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Kurukshetra News: बैचलर ऑफ वोकेशन इन एनवायरनमेंटल साइंस एंड सस्टेनेबिलिटी में प्रवेश शुरू
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय पर्यावरण अध्ययन संस्थान द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बैचलर ऑफ वोकेशन इन एनवायरनमेंटल साइंस एंड सस्टेनेबिलिटी पाठ्यक्रम में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तीन वर्षीय उद्योग-संबद्ध (इंडस्ट्री लिंक) कौशल आधारित स्नातक कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास तथा हरित रोजगार के क्षेत्र में प्रशिक्षित करना है।
निदेशक प्रो. परमेश कुमार ने बताया कि पाठ्यक्रम में प्रवेश पूर्णतः मेरिट के आधार पर होगा तथा इसके लिए किसी प्रकार की प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। किसी भी संकाय (आर्ट्स, कॉमर्स, साइंस) से 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी इस पाठ्यक्रम में आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 21 जून निर्धारित की गई है।
बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) की भावना के अनुरूप तैयार किए गए कार्यक्रम में विद्यार्थियों को आधुनिक प्रयोगशालाओं, फील्ड सर्वेक्षण, परियोजना आधारित अधिगम, उद्योग प्रशिक्षण तथा इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। पाठ्यक्रम में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, जल एवं अपशिष्ट प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन तथा सतत विकास जैसे समकालीन विषय शामिल हैं।
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लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि यह कार्यक्रम अर्न व्हाइल लर्न की अवधारणा पर आधारित है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप के दौरान 12 हजार रुपये प्रतिमाह तक का स्टाइपेंड’’ प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ व्यावहारिक अनुभव और आर्थिक सहायता दोनों प्राप्त होंगे
पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण परामर्शदात्री संस्थानों, जल एवं मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं, उद्योगों के पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा प्रभागों, सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों तथा अनुसंधान संस्थानों में रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे। विद्यार्थी उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकते हैं। विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।
निदेशक प्रो. परमेश कुमार ने बताया कि पाठ्यक्रम में प्रवेश पूर्णतः मेरिट के आधार पर होगा तथा इसके लिए किसी प्रकार की प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। किसी भी संकाय (आर्ट्स, कॉमर्स, साइंस) से 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी इस पाठ्यक्रम में आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 21 जून निर्धारित की गई है।
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बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) की भावना के अनुरूप तैयार किए गए कार्यक्रम में विद्यार्थियों को आधुनिक प्रयोगशालाओं, फील्ड सर्वेक्षण, परियोजना आधारित अधिगम, उद्योग प्रशिक्षण तथा इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। पाठ्यक्रम में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, जल एवं अपशिष्ट प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन तथा सतत विकास जैसे समकालीन विषय शामिल हैं।
लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि यह कार्यक्रम अर्न व्हाइल लर्न की अवधारणा पर आधारित है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप के दौरान 12 हजार रुपये प्रतिमाह तक का स्टाइपेंड’’ प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ व्यावहारिक अनुभव और आर्थिक सहायता दोनों प्राप्त होंगे
पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विद्यार्थियों के लिए पर्यावरण परामर्शदात्री संस्थानों, जल एवं मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं, उद्योगों के पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा प्रभागों, सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों तथा अनुसंधान संस्थानों में रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे। विद्यार्थी उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकते हैं। विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।