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कुरुक्षेत्र के बुढेड़ा हेड पहुंचा रावी-ब्यास जल ट्रिब्यूनल: पंजाब से पानी विवाद. हरियाणा के दावों को परखा

सेवा सिंह/प्रदीप पिलानिया, चंडीगढ़/कुरुक्षेत्र Published by: नवीन दलाल Updated Sun, 08 Feb 2026 09:07 AM IST
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सार

हरियाणा के अधिकारियों ने दावा किया कि राजीव लोंगेवाल समझौते के तहत उन्हें पंजाब से 3.5 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी प्राप्त होना चाहिए लेकिन वर्तमान में मात्र 1.88 एमएएफ पानी ही मिल रहा है। इससे दक्षिण हरियाणा की नहरें 30 दिन से ज्यादा सूखी रहती है।

Ravi-Beas Water Tribunal reaches Budhera Head in Kurukshetra Water dispute with Punjab Haryana claims examined
बुडेढ़ा हेड पर नहरों का जायजा लेते रावी-ब्यास ट्रिब्यूनल के सदस्य। - फोटो : संवाद
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विस्तार

हरियाणा-पंजाब के बीच पानी के बंटवारे की असल स्थित का आकलन करने के लिए रावी-ब्यास टि्रब्यूनल की टीम शनिवार को कुरुक्षेत्र के बुढेड़ा हेड पर पहुंची। रावी और ब्यास नदियों के पानी बंटवारे पर पंजाब-हरियाणा और राजस्थान के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में अब निर्णायक मोड़ आने की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार की ओर से गठित रावी-ब्यास जल ट्रिब्यूनल ने इस दिशा में गहन पड़ताल शुरू कर दी है। बुढेड़ा हेड पर करीब दो घंटे तक गहन निरीक्षण करते हुए राज्य के पानी उपयोग संबंधी दावों की गहन जांच की।

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चेयरमैन जस्टिस विनीत सरन के नेतृत्व में ट्रिब्यूनल के सात सदस्य, पंजाब के 13, राजस्थान के 10, दिल्ली जल बोर्ड के दो, केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के चार व हरियाणा के 15 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहा। टीम सबसे पहले बुढेड़ा हेड पर सिंचाई विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों व उच्च अधिकारियों ने प्रोजेक्टर और मान चित्रों के माध्यम से हरियाणा की नहर प्रणाली की भौगोलिक स्थिति, क्षमता और वर्तमान पानी उपयोग की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। इस बीच ट्रिब्यूनल ने करीब दो घंटे तक अधिकारियों से चर्चा की और पूरे हेड का गहन निरीक्षण किया। नहरों की पूरी वीडियोग्राफी भी कराई गई।
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हरियाणा के अधिकारियों ने दावा किया कि राजीव लोंगेवाल समझौते के तहत उन्हें पंजाब से 3.5 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी प्राप्त होना चाहिए लेकिन वर्तमान में मात्र 1.88 एमएएफ पानी ही मिल रहा है। इससे दक्षिण हरियाणा की नहरें 30 दिन से ज्यादा सूखी रहती है। हरियाणा सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों व कानूनी विशेषज्ञों ने टि्रब्यूनल के समक्ष पक्ष रखते हुए बताया कि अगर उन्हें अब भी पानी नहीं मिलता है, उनके लिए दिल्ली को पानी देना मुश्किल हो जाएगा। ट्रिब्यूनल ने परखा कि हरियाणा जिस मात्रा में पानी का दावा कर रहा है, क्या उसकी नहरों की क्षमता और उपयोग क्षमता उसके अनुरूप है।

आज करनाल के मूनक हेड का दाैरा करेगी टीम

शुक्रवार को ट्रिब्यूनल की टीम ने पंजाब के रोपड़ स्थित लोहड़ हेड पर हरियाणा को मिलने वाले वास्तविक पानी की स्थिति का जायजा लिया था। रविवार को करनाल के मूनक हेड पर यमुना लिंक नहर का जायजा लिया जाएगा, जहां से दिल्ली को पानी की आपूर्ति होती है। इसके बाद तीनों दिनों के निरीक्षण को जोड़कर ट्रिब्यूनल पूरी स्थिति का मूल्यांकन करेगा। हरियाणा सिंचाई विभाग के अधिकारी राज्य और केंद्र सरकार को टि्रब्यूनल के तीन दिवसीय दाैरे का ब्योरा भेजेंगे।

टि्रब्यूनल का यह दाैरा माना जा रहा महत्वपूर्ण

टि्रब्यूनल की टीम का तीन दिवसीय दाैरा रावी-ब्यास जल विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जोकि मुख्य रूप से सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के निर्माण और पानी के बंटवारे पर केंद्रित है। पंजाब अधिक पानी की मांग पर अड़े हुए हैं, जबकि हरियाणा 3.5 एमएएफ पानी की मांग कर रहा है। ट्रिब्यूनल इन निरीक्षणों और तथ्यों के आधार पर सभी कानूनी पक्षों का अवलोकन कर अंतिम निर्णय की ओर बढ़ने के आसार हैं।

अब तक समझौते के आधे से भी कम मिल रहा पानी

हरियाणा को राजीव लोंगेवाल समझौते के करीब 40 बाद भी समझौते का आधा पानी मिल रहा है। पंजाब के पास पूरे पानी को खपाने के लिए कोई नहर भी नहीं है। इसके बाद भी हरियाणा को उसके हक का पानी नहीं मिल रहा। हरियाणा को 3.5 एमएएफ पानी मिलना चाहिए लेकिन अभी तक 1.88 एमएएफ पानी मिल रहा है। बुडेढ़ा हेड की क्षमता 14 हजार क्यूसेक से ज्यादा की है परंतु यहां अभी तक साढ़े छह हजार क्यूसेक के करीब ही पानी आता है। टीम के दाैरे के दाैरान उपायुक्त राम कुमार मीणा भी साथ रहे।

रावी-ब्यास का पानी मिलने से दक्षिण हरियाणा का जल संकट होगा दूर

सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों ने ट्रिब्यूनल के सदस्यों के सामने कहा कि अगर पंजाब उन्हें भाखड़ा डेम से एसवाईएल का निर्माण कर उनके हिस्से का रावी ब्यास का पानी उन्हें दें तो दक्षिण हरियाणा के छह जिलों में सीधे जल संकट दूर होगा। दूसरे जिलों को भी लाभ होगा। हरियाणा के अधिकारियों ने यह भी तर्क दिया कि पानी पूरा मिलने से भूजल स्तर के गिरने की स्थिति में सुधार होगा।

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