंबर, 2022 में तेज बुखार और पेट दर्द के कारण करनाल के निजी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज पर कुल 45 हजार रुपये खर्च हुए। विनोद ने क्लेम के लिए आवेदन किया तो बीमा कंपनी ने 29 मार्च, 2023 को खारिज कर दिया। तर्क दिया कि अस्पताल के दस्तावेज फर्जी हैं और लैब रिपोर्ट पर जिस डॉक्टर के हस्ताक्षर हैं, वह वहां कार्यरत ही नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर ने कहा कि कंपनी ने जिस जांच रिपोर्ट के आधार पर क्लेम खारिज किया, वह केवल एक फोटोकॉपी थी। जांच करने वाले अधिकारी का हलफनामा भी पेश नहीं किया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि अस्पताल के रिकॉर्ड या डॉक्टर की जानकारी में कोई विसंगति है तो उसके लिए शिकायतकर्ता (मरीज) को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
45 दिन में करना होगा राशि का भुगतान
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर पूरी राशि का भुगतान करे। अगर कंपनी समय पर भुगतान नहीं करती तो उसे ब्याज और हर्जाने की राशि समेत पूरी पेनल्टी भरनी होगी। मामले पर सुनवाई करते हुए आयोग ने टिप्पणी की कि बीमा कंपनियां प्रीमियम लेते समय बड़े-बड़े वादे करती हैं, लेकिन क्लेम देने के समय तकनीकी खामियां निकालकर पीछे हट जाती हैं, जोकि अनुचित व्यापार व्यवहार है। कंपनियों को प्रीमियम लेकर ऐसा नहीं करना चाहिए।