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Kurukshetra News: राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क और उच्च शिक्षा-समाज संबंध पर की चर्चा
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की ओर से 32वीं आठ दिवसीय ऑनलाइन एनईपी अभिविन्यास और संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके चौथे दिन विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए।
पहले सत्र की मुख्य वक्ता दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र की निदेशक प्रोफेसर मंजुला चौधरी ने राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीएफ) पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की एक क्रांतिकारी पहल बताते हुए कहा कि यह ढांचा स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास के बीच एक मजबूत सेतु का काम करता है।
उन्होंने बताया कि इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य अलग-अलग शिक्षा मार्गों से अर्जित क्रेडिट को एकीकृत कर छात्रों के लिए निर्बाध शैक्षणिक प्रगति का मार्ग बनाना है। यह पहल न केवल विविध सीखने के अनुभवों को मान्यता देती है बल्कि आजीवन सीखने के अवसरों को भी प्रोत्साहित करती है। इससे विद्यार्थी अपने जीवनभर कौशल और ज्ञान को आगे बढ़ाने में सक्षम बनते हैं।
दूसरे सत्र में श्रीनगर के गढ़वाल विश्वविद्यालय के दर्शन विभाग की प्रोफेसर इंदु खंदूरी ने उच्च शिक्षा और समाज के गहरे संबंधों पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि समाज शिक्षा के उद्देश्यों को आकार देता है। वहीं उच्च शिक्षा शिक्षा-व्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करते हुए आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को आगे बढ़ाती है। उन्होंने इन दोनों के बीच पारस्परिक निर्भरता को समझना अत्यंत आवश्यक बताया। इस मौके पर पाठ्यक्रम संयोजक डॉ. अंजू बाला, निदेशक प्रो. प्रीति जैन सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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पहले सत्र की मुख्य वक्ता दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र की निदेशक प्रोफेसर मंजुला चौधरी ने राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीएफ) पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की एक क्रांतिकारी पहल बताते हुए कहा कि यह ढांचा स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास के बीच एक मजबूत सेतु का काम करता है।
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उन्होंने बताया कि इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य अलग-अलग शिक्षा मार्गों से अर्जित क्रेडिट को एकीकृत कर छात्रों के लिए निर्बाध शैक्षणिक प्रगति का मार्ग बनाना है। यह पहल न केवल विविध सीखने के अनुभवों को मान्यता देती है बल्कि आजीवन सीखने के अवसरों को भी प्रोत्साहित करती है। इससे विद्यार्थी अपने जीवनभर कौशल और ज्ञान को आगे बढ़ाने में सक्षम बनते हैं।
दूसरे सत्र में श्रीनगर के गढ़वाल विश्वविद्यालय के दर्शन विभाग की प्रोफेसर इंदु खंदूरी ने उच्च शिक्षा और समाज के गहरे संबंधों पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि समाज शिक्षा के उद्देश्यों को आकार देता है। वहीं उच्च शिक्षा शिक्षा-व्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करते हुए आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को आगे बढ़ाती है। उन्होंने इन दोनों के बीच पारस्परिक निर्भरता को समझना अत्यंत आवश्यक बताया। इस मौके पर पाठ्यक्रम संयोजक डॉ. अंजू बाला, निदेशक प्रो. प्रीति जैन सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।