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सृष्टि कल्याण के लिए भगवान विष्णु ने कपिल मुनि का अवतार लिया : कौशिक
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Thu, 21 May 2026 01:51 AM IST
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कुरुक्षेत्र। वार्ड-20 में कथा के दौरान मंच पर आरती करते कारसा परिवार के अटल शर्मा, उनकी माता एव
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। जय मां दुर्गा-जय श्री महाकाल ट्रस्ट की ओर से वार्ड-20 के गुरुदेव नगर में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा की जा रही है। तीसरे दिन कथाव्यास पंडित विकास कौशिक ने तीसरे अध्याय (तृतीय स्कंध) के मुख्य प्रसंग सृष्टि की रचना, कपिल मुनि का प्रादुर्भाव और भक्ति योग उपदेश का वृतांत सुनाया। मंच पर विख्यात भगवताचार्य शुकदेव और साध्वी डॉ. मोक्षिता ने भी भगवत चर्चा की।
कथा से पूर्व मुख्य यजमान व ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित राजेश मौद्गिल और अंकुश गुप्ता ने भागवत पूजन करके संतों का सत्कार किया। भागवत प्रवचनों में कथाव्यास पंडित विकास कौशिक ने कहा कि सृष्टि के कल्याण के लिए भगवान विष्णु स्वयं महर्षि कर्दम और देवहूति के पुत्र के रूप में अवतरित होते हैं, जिन्हें कपिल मुनि कहा जाता है। कपिल मुनि अपनी माता देवहूति को आत्मज्ञान और सांख्य योग (ज्ञान का मार्ग) का उपदेश देते हैं।
शुकदेव आचार्य ने कहा कि पुरुषोत्तम मास में प्रतिदिन भगवान विष्णु के समक्ष गायत्री मंत्रों का जप करें, उसके उपरांत गीता व भागवत जी के अध्याय करें। इससे अधिक मास के श्रेष्ठ फलों की प्राप्ति होती है। गंगा, गीता, गायत्री, गाय का अधिक मास में विशेष महत्व है। आरती में रमेश कौशिक, अटल शर्मा, ललित अत्री, कारसा परिवार से कमला देवी, गोपाल शर्मा, मनोज गुप्ता, नवीन बंसल, राहुल तंवर, नरेश सैनी बिशनगढ़, सदानंद शर्मा, गुरमुख सिंह आदि मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। जय मां दुर्गा-जय श्री महाकाल ट्रस्ट की ओर से वार्ड-20 के गुरुदेव नगर में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा की जा रही है। तीसरे दिन कथाव्यास पंडित विकास कौशिक ने तीसरे अध्याय (तृतीय स्कंध) के मुख्य प्रसंग सृष्टि की रचना, कपिल मुनि का प्रादुर्भाव और भक्ति योग उपदेश का वृतांत सुनाया। मंच पर विख्यात भगवताचार्य शुकदेव और साध्वी डॉ. मोक्षिता ने भी भगवत चर्चा की।
कथा से पूर्व मुख्य यजमान व ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित राजेश मौद्गिल और अंकुश गुप्ता ने भागवत पूजन करके संतों का सत्कार किया। भागवत प्रवचनों में कथाव्यास पंडित विकास कौशिक ने कहा कि सृष्टि के कल्याण के लिए भगवान विष्णु स्वयं महर्षि कर्दम और देवहूति के पुत्र के रूप में अवतरित होते हैं, जिन्हें कपिल मुनि कहा जाता है। कपिल मुनि अपनी माता देवहूति को आत्मज्ञान और सांख्य योग (ज्ञान का मार्ग) का उपदेश देते हैं।
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शुकदेव आचार्य ने कहा कि पुरुषोत्तम मास में प्रतिदिन भगवान विष्णु के समक्ष गायत्री मंत्रों का जप करें, उसके उपरांत गीता व भागवत जी के अध्याय करें। इससे अधिक मास के श्रेष्ठ फलों की प्राप्ति होती है। गंगा, गीता, गायत्री, गाय का अधिक मास में विशेष महत्व है। आरती में रमेश कौशिक, अटल शर्मा, ललित अत्री, कारसा परिवार से कमला देवी, गोपाल शर्मा, मनोज गुप्ता, नवीन बंसल, राहुल तंवर, नरेश सैनी बिशनगढ़, सदानंद शर्मा, गुरमुख सिंह आदि मौजूद रहे।