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Kurukshetra News: सिलाई कर दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं कांता
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कुरुक्षेत्र। सिलाई का कार्य करते हुए कांता देवी। स्वयं
- फोटो : File photo
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कुरुक्षेत्र। कुछ करने व आत्मनिर्भर बन सम्मान से जीने की ठानी तो गांव बढ़ाम की रहने वाली कांता देवी खुद सशक्त होने के साथ-साथ अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई। अब खुद हजारों रुपये हर माह कमा रही है तो वहीं दर्जनों महिलाओं के लिए भी रोजगार के द्वार खोल दिए।
कांता देवी बताती है कि उन्हें कुछ काम करने का उत्साह हुआ तो वर्ष 2024 में कृषि विज्ञान केंद्र में सिलाई व कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया, जिसके बाद पहले अपनी मशीन खरीदी तो साथ ही किसी अन्य महिलाओं के साथ जुड़कर और भी पारंगत होने लगी। कुछ ही दिनों बाद जब कृषि विज्ञान केंद्र की गृह वैज्ञानिक डॉ. ललिता ने हौसला बढ़ाया तो अपने ही घर पर काम शुरू कर दिया।
पहले सिलाई व कढ़ाई करती रही तो बाद में वहीं पर कपड़ा भी रखने लगी, जिसकी बिक्री होने लगी। वह हजारों रुपये कमाकर परिवार का सहारा बन गई। उन्होंने आसपास की दर्जनों महिलाओं के जीवन को भी बदलने की ठानी तो उन्हें भी पारंगत करना शुरू कर दिया। कई महिलाओं को केवीके लेकर गई तो कई को खुद अपने स्तर पर ही सिलाई व कढ़ाई सिखाई। इसके बाद दर्जन भर से ज्यादा महिलाओं ने इसे अपना रोजगार का माध्यम बना लिया। आज वह बेहद संतुष्ट है कि उनकी एक सोच व सकारात्मक कदम से केवीके वैज्ञानिकों के हौसला बढ़ाने से आज इस मुकाम तक पहुंची है। उनका कहना है कि हर महिला को आत्म सम्मान से जीना है तो सशक्त होते हुए अपने रोजगार पर खड़ा ही होना होगा।
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कांता देवी बताती है कि उन्हें कुछ काम करने का उत्साह हुआ तो वर्ष 2024 में कृषि विज्ञान केंद्र में सिलाई व कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया, जिसके बाद पहले अपनी मशीन खरीदी तो साथ ही किसी अन्य महिलाओं के साथ जुड़कर और भी पारंगत होने लगी। कुछ ही दिनों बाद जब कृषि विज्ञान केंद्र की गृह वैज्ञानिक डॉ. ललिता ने हौसला बढ़ाया तो अपने ही घर पर काम शुरू कर दिया।
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पहले सिलाई व कढ़ाई करती रही तो बाद में वहीं पर कपड़ा भी रखने लगी, जिसकी बिक्री होने लगी। वह हजारों रुपये कमाकर परिवार का सहारा बन गई। उन्होंने आसपास की दर्जनों महिलाओं के जीवन को भी बदलने की ठानी तो उन्हें भी पारंगत करना शुरू कर दिया। कई महिलाओं को केवीके लेकर गई तो कई को खुद अपने स्तर पर ही सिलाई व कढ़ाई सिखाई। इसके बाद दर्जन भर से ज्यादा महिलाओं ने इसे अपना रोजगार का माध्यम बना लिया। आज वह बेहद संतुष्ट है कि उनकी एक सोच व सकारात्मक कदम से केवीके वैज्ञानिकों के हौसला बढ़ाने से आज इस मुकाम तक पहुंची है। उनका कहना है कि हर महिला को आत्म सम्मान से जीना है तो सशक्त होते हुए अपने रोजगार पर खड़ा ही होना होगा।