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Kurukshetra News: जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के समर्थन का वीडियो साझा करने पर केयू प्रोफेसर तलब
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कुरुक्षेत्र। केयू का मुख्य द्वार। संस्थान
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के समर्थन में सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करने वाले कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने तलब किया है। कुलपति डॉ. सोमनाथ सचदेवा और विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर से मुलाकात कर वीडियो के संबंध में बातचीत की। मामला दो-तीन दिन पुराना बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, प्रोफेसर ने करीब दो से तीन मिनट की वीडियो में छात्र आंदोलन पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए संविधान के अनुच्छेद 32 का भी उल्लेख किया। वीडियो में उन्होंने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए न्याय और संवैधानिक अधिकारों का जिक्र किया। जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर आई उसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर को तलब कर उनसे वीडियो बनाने के उद्देश्य और उसमें व्यक्त विचारों के संबंध में चर्चा की। इस दौरान प्रोफेसर ने छात्र आंदोलन को लेकर अपना पक्ष कुलपति के समक्ष रखा और बताया कि वीडियो छात्रों से जुड़े मुद्दों पर उनकी अपनी राय थी।
बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर पर वीडियो हटाने या सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट करने का कोई दबाव नहीं बनाया। बातचीत केवल वीडियो की पृष्ठभूमि और उसके उद्देश्य को समझने के लिए हुई। वहीं न ही प्रशासन की तरफ से कोई लिखित जवाब प्रोफेसर से मांगा गया।
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कुरुक्षेत्र। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के समर्थन में सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करने वाले कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने तलब किया है। कुलपति डॉ. सोमनाथ सचदेवा और विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर से मुलाकात कर वीडियो के संबंध में बातचीत की। मामला दो-तीन दिन पुराना बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, प्रोफेसर ने करीब दो से तीन मिनट की वीडियो में छात्र आंदोलन पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए संविधान के अनुच्छेद 32 का भी उल्लेख किया। वीडियो में उन्होंने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए न्याय और संवैधानिक अधिकारों का जिक्र किया। जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर आई उसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर को तलब कर उनसे वीडियो बनाने के उद्देश्य और उसमें व्यक्त विचारों के संबंध में चर्चा की। इस दौरान प्रोफेसर ने छात्र आंदोलन को लेकर अपना पक्ष कुलपति के समक्ष रखा और बताया कि वीडियो छात्रों से जुड़े मुद्दों पर उनकी अपनी राय थी।
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बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर पर वीडियो हटाने या सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट करने का कोई दबाव नहीं बनाया। बातचीत केवल वीडियो की पृष्ठभूमि और उसके उद्देश्य को समझने के लिए हुई। वहीं न ही प्रशासन की तरफ से कोई लिखित जवाब प्रोफेसर से मांगा गया।
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