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Karnal News: सरकारी जगह पर काटे प्लॉट, प्रशासनिक टीम ने शुरू की जांच
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। श्री महालक्ष्मी बिल्डर की डीआरपी एन्क्लेव, डीआरपी अनिल आंगन और स्वर्णभूमि कॉलोनी में रास्ते और पार्क की जगह के अलावा सरकारी जमीन पर प्लॉट काटकर बेचने के मामले में प्रशासनिक जांच शुरू हो गई है। सोमवार को शहरी स्थानीय निकाय के आदेश पर नगर निगम के संयुक्त आयुक्त विनोद मेहरा के नेतृत्व में टीम ने मौका मुआयना किया। लोगों से भी बातचीत करके आरोपों पर उनका पक्ष लिया। लोगों ने टीम को बताया कि कॉलोनाइजर ने उनके साथ धोखाधड़ी की है।
मामला 16 फरवरी को जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी आया था। सुनवाई के दौरान बैठक की अध्यक्षता कर रहे मंत्री रणबीर गंगवा ने कॉलोनाइजर पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसी आधार पर 26 फरवरी को सेक्टर-36 डीआरपी एन्क्लेव के निवासी रणदीप लाठर, जितेंद्र और अन्य लोगों की शिकायत पर कॉलोनाइजर समेत 19 लोगों पर केस दर्ज किया गया था। मामले में पुलिस की ओर से अलग से जांच की जा रही है।
सोमवार को हुई प्रशासनिक जांच विधायक जगमोहन आनंद और निगम आयुक्त वैशाली शर्मा को लिखे गए पत्र के आधार पर हुई है। टीम में एटीपी प्रवेश शर्मा, नायब तहसीलदार वीरेंदर सिंह, कानूनगो सुरेश कुमार, नगर सुधार मंडल के जेई और सर्वेयर शामिल रहे।
पूछताछ के दौरान स्थानीय लोगों ने डीआरपी कॉलोनी के रास्ते बंद करके प्लॉट बेचने, सरकारी जमीन बेचने, कई प्लॉटों की डबल सेल, रजिस्ट्री किसी खेवट से और कब्जा अन्य खेवट में देने का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता सतबीर पूनिया और अन्यों ने यह भी मांग की कि फर्म ने कितने क्षेत्र में कॉलोनी काटने का लाइसेंस सरकार से लिया था और कितने क्षेत्र पर प्रोजेक्ट्स निर्मित है, इसकी भी जांच की जाए।
डीटीपी की रिपोर्ट में भी हुई थी कब्जे की पुष्टि
बैठक में मंत्री ने डीटीपी गुंजन वर्मा से भी इस मामले में रिपोर्ट मांगी थी तो उन्होंने बताया कि गलियां बंद हैं, पार्क की जगह प्लॉट बेचे गए हैं। कॉलोनी का कुछ हिस्सा अभी भी अवैध क्षेत्र में आता है। लाइसेंस कॉलोनी का रास्ता बंद किया गया है। जो नए प्लॉट बने हैं, वह प्लान में नहीं थे। इसके बाद मंत्री ने उपायुक्त से मामले में जांच करके कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
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करनाल। श्री महालक्ष्मी बिल्डर की डीआरपी एन्क्लेव, डीआरपी अनिल आंगन और स्वर्णभूमि कॉलोनी में रास्ते और पार्क की जगह के अलावा सरकारी जमीन पर प्लॉट काटकर बेचने के मामले में प्रशासनिक जांच शुरू हो गई है। सोमवार को शहरी स्थानीय निकाय के आदेश पर नगर निगम के संयुक्त आयुक्त विनोद मेहरा के नेतृत्व में टीम ने मौका मुआयना किया। लोगों से भी बातचीत करके आरोपों पर उनका पक्ष लिया। लोगों ने टीम को बताया कि कॉलोनाइजर ने उनके साथ धोखाधड़ी की है।
मामला 16 फरवरी को जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी आया था। सुनवाई के दौरान बैठक की अध्यक्षता कर रहे मंत्री रणबीर गंगवा ने कॉलोनाइजर पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसी आधार पर 26 फरवरी को सेक्टर-36 डीआरपी एन्क्लेव के निवासी रणदीप लाठर, जितेंद्र और अन्य लोगों की शिकायत पर कॉलोनाइजर समेत 19 लोगों पर केस दर्ज किया गया था। मामले में पुलिस की ओर से अलग से जांच की जा रही है।
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सोमवार को हुई प्रशासनिक जांच विधायक जगमोहन आनंद और निगम आयुक्त वैशाली शर्मा को लिखे गए पत्र के आधार पर हुई है। टीम में एटीपी प्रवेश शर्मा, नायब तहसीलदार वीरेंदर सिंह, कानूनगो सुरेश कुमार, नगर सुधार मंडल के जेई और सर्वेयर शामिल रहे।
पूछताछ के दौरान स्थानीय लोगों ने डीआरपी कॉलोनी के रास्ते बंद करके प्लॉट बेचने, सरकारी जमीन बेचने, कई प्लॉटों की डबल सेल, रजिस्ट्री किसी खेवट से और कब्जा अन्य खेवट में देने का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता सतबीर पूनिया और अन्यों ने यह भी मांग की कि फर्म ने कितने क्षेत्र में कॉलोनी काटने का लाइसेंस सरकार से लिया था और कितने क्षेत्र पर प्रोजेक्ट्स निर्मित है, इसकी भी जांच की जाए।
डीटीपी की रिपोर्ट में भी हुई थी कब्जे की पुष्टि
बैठक में मंत्री ने डीटीपी गुंजन वर्मा से भी इस मामले में रिपोर्ट मांगी थी तो उन्होंने बताया कि गलियां बंद हैं, पार्क की जगह प्लॉट बेचे गए हैं। कॉलोनी का कुछ हिस्सा अभी भी अवैध क्षेत्र में आता है। लाइसेंस कॉलोनी का रास्ता बंद किया गया है। जो नए प्लॉट बने हैं, वह प्लान में नहीं थे। इसके बाद मंत्री ने उपायुक्त से मामले में जांच करके कार्रवाई के निर्देश दिए थे।