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Karnal News: यशिका ने सुलझाई मंगल पर इंसानों की बस्ती की चुनौती
Thu, 20 Aug 2026 02:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 20 Aug 2026 02:43 AM IST
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नासा में चयनित होने पर प्रमाण पत्र दिखाती यशिका स्वयं
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। 11वीं कक्षा की छात्रा यशिका मैहला ने अमेरिका में यूनाइटेड स्पेस स्कूल के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में हिस्सा लिया। भारत से चयनित यशिका ने दुनिया के 35 देशों के विद्यार्थियों के साथ काम किया। उन्होंने मंगल ग्रह पर मानव सभ्यता और आवास की संभावनाओं पर प्रोजेक्ट तैयार किया।
यह कार्यक्रम करीब 15 दिन चला, जिसमें विद्यार्थियों को अंतरिक्ष मिशन से जुड़े प्रोजेक्ट दिए गए। यशिका को सभ्यता एवं मंगल ग्रह पर आवास से जुड़ी भूमिका मिली थी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टीम के साथ मिलकर मंगल मिशन की चुनौतियों को समझा। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में यशिका ने अपने प्रोजेक्ट पर काम किया।
यूनाइटेड स्पेस स्कूल का यह कार्यक्रम करीब 29 वर्षों से आयोजित हो रहा है। इसमें 15 से 19 वर्ष की आयु के विद्यार्थी भाग लेते हैं। यशिका को ग्रीन टीम में शामिल किया गया था। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान पर विशेषज्ञों के व्याख्यान भी मिले। यशिका के लिए अलग-अलग देशों के विद्यार्थियों के साथ काम करना एक अनूठा अनुभव रहा। इससे उन्हें अंतरिक्ष मिशन को प्रोजेक्ट और टीमवर्क के स्तर पर समझने का अवसर मिला।
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करनाल। 11वीं कक्षा की छात्रा यशिका मैहला ने अमेरिका में यूनाइटेड स्पेस स्कूल के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में हिस्सा लिया। भारत से चयनित यशिका ने दुनिया के 35 देशों के विद्यार्थियों के साथ काम किया। उन्होंने मंगल ग्रह पर मानव सभ्यता और आवास की संभावनाओं पर प्रोजेक्ट तैयार किया।
यह कार्यक्रम करीब 15 दिन चला, जिसमें विद्यार्थियों को अंतरिक्ष मिशन से जुड़े प्रोजेक्ट दिए गए। यशिका को सभ्यता एवं मंगल ग्रह पर आवास से जुड़ी भूमिका मिली थी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय टीम के साथ मिलकर मंगल मिशन की चुनौतियों को समझा। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में यशिका ने अपने प्रोजेक्ट पर काम किया।
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यूनाइटेड स्पेस स्कूल का यह कार्यक्रम करीब 29 वर्षों से आयोजित हो रहा है। इसमें 15 से 19 वर्ष की आयु के विद्यार्थी भाग लेते हैं। यशिका को ग्रीन टीम में शामिल किया गया था। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान पर विशेषज्ञों के व्याख्यान भी मिले। यशिका के लिए अलग-अलग देशों के विद्यार्थियों के साथ काम करना एक अनूठा अनुभव रहा। इससे उन्हें अंतरिक्ष मिशन को प्रोजेक्ट और टीमवर्क के स्तर पर समझने का अवसर मिला।
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