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Mahendragarh-Narnaul News: 400 साल पुराना दुबलाना, आज भी विकास और उपलब्धियों में आगे
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फोटो 5गांव दुबलाना में स्थित प्राचीन मंदिर।संवाद
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मंडी अटेली। नारनौल से 13 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-152डी के पास स्थित दुबलाना गांव करीब 400 साल पुराना है। गांव के वयोवृद्ध तुलसीराम नंबरदार और साहित्यकार सभाचंद सुभाष के अनुसार, मामचंद के तीन पुत्रों ने इस गांव की स्थापना की थी। लगभग 3200 की आबादी वाला यह अहीर बाहुल्य गांव आज शिक्षा, शौर्य और सामाजिक सेवा के लिए पूरे क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है।
गांव में माध्यमिक स्कूल, डाकघर, उप स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी, सामुदायिक भवन, सीसीटीवी कैमरे, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां ठाकुरजी, बाबा दाढ़ी वाला और शांतिनाथ के मंदिर आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। तीज का प्रसिद्ध मेला हर वर्ष बड़ी धूमधाम से आयोजित होता है। वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए सिपाही गाहड़ सिंह का स्मारक गांव के वीर इतिहास की याद दिलाता है।
पर्यावरण संरक्षण में भी दुबलाना आगे है। सूबेदार राजेंद्र सिंह ने वन विभाग के 5000 फलदार पौधों की देखरेख की, जबकि नरवीर, अंकित, देशराज और भूपसिंह सहित कई ग्रामीणों ने सैकड़ों पेड़ लगाकर गांव को हरा-भरा बनाया।
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शिक्षा के क्षेत्र में गांव ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। यहां से आईएएस अधिकारी सुशील यादव और मोनिका यादव निकले हैं। कर्नल राहुल भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा कई अधिकारी, डॉक्टर, बैंक अधिकारी, शिक्षक, प्रोफेसर, वैज्ञानिक और आईआईटी से शिक्षित युवा देशभर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सरपंच आशा रानी ने बताया कि गांव में अधिकांश जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन जोहड़ के लिए नहरी पानी और युवाओं के लिए खेल स्टेडियम की मांग अभी भी पूरी नहीं हो सकी है।
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गांव में माध्यमिक स्कूल, डाकघर, उप स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी, सामुदायिक भवन, सीसीटीवी कैमरे, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां ठाकुरजी, बाबा दाढ़ी वाला और शांतिनाथ के मंदिर आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। तीज का प्रसिद्ध मेला हर वर्ष बड़ी धूमधाम से आयोजित होता है। वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए सिपाही गाहड़ सिंह का स्मारक गांव के वीर इतिहास की याद दिलाता है।
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पर्यावरण संरक्षण में भी दुबलाना आगे है। सूबेदार राजेंद्र सिंह ने वन विभाग के 5000 फलदार पौधों की देखरेख की, जबकि नरवीर, अंकित, देशराज और भूपसिंह सहित कई ग्रामीणों ने सैकड़ों पेड़ लगाकर गांव को हरा-भरा बनाया।
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शिक्षा के क्षेत्र में गांव ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। यहां से आईएएस अधिकारी सुशील यादव और मोनिका यादव निकले हैं। कर्नल राहुल भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा कई अधिकारी, डॉक्टर, बैंक अधिकारी, शिक्षक, प्रोफेसर, वैज्ञानिक और आईआईटी से शिक्षित युवा देशभर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सरपंच आशा रानी ने बताया कि गांव में अधिकांश जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन जोहड़ के लिए नहरी पानी और युवाओं के लिए खेल स्टेडियम की मांग अभी भी पूरी नहीं हो सकी है।