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Kurukshetra News: संस्कृत के जरिए आयुर्वेद के मूल ज्ञान से जोड़ने के लिए प्रभाषणम् की शुरुआत
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कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में शुक्रवार देर शाम को ‘प्रभाषणम्’ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। सात दिवसीय विशेष गतिविधि का संचालन आयुर्वेद अकादमी बैंगलोर के संयुक्त तत्वावधान में किया जाएगा। विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को संस्कृत भाषा के माध्यम से आयुर्वेद के मूल ग्रंथों की गहराई से समझ विकसित करने और उनके व्यवहारिक उपयोग से परिचित कराना इसका उद्देश्य बताया जा रहा है।
कार्यक्रम में स्नातक एवं स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान, शास्त्रार्थ और प्रायोगिक सत्रों के माध्यम से आयुर्वेदिक ज्ञान को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। डॉ. संकेत वी शर्मा, डॉ. विकास कुमार, डॉ. समयाम एसजी, डॉ. शांतनु अनिल पाटिल, डॉ. कृतिका यूएस, डॉ. शिल्पा पांडे, डॉ. पंचमी के भट्ट और डॉ. विष्णुप्रिया विशेषज्ञ मंडल के रूप में मार्गदर्शन करेंगे।
आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता ने कहा कि आयुर्वेद के मूल ग्रंथों की वास्तविक समझ संस्कृत के माध्यम से ही संभव है। ऐसे कार्यक्रमों से शास्त्रीय ज्ञान को व्यवहार में उतारने और आयुर्वेद को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करते हैं। कुलपति वैद्य करतार सिंह धीमान ने आयोजकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को प्रोत्साहित किया।
आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्ण कुमार ने बताया कि ‘प्रभाषणम्’ विद्यार्थियों के लिए एक अनूठा मंच है, जहां वे संस्कृत में दक्षता प्राप्त करके आयुर्वेद के सिद्धांतों को मूल रूप में समझेंगे। यह पहल पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में सशक्त बनाने और आयुर्वेद शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इस अवसर पर प्रो. राजेंद्र चौधरी, डॉ. रामानंद सैनी और डॉ. सीमा वर्मा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में स्नातक एवं स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान, शास्त्रार्थ और प्रायोगिक सत्रों के माध्यम से आयुर्वेदिक ज्ञान को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। डॉ. संकेत वी शर्मा, डॉ. विकास कुमार, डॉ. समयाम एसजी, डॉ. शांतनु अनिल पाटिल, डॉ. कृतिका यूएस, डॉ. शिल्पा पांडे, डॉ. पंचमी के भट्ट और डॉ. विष्णुप्रिया विशेषज्ञ मंडल के रूप में मार्गदर्शन करेंगे।
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आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता ने कहा कि आयुर्वेद के मूल ग्रंथों की वास्तविक समझ संस्कृत के माध्यम से ही संभव है। ऐसे कार्यक्रमों से शास्त्रीय ज्ञान को व्यवहार में उतारने और आयुर्वेद को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करते हैं। कुलपति वैद्य करतार सिंह धीमान ने आयोजकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को प्रोत्साहित किया।
आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्ण कुमार ने बताया कि ‘प्रभाषणम्’ विद्यार्थियों के लिए एक अनूठा मंच है, जहां वे संस्कृत में दक्षता प्राप्त करके आयुर्वेद के सिद्धांतों को मूल रूप में समझेंगे। यह पहल पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में सशक्त बनाने और आयुर्वेद शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इस अवसर पर प्रो. राजेंद्र चौधरी, डॉ. रामानंद सैनी और डॉ. सीमा वर्मा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।