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Kurukshetra News: धर्मनगरी में सेवाभाव के साथ मनाई गई निर्जला एकादशी
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। जिलेभर में निर्जला एकादशी के विशेष दिन को पर्व के रूप में श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालय परिसर तथा आमजन ने सड़कों के किनारे जलसेवा की। इस दौरान राहगीरों तथा जरूरतमंदों को ठंडा जल परोस कर भीषण गर्मी में राहत दिलाने का काम किया।
इसी कड़ी में गांव मथाना से सिरसमा, पिपली, सेक्टर-सात, जनस्वास्थ्य विभाग तथा नंगली वाली कुटिया मोड़ के निकट बड़ी संख्या में लोगों ने सेवा में योगदान दिया। वहीं कस्बों में आस्था दर्शाने में क्षेत्रवासी पीछे नहीं रहे। बाबैन मार्केट में दुकानदारों ने छबील लगाकर राहगीरों की सेवा की। इसके अलावा थानेसर सहित लाडवा, शाहाबाद, पिहोवा, इस्माईलाबाद के ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में भी मीठे ठंडे पानी और जलजीरे की सेवा चलती रही। कई संस्थाओं ने इस नेक कार्य में सहभागिता की। वहीं भोलेनाथ के भक्तों ने लक्ष्मण कॉलोनी से लगते निजी होटल के निकट चौक पर छबील लगाकर आने-जाने वालों को मीठा शर्बत पिलाया। वरिष्ठ नागरिक फोरम ने सेक्टर-13 कार्यालय परिसर में सेवा की।
छबील में बड़ों के साथ बच्चों ने भी सेवा की। विभिन्न स्थानों पर जलपान का भंडारा चला। कई स्थानों पर कोल्ड ड्रिंक की बोतलें बांटी गई। इसके अलावा व्रत रखने की परंपरा का भी पालन किया गया। घरों में व्रतधारियों ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर सर्वमंगल की कामना की। मंत्र जाप का विशेष महत्व बताया गया। मथाना शिव मंदिर के पुजारी आचार्य दीपेंद्र पंडित ने बताया कि पौराणिक कथा अनुसार महाभारत काल में पांडवों में भीम को बहुत तेज भूख लगती थी, जिस कारण वह किसी भी एकादशी का व्रत नहीं रख पाते थे। तब उन्होंने महर्षि वेदव्यास से इसका समाधान मांगा। उन्हें ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को व्रत करने का उपाय बताया।
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कुरुक्षेत्र। जिलेभर में निर्जला एकादशी के विशेष दिन को पर्व के रूप में श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालय परिसर तथा आमजन ने सड़कों के किनारे जलसेवा की। इस दौरान राहगीरों तथा जरूरतमंदों को ठंडा जल परोस कर भीषण गर्मी में राहत दिलाने का काम किया।
इसी कड़ी में गांव मथाना से सिरसमा, पिपली, सेक्टर-सात, जनस्वास्थ्य विभाग तथा नंगली वाली कुटिया मोड़ के निकट बड़ी संख्या में लोगों ने सेवा में योगदान दिया। वहीं कस्बों में आस्था दर्शाने में क्षेत्रवासी पीछे नहीं रहे। बाबैन मार्केट में दुकानदारों ने छबील लगाकर राहगीरों की सेवा की। इसके अलावा थानेसर सहित लाडवा, शाहाबाद, पिहोवा, इस्माईलाबाद के ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में भी मीठे ठंडे पानी और जलजीरे की सेवा चलती रही। कई संस्थाओं ने इस नेक कार्य में सहभागिता की। वहीं भोलेनाथ के भक्तों ने लक्ष्मण कॉलोनी से लगते निजी होटल के निकट चौक पर छबील लगाकर आने-जाने वालों को मीठा शर्बत पिलाया। वरिष्ठ नागरिक फोरम ने सेक्टर-13 कार्यालय परिसर में सेवा की।
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छबील में बड़ों के साथ बच्चों ने भी सेवा की। विभिन्न स्थानों पर जलपान का भंडारा चला। कई स्थानों पर कोल्ड ड्रिंक की बोतलें बांटी गई। इसके अलावा व्रत रखने की परंपरा का भी पालन किया गया। घरों में व्रतधारियों ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर सर्वमंगल की कामना की। मंत्र जाप का विशेष महत्व बताया गया। मथाना शिव मंदिर के पुजारी आचार्य दीपेंद्र पंडित ने बताया कि पौराणिक कथा अनुसार महाभारत काल में पांडवों में भीम को बहुत तेज भूख लगती थी, जिस कारण वह किसी भी एकादशी का व्रत नहीं रख पाते थे। तब उन्होंने महर्षि वेदव्यास से इसका समाधान मांगा। उन्हें ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को व्रत करने का उपाय बताया।
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