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Kurukshetra News: मारकंडा का रौद्र रूप, 4 गांवों में खेतों से लेकर घरों तक घुसा पानी
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शाहाबाद। मारकंडा के उफान पर आने के बाद खेतों में घुसा पानी। संवाद
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शाहाबाद ( कुरुक्षेत्र)। हिमाचल के शिवालिक की पहाड़ियों से निकलने वाली मारकंडा नदी ने शनिवार की सुबह रौद्र रूप धारण कर शाहबाद क्षेत्र के चार गांवों में कहर बरपा दिया है। पहाड़ों पर हुई बारिश का पानी नदी के तटों को पार कर मुगल माजरा, तंगौर, कलसाना और कठवा गांव में खेतों से लेकर घरों तक घुस गया।
नदी में 14 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी आने से इन गांवों की 2.5 हजार एकड़ से ज्यादा धान की फसल डूब गई। बाढ़ जैसे हालात बनते देख प्रशासन ने गांवों में मुनादी करा लोगों को सतर्क किया। इन गांवों में पीने के पानी का भी संकट हो गया है। शुक्रवार की रात में गांवों में तेजी से पानी घुसा। शनिवार की सुबह लोगों की आंख खुली तो घर, रास्ते और खेत सब पानी से लबालब थे। हालांकि, शनिवार की दोपहर से नदी शांत होने लगी। शाम को जलस्तर घटकर पांच हजार क्यूसेक पर आ गया। प्रशासन ने दावा किया है कि गांवों से पानी तेजी से उतर रहा है।
सबसे खराब स्थिति कलसाना की बताई गई है। गांव के रास्ते पानी में डूब गए हैं। तीन से चार फुट तक पानी जमा हो गया है। लोग ट्रैक्टर के सहारे ही निकल पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से नदी पर अस्थायी बांध बनाया गया है। इस वजह से नदी में पहाड़ों से आए पानी का प्रवाह गांव की ओर हो गया। लोगों ने बांध में रास्ता बनाने की कोशिश भी की लेकिन पास के गांव मदनपुर और मोहनपुर के लोगों ने इसका विरोध किया। तनाव बन जाने पर पुलिस ने आकर लोगों को समझाया और वापस भेजा। लोगों ने बताया कि हर साल बारिश के दिनों में त्रासदी झेलने वाले इन गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए इस बार भी प्रशासन की ओर से कारगर उपाय नहीं किए गए।
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इसी का नतीजा रहा कि 14 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी आते ही नदी किनारों से बाहर निकल गई। नदी के खतरे का निशान 256 मीटर पर है। जलस्तर इससे नीचे बना हुआ है। यह 15 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी आने पर पार होता है। एसडीएम शंभू राठी ने प्रभावित गांवों का दौरा कर हालात का जायजा लिया और राहत कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने गांवों से पानी निकालने का काम शुरू कर दिया है। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने बताया कि मुलाना में शुक्रवार को मारकंडा में 14 हजार क्यूसिक पानी दर्ज किया गया था। शनिवार को जलस्तर में कमी आई है। कलसाना में पानी तालाब की निकासी वाले पाइप से बैक फ्लो होने के कारण घुसा था, जिसे रोक दिया गया है। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है और सभी अधिकारी अलर्ट पर हैं।
ट्रैक्टर बना ग्रामीणों का सहारा
बाढ़ के पानी ने सबसे अधिक असर आवागमन पर डाला है। कठुआ गांव का मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जिससे लोगों का गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. मोटरसाइकिल और अन्य छोटे वाहन पानी में बंद हो रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण एक गांव से दूसरे गांव या शहर तक पहुंचने के लिए ट्रैक्टरों का सहारा लेने को मजबूर हैं। इससे दैनिक जीवन के साथ जरूरी सेवाओं पर भी असर पड़ा है।
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नदी में 14 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी आने से इन गांवों की 2.5 हजार एकड़ से ज्यादा धान की फसल डूब गई। बाढ़ जैसे हालात बनते देख प्रशासन ने गांवों में मुनादी करा लोगों को सतर्क किया। इन गांवों में पीने के पानी का भी संकट हो गया है। शुक्रवार की रात में गांवों में तेजी से पानी घुसा। शनिवार की सुबह लोगों की आंख खुली तो घर, रास्ते और खेत सब पानी से लबालब थे। हालांकि, शनिवार की दोपहर से नदी शांत होने लगी। शाम को जलस्तर घटकर पांच हजार क्यूसेक पर आ गया। प्रशासन ने दावा किया है कि गांवों से पानी तेजी से उतर रहा है।
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सबसे खराब स्थिति कलसाना की बताई गई है। गांव के रास्ते पानी में डूब गए हैं। तीन से चार फुट तक पानी जमा हो गया है। लोग ट्रैक्टर के सहारे ही निकल पा रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से नदी पर अस्थायी बांध बनाया गया है। इस वजह से नदी में पहाड़ों से आए पानी का प्रवाह गांव की ओर हो गया। लोगों ने बांध में रास्ता बनाने की कोशिश भी की लेकिन पास के गांव मदनपुर और मोहनपुर के लोगों ने इसका विरोध किया। तनाव बन जाने पर पुलिस ने आकर लोगों को समझाया और वापस भेजा। लोगों ने बताया कि हर साल बारिश के दिनों में त्रासदी झेलने वाले इन गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए इस बार भी प्रशासन की ओर से कारगर उपाय नहीं किए गए।
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इसी का नतीजा रहा कि 14 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी आते ही नदी किनारों से बाहर निकल गई। नदी के खतरे का निशान 256 मीटर पर है। जलस्तर इससे नीचे बना हुआ है। यह 15 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी आने पर पार होता है। एसडीएम शंभू राठी ने प्रभावित गांवों का दौरा कर हालात का जायजा लिया और राहत कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने गांवों से पानी निकालने का काम शुरू कर दिया है। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने बताया कि मुलाना में शुक्रवार को मारकंडा में 14 हजार क्यूसिक पानी दर्ज किया गया था। शनिवार को जलस्तर में कमी आई है। कलसाना में पानी तालाब की निकासी वाले पाइप से बैक फ्लो होने के कारण घुसा था, जिसे रोक दिया गया है। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है और सभी अधिकारी अलर्ट पर हैं।
ट्रैक्टर बना ग्रामीणों का सहारा
बाढ़ के पानी ने सबसे अधिक असर आवागमन पर डाला है। कठुआ गांव का मुख्य संपर्क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जिससे लोगों का गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. मोटरसाइकिल और अन्य छोटे वाहन पानी में बंद हो रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण एक गांव से दूसरे गांव या शहर तक पहुंचने के लिए ट्रैक्टरों का सहारा लेने को मजबूर हैं। इससे दैनिक जीवन के साथ जरूरी सेवाओं पर भी असर पड़ा है।

शाहाबाद। मारकंडा के उफान पर आने के बाद खेतों में घुसा पानी। संवाद

शाहाबाद। मारकंडा के उफान पर आने के बाद खेतों में घुसा पानी। संवाद