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Karnal News: दवा की तलाश में तपे लोग… पांच घंटे तक बंद मेडिकल स्टोर से अटकीं रहीं सांसें
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कल्पना चावला मेडिकल काॅलेज के सामने खुली दवा की दुकानें। संवाद
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राम सारस्वत
करनाल। जिले में बुधवार सुबह दवा खरीदने निकले मरीजों और उनके परिजनों के लिए दिन भारी परेशानी भरा रहा। ई-फार्मेसी और सरकारी नोटिफिकेशन के विरोध में मेडिकल स्टोर संचालकों की हड़ताल के चलते सुबह से शहर और कस्बों के अधिकांश निजी मेडिकल स्टोर बंद रहे। गर्मी और उमस के बीच पांच घंटों तक दवा की तलाश में मरीज भटकते रहे। दोपहर बाद जैसे ही मेडिकल स्टोर खुले तो एकदम वहां भीड़ जुटना शुरू हो गई।
इससे पहले दवा लेने पहुंचे मरीज घंटों तक एक दुकान से दूसरी दुकान भटकते रहे लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने मरीजों की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए दोपहर 12 बजे के बाद शहरी क्षेत्र के मेडिकल स्टोर खोलने की अनुमति दे दी गई। हालांकि कस्बों में अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद ही रहे जिससे वहां लोगों की दिक्कतें कम नहीं हुई।
सुबह कुछ स्टोर संचालकों ने शटर खोल लिए थे, जिन्हें एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ताला लगवाया। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर जिले के करीब तीन हजार निजी मेडिकल स्टोर संचालकों ने हड़ताल में भाग लिया। सबसे अधिक असर उन मरीजों पर पड़ा जो रोजाना दवाओं पर निर्भर हैं। कई बुजुर्ग मरीज, शुगर और बीपी के रोगी, छोटे बच्चों के अभिभावक और इमरजेंसी मरीज घंटों तक परेशान होते रहे।
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अस्पतालों में बढ़ी भीड़, मरीजों की बढ़ी बेचैनी
मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण सिविल अस्पताल और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में अधिक दिखाई दी। लोग उम्मीद लेकर जनऔषधि केंद्रों और अस्पताल परिसर में संचालित दवा दुकानों पर दवा लेने पहुंचे। कई जगह राहत मिली तो कहीं दवाएं न होने पर मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी।
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इसलिए हड़ताल पर उतरे कैमिस्ट
कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिला उपप्रधान रजत खन्ना ने बताया कि संगठन ई-फार्मेसी और दो सरकारी नोटिफिकेशन जीएसआर 220(ई) और जीएसआर 817(ई) का विरोध कर रहा है। ऑनलाइन दवा कंपनियां 20 से 60 प्रतिशत तक छूट देकर बाजार को प्रभावित कर रही हैं, जिससे छोटे मेडिकल स्टोरों का कारोबार लगातार घट रहा है। आरोप है कि ई-फार्मेसी कंपनियों के कारण दुकानदार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। अब कारोबार आधा रह गया है।
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बोले, दवा कोई सामान्य वस्तु नहीं
हड़ताल कर रहे मेडिकल स्टोर संचालक रोहित, रमिंदर, दीपक का कहना है कि दवा कोई सामान्य उत्पाद नहीं है जिसे बिना निगरानी के ऑनलाइन बेचा जाए। उनका कहना है कि नया सिस्टम ऐसा होना चाहिए जिसमें डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की जांच, केमिस्ट और डॉक्टर का पंजीकरण व दवा वितरण की स्पष्ट मॉनिटरिंग हो। इससे मरीजों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और गलत दवाओं की बिक्री पर रोक लगेगी।
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मरीजों की दिक्कत
- विरोध अपनी जगह सही हो सकता है लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी हड़ताल का असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है। जरूरी सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए। - शीला देवी, मरीज
- सुबह से दवाएं लेने के लिए भटक रहे थे। दोपहर बाद जब मेडिकल स्टोर खुले तब जाकर थोड़ी राहत मिली। भीषण गर्मी में कई मेडिकल स्टोर ढूंढे कोई खुला नहीं मिला। - मारुति देवी, मरीज
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करनाल। जिले में बुधवार सुबह दवा खरीदने निकले मरीजों और उनके परिजनों के लिए दिन भारी परेशानी भरा रहा। ई-फार्मेसी और सरकारी नोटिफिकेशन के विरोध में मेडिकल स्टोर संचालकों की हड़ताल के चलते सुबह से शहर और कस्बों के अधिकांश निजी मेडिकल स्टोर बंद रहे। गर्मी और उमस के बीच पांच घंटों तक दवा की तलाश में मरीज भटकते रहे। दोपहर बाद जैसे ही मेडिकल स्टोर खुले तो एकदम वहां भीड़ जुटना शुरू हो गई।
इससे पहले दवा लेने पहुंचे मरीज घंटों तक एक दुकान से दूसरी दुकान भटकते रहे लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने मरीजों की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए दोपहर 12 बजे के बाद शहरी क्षेत्र के मेडिकल स्टोर खोलने की अनुमति दे दी गई। हालांकि कस्बों में अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद ही रहे जिससे वहां लोगों की दिक्कतें कम नहीं हुई।
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सुबह कुछ स्टोर संचालकों ने शटर खोल लिए थे, जिन्हें एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ताला लगवाया। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर जिले के करीब तीन हजार निजी मेडिकल स्टोर संचालकों ने हड़ताल में भाग लिया। सबसे अधिक असर उन मरीजों पर पड़ा जो रोजाना दवाओं पर निर्भर हैं। कई बुजुर्ग मरीज, शुगर और बीपी के रोगी, छोटे बच्चों के अभिभावक और इमरजेंसी मरीज घंटों तक परेशान होते रहे।
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अस्पतालों में बढ़ी भीड़, मरीजों की बढ़ी बेचैनी
मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण सिविल अस्पताल और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में अधिक दिखाई दी। लोग उम्मीद लेकर जनऔषधि केंद्रों और अस्पताल परिसर में संचालित दवा दुकानों पर दवा लेने पहुंचे। कई जगह राहत मिली तो कहीं दवाएं न होने पर मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी।
इसलिए हड़ताल पर उतरे कैमिस्ट
कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिला उपप्रधान रजत खन्ना ने बताया कि संगठन ई-फार्मेसी और दो सरकारी नोटिफिकेशन जीएसआर 220(ई) और जीएसआर 817(ई) का विरोध कर रहा है। ऑनलाइन दवा कंपनियां 20 से 60 प्रतिशत तक छूट देकर बाजार को प्रभावित कर रही हैं, जिससे छोटे मेडिकल स्टोरों का कारोबार लगातार घट रहा है। आरोप है कि ई-फार्मेसी कंपनियों के कारण दुकानदार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। अब कारोबार आधा रह गया है।
बोले, दवा कोई सामान्य वस्तु नहीं
हड़ताल कर रहे मेडिकल स्टोर संचालक रोहित, रमिंदर, दीपक का कहना है कि दवा कोई सामान्य उत्पाद नहीं है जिसे बिना निगरानी के ऑनलाइन बेचा जाए। उनका कहना है कि नया सिस्टम ऐसा होना चाहिए जिसमें डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की जांच, केमिस्ट और डॉक्टर का पंजीकरण व दवा वितरण की स्पष्ट मॉनिटरिंग हो। इससे मरीजों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और गलत दवाओं की बिक्री पर रोक लगेगी।
मरीजों की दिक्कत
- विरोध अपनी जगह सही हो सकता है लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी हड़ताल का असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है। जरूरी सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए। - शीला देवी, मरीज
- सुबह से दवाएं लेने के लिए भटक रहे थे। दोपहर बाद जब मेडिकल स्टोर खुले तब जाकर थोड़ी राहत मिली। भीषण गर्मी में कई मेडिकल स्टोर ढूंढे कोई खुला नहीं मिला। - मारुति देवी, मरीज

कल्पना चावला मेडिकल काॅलेज के सामने खुली दवा की दुकानें। संवाद