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Karnal News: एक प्रतिशत पर काम करने में आढ़ती जताने लगे असमर्थता
Thu, 21 May 2026 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 21 May 2026 01:07 AM IST
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शाहाबाद। बैठक में हिस्सा लेते हुए आढ़ती। स्वयं
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शाहाबाद। अनाज मंडी की दोनों एसोसिएशन के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक मंडी परिसर में हुई। प्रधान स्वर्णजीत सिंह बिट्टू कालड़ा व प्रधान धनपत राय अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सूरजमुखी के सीजन में वर्तमान आढ़तियों को सरकार से मिल रही एक प्रतिशत आढ़त और उसके विपरीत फसल पर होने वाले आढ़ती के वास्तविक खर्च पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
जानकारी देते हुए मंडी प्रधान स्वर्णजीत सिंह बिट्टू कालड़ा ने बताया कि सरकार की तरफ से आढ़ती को आढ़त के रूप में एक प्रतिशत अनुसार 77.21 रुपए प्रति क्विंटल मिलता है लेकिन इसकी एवज में आढ़ती सूरजमुखी को तोलने के बाद प्लॉट में तो छोड़ नहीं सकता। आढ़ती को पांच रुपए प्रति कट्टा स्टैग लगाने का देना पड़ता है। इसके बाद जब माल का 48 घंटे में उठान नहीं होता तो आढ़तियों को माल उठाने के लिए ट्रांसपोर्टर को भी पांच रुपए प्रति कट्टा अधिक देना पड़ता है। उस पर भी जब तक ट्रक डंपिंग पॉइंट पर पहुंचता है तो उसमें 200 ग्राम प्रति क्विंटल के हिसाब से वजन में कमी आ जाती है, जो की छह रुपए प्रति क्विंटल के करीब होती है।
प्रधान धनपत राय अग्रवाल ने कहा कि उपरोक्त तमाम खर्चों को यदि जोड़ लिया जाए तो आढ़ती को मिलने वाले आढ़त के 77.21 रुपए से 25 से 30 रुपए तो खर्च ही अधिक बैठता है। ऐसे में आढ़त विशुद्ध रूप से घाटे का व्यापार बनकर रह गया है। बिट्टू कालड़ा व धनपत राय अग्रवाल ने कहा कि एक प्रतिशत आढ़त पर काम करने में आढ़ती वास्तव में असमर्थ हैं। उन्होंने सरकार से आढ़त को एक प्रतिशत से बढ़ा कर 2.5 प्रतिशत करने की पुरजोर मांग की। इस अवसर पर त्रिलोचन सिंह हांडा, यशपाल सिंगला, त्रिलोक चंद सिंगला, दीपक सिंघल, संजय गुप्ता, प्रवीण गर्ग, सरबजीत सिंह, यशपाल सेठी, अजय गर्ग, रघुवीर बंसल, प्रवीण गाबा, पवन गौतम, गुरचरण सिंह, अशोक गुप्ता सतपाल एवं कंवलजीत उपस्थित थे।
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जानकारी देते हुए मंडी प्रधान स्वर्णजीत सिंह बिट्टू कालड़ा ने बताया कि सरकार की तरफ से आढ़ती को आढ़त के रूप में एक प्रतिशत अनुसार 77.21 रुपए प्रति क्विंटल मिलता है लेकिन इसकी एवज में आढ़ती सूरजमुखी को तोलने के बाद प्लॉट में तो छोड़ नहीं सकता। आढ़ती को पांच रुपए प्रति कट्टा स्टैग लगाने का देना पड़ता है। इसके बाद जब माल का 48 घंटे में उठान नहीं होता तो आढ़तियों को माल उठाने के लिए ट्रांसपोर्टर को भी पांच रुपए प्रति कट्टा अधिक देना पड़ता है। उस पर भी जब तक ट्रक डंपिंग पॉइंट पर पहुंचता है तो उसमें 200 ग्राम प्रति क्विंटल के हिसाब से वजन में कमी आ जाती है, जो की छह रुपए प्रति क्विंटल के करीब होती है।
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प्रधान धनपत राय अग्रवाल ने कहा कि उपरोक्त तमाम खर्चों को यदि जोड़ लिया जाए तो आढ़ती को मिलने वाले आढ़त के 77.21 रुपए से 25 से 30 रुपए तो खर्च ही अधिक बैठता है। ऐसे में आढ़त विशुद्ध रूप से घाटे का व्यापार बनकर रह गया है। बिट्टू कालड़ा व धनपत राय अग्रवाल ने कहा कि एक प्रतिशत आढ़त पर काम करने में आढ़ती वास्तव में असमर्थ हैं। उन्होंने सरकार से आढ़त को एक प्रतिशत से बढ़ा कर 2.5 प्रतिशत करने की पुरजोर मांग की। इस अवसर पर त्रिलोचन सिंह हांडा, यशपाल सिंगला, त्रिलोक चंद सिंगला, दीपक सिंघल, संजय गुप्ता, प्रवीण गर्ग, सरबजीत सिंह, यशपाल सेठी, अजय गर्ग, रघुवीर बंसल, प्रवीण गाबा, पवन गौतम, गुरचरण सिंह, अशोक गुप्ता सतपाल एवं कंवलजीत उपस्थित थे।
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शाहाबाद। बैठक में हिस्सा लेते हुए आढ़ती। स्वयं