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Kurukshetra News: छात्रावास आवंटन में नियमों की अनदेखी पर घेरा कुलपति कार्यालय
Tue, 18 Aug 2026 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 18 Aug 2026 01:37 AM IST
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कुरुक्षेत्र। वीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए छात्र। संवाद
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में संयुक्त छात्र मोर्चा ने सोमवार सुबह 10 बजे महिला छात्रावासों के कमरा आवंटन की प्रक्रिया में अनियमितता, मेरिट सूची में धांधली, दूरी व आरक्षण नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। इसके बाद कुलपति कार्यालय का घेराव किया। इससे पहले बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने महिला छात्रावास की चीफ वार्डन के कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकर रहे विद्यार्थियों का आरोप था कि विश्वविद्यालय में दाखिले की प्रक्रिया अभी जारी है। इसके बाद भी छात्रावास का पोर्टल बंद कर दिया गया है। छात्र नेताओं ने दावा किया कि रानी लक्ष्मीबाई छात्रावास में करीब 100 सीटें खाली होने के बावजूद जरूरतमंद और मेधावी छात्राओं को कमरा नहीं मिल रहा। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब सीटें उपलब्ध हैं तो नए दाखिला लेने वाली छात्राओं के लिए पोर्टल दोबारा क्यों नहीं खोला जा रहा।
कुछ देर बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया। बैठक में अधिकारियों ने उन्हें पूरे मामले की जांच कराने और इसी आधार पर आगे का फैसला लेने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्र अपनी कक्षा में लौट गए। इस दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि प्रशासन की ओर से दिए गए सकारात्मक आश्वासनों को अब निर्धारित समय-सीमा में धरातल पर उतारा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र ही समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे फिर से आंदोलन पर उतरने को मजबूर होंगे।
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आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता मंदीप बिश्नोई ने कहा कि छात्रावास आवंटन में नियमों की अनदेखी कर सीटें दी गईं हैं। कमरे खाली होते हुए भी छात्राओं को छात्रावास के कमरों में सीट नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने कहा कि आसपास की छात्राओं को छात्रावास में सीट दे दी गई है और जरूरतमंद छात्राओं को इससे वंचित रखा गया है। इससे चीफ वार्डन की कार्यशैली शक के दायरे में है। इसलिए छात्रावास के कमरों में सीटों के आवंटन में चीफ वार्डन की कार्यशैली की जांच होनी चाहिए और खामियां मिलने पर उनकी जवाबदेही तय करके विश्वविद्यालय प्रशासन को उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए। इस मौके पर रितु कांटिवाल, मधु, गौरव, आदित्य गेरवाल, शुभम राणा और आरजू सहित अन्य छात्र प्रतिनिधि मौजूद रहे।
आरोप बेबुनियाद, पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होता है आवंटन : डॉ. कुसमलता
महिला छात्रावास की चीफ वार्डन डॉ. कुसमलता ने छात्रों के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि कमरा आवंटन में विश्वविद्यालय स्तर पर किसी प्रकार की अनियमितता नहीं की गई है। उनका नियम है कि पहले आओ पहले पाओ। इसी के आधार पर छात्राओं को कमरे दिए गए हैं। उनके अनुसार छात्रावासों में विभागवार सीटें निर्धारित की जाती हैं और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी दी जाती है। इसके बाद विभागाध्यक्ष की सिफारिश के आधार पर छात्राओं को कमरे आवंटित किए जाते हैं।
चीफ वार्डन ने कहा कि उनके स्तर पर दूरी के आधार पर कमरा देने का कोई नियम नहीं है। उनका दावा है कि विभागों की ओर से मेरिट के आधार पर छात्राओं की सिफारिश की गई और उसी के अनुसार आवंटन किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल छात्रावासों में सीटें उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने दावा किया दूर-दराज के बच्चों को लिए जो वार्डन आवास बनाए गए हैं। उनमें से खाली पड़े आवासों को प्रशासन से लिया जा रहा है अब तक तीन आवास मिल गए हैं। वह कुछ और लेने के लिए प्रयास किया जा रहा है। फिर एक और व्यवस्था बनाकर दूर-दराज से आई वंचित छात्राओं के लिए उनमें रखने की व्यवस्था की जाएंगे।
बॉक्स
छात्र संगठनों की प्रमुख मांगें
छात्रावास सुविधा प्राप्त करने वाली छात्राओं का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाए।
छात्राओं के घर और विश्वविद्यालय से दूरी को स्पष्ट किया जाए।
मेरिट और आरक्षण नीति के आधार पर आवंटन प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की जाए।
तीन अगस्त के बाद दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के लिए छात्रावास पोर्टल दोबारा खोला जाए।
दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं के लिए प्राथमिकता और अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था की जाए।
पोर्टल की तकनीकी खामी के कारण दो बार फीस कट गई है। इसलिए छात्राओं की राशि वापस की जाए।
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प्रदर्शनकर रहे विद्यार्थियों का आरोप था कि विश्वविद्यालय में दाखिले की प्रक्रिया अभी जारी है। इसके बाद भी छात्रावास का पोर्टल बंद कर दिया गया है। छात्र नेताओं ने दावा किया कि रानी लक्ष्मीबाई छात्रावास में करीब 100 सीटें खाली होने के बावजूद जरूरतमंद और मेधावी छात्राओं को कमरा नहीं मिल रहा। छात्रों ने सवाल उठाया कि जब सीटें उपलब्ध हैं तो नए दाखिला लेने वाली छात्राओं के लिए पोर्टल दोबारा क्यों नहीं खोला जा रहा।
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कुछ देर बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया। बैठक में अधिकारियों ने उन्हें पूरे मामले की जांच कराने और इसी आधार पर आगे का फैसला लेने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्र अपनी कक्षा में लौट गए। इस दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि प्रशासन की ओर से दिए गए सकारात्मक आश्वासनों को अब निर्धारित समय-सीमा में धरातल पर उतारा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र ही समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे फिर से आंदोलन पर उतरने को मजबूर होंगे।
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आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता मंदीप बिश्नोई ने कहा कि छात्रावास आवंटन में नियमों की अनदेखी कर सीटें दी गईं हैं। कमरे खाली होते हुए भी छात्राओं को छात्रावास के कमरों में सीट नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने कहा कि आसपास की छात्राओं को छात्रावास में सीट दे दी गई है और जरूरतमंद छात्राओं को इससे वंचित रखा गया है। इससे चीफ वार्डन की कार्यशैली शक के दायरे में है। इसलिए छात्रावास के कमरों में सीटों के आवंटन में चीफ वार्डन की कार्यशैली की जांच होनी चाहिए और खामियां मिलने पर उनकी जवाबदेही तय करके विश्वविद्यालय प्रशासन को उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए। इस मौके पर रितु कांटिवाल, मधु, गौरव, आदित्य गेरवाल, शुभम राणा और आरजू सहित अन्य छात्र प्रतिनिधि मौजूद रहे।
आरोप बेबुनियाद, पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होता है आवंटन : डॉ. कुसमलता
महिला छात्रावास की चीफ वार्डन डॉ. कुसमलता ने छात्रों के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि कमरा आवंटन में विश्वविद्यालय स्तर पर किसी प्रकार की अनियमितता नहीं की गई है। उनका नियम है कि पहले आओ पहले पाओ। इसी के आधार पर छात्राओं को कमरे दिए गए हैं। उनके अनुसार छात्रावासों में विभागवार सीटें निर्धारित की जाती हैं और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी दी जाती है। इसके बाद विभागाध्यक्ष की सिफारिश के आधार पर छात्राओं को कमरे आवंटित किए जाते हैं।
चीफ वार्डन ने कहा कि उनके स्तर पर दूरी के आधार पर कमरा देने का कोई नियम नहीं है। उनका दावा है कि विभागों की ओर से मेरिट के आधार पर छात्राओं की सिफारिश की गई और उसी के अनुसार आवंटन किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल छात्रावासों में सीटें उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने दावा किया दूर-दराज के बच्चों को लिए जो वार्डन आवास बनाए गए हैं। उनमें से खाली पड़े आवासों को प्रशासन से लिया जा रहा है अब तक तीन आवास मिल गए हैं। वह कुछ और लेने के लिए प्रयास किया जा रहा है। फिर एक और व्यवस्था बनाकर दूर-दराज से आई वंचित छात्राओं के लिए उनमें रखने की व्यवस्था की जाएंगे।
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छात्र संगठनों की प्रमुख मांगें
छात्रावास सुविधा प्राप्त करने वाली छात्राओं का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाए।
छात्राओं के घर और विश्वविद्यालय से दूरी को स्पष्ट किया जाए।
मेरिट और आरक्षण नीति के आधार पर आवंटन प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की जाए।
तीन अगस्त के बाद दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों के लिए छात्रावास पोर्टल दोबारा खोला जाए।
दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं के लिए प्राथमिकता और अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था की जाए।
पोर्टल की तकनीकी खामी के कारण दो बार फीस कट गई है। इसलिए छात्राओं की राशि वापस की जाए।

कुरुक्षेत्र। वीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए छात्र। संवाद