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Kurukshetra News: हरियाणा कमेटी की ओर से बनाए चिकित्सकों के बोर्ड पर हाईकोर्ट ने लगाया स्टे
Tue, 28 Jul 2026 02:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 28 Jul 2026 02:56 AM IST
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कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान शाहाबाद के चिकित्सकों के हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी की ओर से बनाए बोर्ड पर स्टे लगा दिया है। अगली सुनवाई कब होगी फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है। संस्थान के संबंध में विवाद वर्ष 2022 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुआ। चार सितंबर 2024 को एचएसजीएमसी ने चिकित्सा सेवाओं के सुचारु संचालन के लिए छह चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड बनाया था, जिसे ट्रस्टियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दे दी थी। तीन अक्टूबर 2024 को हाईकोर्ट ने इस बोर्ड पर अंतरिम स्टे लगा दिया था।
20 मार्च 2026 को कर्मचारियों के धरने के दौरान जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल ने संस्थान का प्रबंधन हरियाणा कमेटी ने संभालने की घोषणा की। 12 मई को हाईकोर्ट का फैसला एचएसजीएमसी के पक्ष में आया। इसके बाद प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा ने संस्थान पर अपना अधिकार जताया। ऐसे में कर्मचारी भी संशय में आ गए थे कि आखिर अब संस्थान का संचालन किन हाथों में है और उनके वेतन का क्या होगा। बदले हालात के बीच कर्मचारियों का वेतन रुक गया और तीन जुलाई से कर्मचारियों ने बकाया वेतन की मांग के लिए आंदोलन शुरू कर दिया था।
इस संबंध में हरियाणा कमेटी प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा का कहना है कि अदालत के आज के फैसले से संस्थान की हरियाणा कमेटी की ओर से संभाली गई सेवा पर कोई असर नही पड़ेगा। यहां तक कि जब अदालत ने चिकित्सकों के पैनल पर स्टे लगाया तो मामले से जुड़े वकीलों ने अदालत को यह भी बताया कि संस्थान का संचालन अब हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने अपने अधीन ले लिया है। इस पर अदालत ने कोई टिप्पणी नहीं की बल्कि यह कहा कि सेवा संभालने का फैसला इस मामले से जुदा है। ऐसे में अदालत की ओर से चिकित्सकों के पैनल पर स्टे लगाने से संस्थान के हरियाणा कमेटी के संचालन करने पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उधर एसजीपीसी सदस्य बलदेव सिंह कैमपुर से अदालत की ओर से सोमवार को दिए फैसले व हरियाणा कमेटी द्वारा संस्थान की सेवा संभाल के संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन कॉल रिसीव नहीं की गई। संवाद
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20 मार्च 2026 को कर्मचारियों के धरने के दौरान जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल ने संस्थान का प्रबंधन हरियाणा कमेटी ने संभालने की घोषणा की। 12 मई को हाईकोर्ट का फैसला एचएसजीएमसी के पक्ष में आया। इसके बाद प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा ने संस्थान पर अपना अधिकार जताया। ऐसे में कर्मचारी भी संशय में आ गए थे कि आखिर अब संस्थान का संचालन किन हाथों में है और उनके वेतन का क्या होगा। बदले हालात के बीच कर्मचारियों का वेतन रुक गया और तीन जुलाई से कर्मचारियों ने बकाया वेतन की मांग के लिए आंदोलन शुरू कर दिया था।
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इस संबंध में हरियाणा कमेटी प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा का कहना है कि अदालत के आज के फैसले से संस्थान की हरियाणा कमेटी की ओर से संभाली गई सेवा पर कोई असर नही पड़ेगा। यहां तक कि जब अदालत ने चिकित्सकों के पैनल पर स्टे लगाया तो मामले से जुड़े वकीलों ने अदालत को यह भी बताया कि संस्थान का संचालन अब हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने अपने अधीन ले लिया है। इस पर अदालत ने कोई टिप्पणी नहीं की बल्कि यह कहा कि सेवा संभालने का फैसला इस मामले से जुदा है। ऐसे में अदालत की ओर से चिकित्सकों के पैनल पर स्टे लगाने से संस्थान के हरियाणा कमेटी के संचालन करने पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उधर एसजीपीसी सदस्य बलदेव सिंह कैमपुर से अदालत की ओर से सोमवार को दिए फैसले व हरियाणा कमेटी द्वारा संस्थान की सेवा संभाल के संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन कॉल रिसीव नहीं की गई। संवाद
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