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Karnal News: जमीनी विवाद में फंसी 15 हजार लोगों की राहत
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निर्माण शुरू होने के बाद कोर्ट के स्टे आने के बाद से बंद पड़ा उपकेंद्र का कार्य। संवाद
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राजेन्द्र राणा
जुंडला। नरूखेड़ी के लोगों को बेहतर बिजली आपूर्ति देने के लिए प्रस्तावित उपकेंद्र की राह जमीन के विवाद में अटक गई है। मार्च, 2025 में निर्देश जारी होने के करीब 17 महीने बाद भी उपकेंद्र का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। इसका असर करीब 15 हजार की आबादी पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में रोजाना बिजली कट लगते हैं। गर्मी में ओवरलोड के कारण परेशानी और बढ़ जाती है।
प्रस्तावित उपकेंद्र शुरू होने के बाद शुरुआत में पांच फीडरों को इससे जोड़ा जाना था। इससे बढ़ौता और जुंडला उपकेंद्रों पर पड़ रहा भार कम होता और नरूखेड़ी क्षेत्र को अलग बिजली आपूर्ति व्यवस्था मिलती। फिलहाल नरूखेड़ी समेत अन्य इलाकों की बिजली आपूर्ति बढ़ौता और जुंडला उपकेंद्रों से ही चल रही है।
बिजली निगम ने नरूखेड़ी में नया उपकेंद्र बनाने की योजना तैयार की थी। इसके लिए मार्च, 2025 में कार्यादेश जारी किया गया। योजना का उद्देश्य मौजूदा बिजली नेटवर्क पर निर्भरता कम करना और आसपास के क्षेत्र को अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध कराना था।
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उपकेंद्र के लिए पंचायत से ली गई जमीन पर विवाद खड़ा हो गया। मामला हाईकोर्ट में है। निर्माण पर स्टे है। मामले में 25 अगस्त को हाईकोर्ट में तारीख है। संवाद
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पंचायत का दावा- जमीन मौके पर जोहड़ नहीं
सरपंच विकास के अनुसार, जिस जमीन पर उपकेंद्र बनाया जाना प्रस्तावित है, वह पंचायती जमीन है। इसके पास थोड़ी जमीन ऐसी जरूर है जो सरकारी रिकॉर्ड में जोहड़ के रूप में दर्ज है लेकिन मौके पर वहां जोहड़ नहीं है। रिकॉर्ड में दर्ज जमीन और मौके की वास्तविक स्थिति अलग है। इसी जमीन पर विवाद है।
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पांच फीडर जुड़ते तो कम होता दो उपकेंद्रों का भार
प्रस्तावित उपकेंद्र के शुरू होने से शुरुआत में पांच फीडरों को इससे जोड़े जाने की योजना थी। इसका सीधा फायदा यह होता कि नरूखेड़ी क्षेत्र की बिजली आपूर्ति का बड़ा हिस्सा अलग उपकेंद्र से संचालित हो जाता। बढ़ौता और जुंडला उपकेंद्रों पर पड़ने वाला भार कम होता। परियोजना अटकने के कारण अभी भी इन्हीं दोनों उपकेंद्रों से क्षेत्र की आपूर्ति हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है
रोजाना बिजली के कट लगते हैं। कई बार जरूरत के समय बिजली चली जाती है। नया उपकेंद्र बन जाता तो परेशानी कम होती। - विकास, सरपंच
गर्मी में लोड बढ़ते ही बिजली की समस्या और ज्यादा हो जाती है। बिजली गुल रहती है। घरों में बच्चे और बुजुर्ग परेशान होते हैं। - महाबीर, ग्रामीण
जमीन के विवाद के कारण उपकेंद्र के निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ। हमें तो रोज बिजली की परेशानी झेलनी पड़ रही है। - बलकार सिंह, ग्रामीण
बिजली कटने से घरों का काम प्रभावित होता है। अगर नया उपकेंद्र शुरू हो जाए तो लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। - नीरज, ग्रामीण
बिजली निगम ने पंचायत से जमीन ली थी। जिस जमीन पर निर्माण होना है उसके पास की जमीन के एक व्यक्ति ने कोर्ट के माध्यम से स्टे लिया हुआ है। न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही इसका निर्माण शुरू हो पाएगा। - नसीब सिंह, अधीक्षक अभियंता, बिजली निगम
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जुंडला। नरूखेड़ी के लोगों को बेहतर बिजली आपूर्ति देने के लिए प्रस्तावित उपकेंद्र की राह जमीन के विवाद में अटक गई है। मार्च, 2025 में निर्देश जारी होने के करीब 17 महीने बाद भी उपकेंद्र का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। इसका असर करीब 15 हजार की आबादी पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में रोजाना बिजली कट लगते हैं। गर्मी में ओवरलोड के कारण परेशानी और बढ़ जाती है।
प्रस्तावित उपकेंद्र शुरू होने के बाद शुरुआत में पांच फीडरों को इससे जोड़ा जाना था। इससे बढ़ौता और जुंडला उपकेंद्रों पर पड़ रहा भार कम होता और नरूखेड़ी क्षेत्र को अलग बिजली आपूर्ति व्यवस्था मिलती। फिलहाल नरूखेड़ी समेत अन्य इलाकों की बिजली आपूर्ति बढ़ौता और जुंडला उपकेंद्रों से ही चल रही है।
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बिजली निगम ने नरूखेड़ी में नया उपकेंद्र बनाने की योजना तैयार की थी। इसके लिए मार्च, 2025 में कार्यादेश जारी किया गया। योजना का उद्देश्य मौजूदा बिजली नेटवर्क पर निर्भरता कम करना और आसपास के क्षेत्र को अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध कराना था।
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उपकेंद्र के लिए पंचायत से ली गई जमीन पर विवाद खड़ा हो गया। मामला हाईकोर्ट में है। निर्माण पर स्टे है। मामले में 25 अगस्त को हाईकोर्ट में तारीख है। संवाद
पंचायत का दावा- जमीन मौके पर जोहड़ नहीं
सरपंच विकास के अनुसार, जिस जमीन पर उपकेंद्र बनाया जाना प्रस्तावित है, वह पंचायती जमीन है। इसके पास थोड़ी जमीन ऐसी जरूर है जो सरकारी रिकॉर्ड में जोहड़ के रूप में दर्ज है लेकिन मौके पर वहां जोहड़ नहीं है। रिकॉर्ड में दर्ज जमीन और मौके की वास्तविक स्थिति अलग है। इसी जमीन पर विवाद है।
पांच फीडर जुड़ते तो कम होता दो उपकेंद्रों का भार
प्रस्तावित उपकेंद्र के शुरू होने से शुरुआत में पांच फीडरों को इससे जोड़े जाने की योजना थी। इसका सीधा फायदा यह होता कि नरूखेड़ी क्षेत्र की बिजली आपूर्ति का बड़ा हिस्सा अलग उपकेंद्र से संचालित हो जाता। बढ़ौता और जुंडला उपकेंद्रों पर पड़ने वाला भार कम होता। परियोजना अटकने के कारण अभी भी इन्हीं दोनों उपकेंद्रों से क्षेत्र की आपूर्ति हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है
रोजाना बिजली के कट लगते हैं। कई बार जरूरत के समय बिजली चली जाती है। नया उपकेंद्र बन जाता तो परेशानी कम होती। - विकास, सरपंच
गर्मी में लोड बढ़ते ही बिजली की समस्या और ज्यादा हो जाती है। बिजली गुल रहती है। घरों में बच्चे और बुजुर्ग परेशान होते हैं। - महाबीर, ग्रामीण
जमीन के विवाद के कारण उपकेंद्र के निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ। हमें तो रोज बिजली की परेशानी झेलनी पड़ रही है। - बलकार सिंह, ग्रामीण
बिजली कटने से घरों का काम प्रभावित होता है। अगर नया उपकेंद्र शुरू हो जाए तो लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। - नीरज, ग्रामीण
बिजली निगम ने पंचायत से जमीन ली थी। जिस जमीन पर निर्माण होना है उसके पास की जमीन के एक व्यक्ति ने कोर्ट के माध्यम से स्टे लिया हुआ है। न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही इसका निर्माण शुरू हो पाएगा। - नसीब सिंह, अधीक्षक अभियंता, बिजली निगम