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योजना 100 वर्ष की है तो मानव का निर्माण करें : धुपड़
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कुरुक्षेत्र। श्रीमद्भागवदगीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विकास वर्ग के दौरान विचार रखते शिक्
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कुरुक्षेत्र। श्रीमद्भागवत गीता वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रहे आचार्य विकास वर्ग में विभिन्न बुद्धिजीवियों का आगमन हुआ। एनआईटी निदेशक प्रो. ब्रह्मजीत सिंह, शिक्षा बोर्ड भिवानी के अध्यक्ष शंकर लाल धुपड़ विशेष तौर पर पहुंचे। इसके अलावा अखिल भारतीय विद्या भारती शिक्षा संस्थान के महामंत्री देशराज शर्मा बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए। विजय नड्डा संगठन मंत्री उत्तर क्षेत्र, डॉ. ऋषिराज वशिष्ट अध्यक्ष हिंदू शिक्षा समिति, हरियाणा विद्यालय के अध्यक्ष महेंद्रपाल सिंगला ने भी विचार रखे।
शंकर लाल धुपड़ ने कहा कि विद्यार्थी आचार्य के आचरण से सीखता है। आचार्य का मुख्य लक्ष्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है। बच्चों को उपवास के बारे में बताएं, मोबाइल का उपवास कराएं, पाश्चात्य संस्कृति से बच्चों को दूर रखें, विद्या भारती समाज को भारतीय संस्कृति से परिचित करा रही है, नई शिक्षा नीति का प्रयोग कर रही है। यदि योजना एक वर्ष की है तो फसल लगाएं, 10 वर्ष की है तो पेड़ लगाएं और 100 वर्ष की है तो मानव का निर्माण करें। देशराज शर्मा ने कहा कि विद्या भारती का परिवार दो करोड़ लोगों से ज्यादा का है।
यहां 40 लाख पूर्व छात्र विद्या भारती से जुड़े हैं। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे छात्र का हर क्षेत्र में निर्माण हो। एनआईटी निदेशक ब्रह्मजीत ने कहा कि शिक्षक समाज का श्रेष्ठ अंग माना जाता है। शिक्षक आचरण से छात्र को शिक्षा सिखाता है। शिक्षक विनम्र है तो छात्र विनम्र होगा। वह ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करेगा, जो जड़ों से जुड़े रहें। हिंदू शिक्षा समिति के उपाध्यक्ष चेतराम शर्मा ने बताया कि 15 दिन से चल रहे आचार्य विकास वर्ग का उद्देश्य ऐसे आचार्य का निर्माण करना है, जो बच्चों का सर्वांगीण विकास कर सके। ऋषि राज ने शिक्षार्थी आचार्य से आह्वान किया कि जो सीखा है, विद्यालय में जाकर प्रारंभ करें। विद्या भारती द्वारा प्रदेश में 250 संस्कार केंद्र खोले गए हैं, जहां पर छात्रों को मुफ्त शिक्षा, मुफ्त किताबें दी जाती हैं। इस अवसर पर श्रीमद्भागवत गीता विद्यालय के प्रबंधक वीरेंद्र वालिया कोषाध्यक्ष रमेश गुलाटी सदस्य जंगबहादुर सिंगला एवं प्रबंध समिति के अन्य सदस्य, पूर्व छात्र, विभिन्न विद्यालयों की प्रबंध समिति, विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्य, आचार्य एवं अभिभावक मौजूद रहे।
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शंकर लाल धुपड़ ने कहा कि विद्यार्थी आचार्य के आचरण से सीखता है। आचार्य का मुख्य लक्ष्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है। बच्चों को उपवास के बारे में बताएं, मोबाइल का उपवास कराएं, पाश्चात्य संस्कृति से बच्चों को दूर रखें, विद्या भारती समाज को भारतीय संस्कृति से परिचित करा रही है, नई शिक्षा नीति का प्रयोग कर रही है। यदि योजना एक वर्ष की है तो फसल लगाएं, 10 वर्ष की है तो पेड़ लगाएं और 100 वर्ष की है तो मानव का निर्माण करें। देशराज शर्मा ने कहा कि विद्या भारती का परिवार दो करोड़ लोगों से ज्यादा का है।
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यहां 40 लाख पूर्व छात्र विद्या भारती से जुड़े हैं। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे छात्र का हर क्षेत्र में निर्माण हो। एनआईटी निदेशक ब्रह्मजीत ने कहा कि शिक्षक समाज का श्रेष्ठ अंग माना जाता है। शिक्षक आचरण से छात्र को शिक्षा सिखाता है। शिक्षक विनम्र है तो छात्र विनम्र होगा। वह ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करेगा, जो जड़ों से जुड़े रहें। हिंदू शिक्षा समिति के उपाध्यक्ष चेतराम शर्मा ने बताया कि 15 दिन से चल रहे आचार्य विकास वर्ग का उद्देश्य ऐसे आचार्य का निर्माण करना है, जो बच्चों का सर्वांगीण विकास कर सके। ऋषि राज ने शिक्षार्थी आचार्य से आह्वान किया कि जो सीखा है, विद्यालय में जाकर प्रारंभ करें। विद्या भारती द्वारा प्रदेश में 250 संस्कार केंद्र खोले गए हैं, जहां पर छात्रों को मुफ्त शिक्षा, मुफ्त किताबें दी जाती हैं। इस अवसर पर श्रीमद्भागवत गीता विद्यालय के प्रबंधक वीरेंद्र वालिया कोषाध्यक्ष रमेश गुलाटी सदस्य जंगबहादुर सिंगला एवं प्रबंध समिति के अन्य सदस्य, पूर्व छात्र, विभिन्न विद्यालयों की प्रबंध समिति, विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्य, आचार्य एवं अभिभावक मौजूद रहे।