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Kurukshetra News: कुरुक्षेत्र ऋषियों और ज्ञान की भूमिः श्याम सिंह राणा
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कुरुक्षेत्र।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में कुरुक्षेत्र थ्रू द एजेस विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हो गया। इस अवसर पर जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा प्रकाशित तीन दिवसीय सम्मेलन के विशेष न्यूज पेपर का भी अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि कुरुक्षेत्र का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है तथा यह भूमि ऋषियों-मुनियों की तपोभूमि रही है। इसी पावन धरती पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का दिव्य संदेश दिया, जो मानव जीवन को कर्तव्य, धर्म और शांति का मार्ग दिखाता है। कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों के हित में अनेक योजनाएं लागू की गई हैं। लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से खेतों तक जाने वाले रास्तों का विकास कराया गया है, जिससे किसानों को अपनी फसल खेतों से मंडियों तक ले जाने में सुविधा हुई है।
वहीं गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि किसी भी स्थान और परंपरा को सही रूप में समझने के लिए उसे मूल रूप में जाकर देखना और अनुभव करना आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र की संस्कृति अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही विश्वगुरु रहा है और भविष्य में भी इस भूमिका को निभाने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका का इतिहास लगभग 450 वर्ष और इंग्लैंड का लगभग 1000 वर्ष पुराना है, जबकि कुरुक्षेत्र में हुआ महाभारत का महान युद्ध लगभग 5128 वर्ष पूर्व हुआ था। इस दृष्टि से कुरुक्षेत्र, गीता और भारत विश्व की अत्यंत प्राचीन सभ्यताओं के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार रोम और मक्का जैसे धार्मिक स्थलों का वैश्विक महत्व है, उसी प्रकार कुरुक्षेत्र के महत्व को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की आवश्यकता है।
बॉक्स
बाबा बंदा सिंह बहादुर थानेसर होते हुए लौहगढ़ पहुंचे : प्रो. अमरजीत
समापन सत्र का मुख्य व्याख्यान देते हुए देश भगत विश्वविद्यालय मंडी गोबिंदगढ़ के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. अमरजीत सिंह ने कहा कि नांदेड से प्रस्थान करने के बाद बाबा बंदा सिंह बहादुर खरखौदा और थानेसर होते हुए लौहगढ़ तक पहुंचे। इस दौरान कुरुक्षेत्र क्षेत्र की जनता ने उनका सम्मान किया और उनके आंदोलन को सहयोग दिया। उन्होंने बताया कि थानेसर में बाबा बंदा सिंह बहादुर ने अपने सहयोगी राम सिंह को फौजदार नियुक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि लाडवा और थानेसर क्षेत्रों में लोगों ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह किया, जो हरियाणा के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में कुरुक्षेत्र थ्रू द एजेस विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हो गया। इस अवसर पर जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा प्रकाशित तीन दिवसीय सम्मेलन के विशेष न्यूज पेपर का भी अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि कुरुक्षेत्र का इतिहास अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली है तथा यह भूमि ऋषियों-मुनियों की तपोभूमि रही है। इसी पावन धरती पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का दिव्य संदेश दिया, जो मानव जीवन को कर्तव्य, धर्म और शांति का मार्ग दिखाता है। कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों के हित में अनेक योजनाएं लागू की गई हैं। लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से खेतों तक जाने वाले रास्तों का विकास कराया गया है, जिससे किसानों को अपनी फसल खेतों से मंडियों तक ले जाने में सुविधा हुई है।
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वहीं गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि किसी भी स्थान और परंपरा को सही रूप में समझने के लिए उसे मूल रूप में जाकर देखना और अनुभव करना आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र की संस्कृति अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही विश्वगुरु रहा है और भविष्य में भी इस भूमिका को निभाने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका का इतिहास लगभग 450 वर्ष और इंग्लैंड का लगभग 1000 वर्ष पुराना है, जबकि कुरुक्षेत्र में हुआ महाभारत का महान युद्ध लगभग 5128 वर्ष पूर्व हुआ था। इस दृष्टि से कुरुक्षेत्र, गीता और भारत विश्व की अत्यंत प्राचीन सभ्यताओं के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार रोम और मक्का जैसे धार्मिक स्थलों का वैश्विक महत्व है, उसी प्रकार कुरुक्षेत्र के महत्व को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की आवश्यकता है।
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बाबा बंदा सिंह बहादुर थानेसर होते हुए लौहगढ़ पहुंचे : प्रो. अमरजीत
समापन सत्र का मुख्य व्याख्यान देते हुए देश भगत विश्वविद्यालय मंडी गोबिंदगढ़ के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. अमरजीत सिंह ने कहा कि नांदेड से प्रस्थान करने के बाद बाबा बंदा सिंह बहादुर खरखौदा और थानेसर होते हुए लौहगढ़ तक पहुंचे। इस दौरान कुरुक्षेत्र क्षेत्र की जनता ने उनका सम्मान किया और उनके आंदोलन को सहयोग दिया। उन्होंने बताया कि थानेसर में बाबा बंदा सिंह बहादुर ने अपने सहयोगी राम सिंह को फौजदार नियुक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि लाडवा और थानेसर क्षेत्रों में लोगों ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह किया, जो हरियाणा के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।